ईरान हिंसक विरोध प्रदर्शनों की जद में है। राजधानी तेहरान से लेकर पारसाबाद तक, प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे हैं, इस्लामिक गणराज्य के अंत की मांग कर रहे हैं। दिसंबर 2025 से शुरू हुआ यह आंदोलन, अब अपने चरम पर है। शुरुआत में ईरान के लोग महंगाई, मुद्रा के अवमूल्यन, बढ़ती गरीबी और राजनीतिक अस्थिरता के खिलाफ थे लेकिन अब यह आंदोलन पूरी तरह से सरकार विरोधी हो गया है।
8 जनवरी 2026 की रात को प्रदर्शन बहुत तेज हो गए। अमेरिका में रहने वाले निर्वासित पूर्व क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने लोगों से शाम 8 बजे सड़कों पर उतरकर नारे लगाने की अपील की। वह शाह मोहम्मद रजा पहलवी के सबसे बड़े बेटे हैं। शाह मोहम्मद रजा पहलवी, ईरान के अंतिम शाह थे।
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ईरान में क्या हो रहा है?
ईरान में लाखों लोग सड़क पर उतरे हैं। उनके हाथों में तख्तियां हैं, अयातुल्ला खामेनेई और सरकार के खिलाफ लोग नाराज हैं। सड़कों को ब्लॉक किया जा रहा है, नारेबाजी हो रही है। प्रदर्शनकारी, 'यह आखिरी लड़ाई है, पहलवी की बारी है, जावेद शाह, शाह जिंदाबाद, रजा शाह, तुम्हारी रूप को शांति मिले, तानाशाह मुर्दाबाद, इस्लामिक रिपब्लिक मुर्दाबाद जैसे नारे दे रहे हैं।'
क्या एक और शाह के लिए तैयार है ईरान?
तेहरान, मशहद, इस्फहान, किर्मानशाह और पारसाबाद जैसे शहरों में लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। कुछ जगहों पर लोग पुराने शेर और सूरज वाले झंडे लहरा रहे हैं। रजा पहलवी अब 65 साल के हैं। 1979 की इस्लामिक क्रांति में उनके पिता की 40 साल की सत्ता खत्म हुई थी। जब उनके साम्राज्य का अंत हुआ तो वह सिर्फ 16 साल के थे। वह अमेरिका में निर्वासित जीवन जी रहे हैं और खुद को विपक्ष का प्रमुख चेहरा बता रहे हैं।
रजा पहलवी ने कहा है कि अगर प्रदर्शन सफल हुए तो वो ट्रांजिशन पीरियड में ईरान का नेतृत्व करने को तैयार हैं, लेकिन उन्होंने कोई विस्तृत योजना नहीं बताई है। विश्लेषकों का कहना है कि रजा पहलवी का प्रभाव बढ़ा है। 2020 में यूक्रेन फ्लाइट गिरने और 2025 में ईरान-इजराइल युद्ध के बाद अब रजा पहलवी को सत्ता में लाने की मांग बढ़ी है।
रजा पहलवी का साथ कौन दे रहा है?
इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू उनके बड़े समर्थक हैं, लेकिन यह गठजोड़ कई ईरानियों में विवादास्पद है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है और चेतावनी दी है कि अगर सरकार हिंसा करती है तो अमेरिका सख्त कदम उठाएगा, लेकिन ट्रंप अभी रजा पहलवी को पूरी तरह समर्थन देने से हिचक रहे हैं।
ईरान की इस्लामिक रिपब्लिक ने विरोध को दबाने के लिए इंटरनेट और फोन लाइनें पूरी तरह बंद कर दीं हैं। सुरक्षा बलों की हिंसक कार्रवाई में कम से कम 34 लोग मारे गए हैं, हजारों लोग ईरान की जेलों में ठूंस दिए गए है। ईरान की सरकार विरोध को आतंकवाद बता रही है।
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कौन चाहता है ईरान में राजशाही?
कई ईरानी पुरानी राजशाही के दिनों की यादों को महसूस कर रहे हैं। 1970 के दशक तक, ईरान एक प्रगतिशील देश था, पश्चिमी सुधार लागू हो रहे थे, फिर इस्लामिक क्रांति के बाद ईरान, कट्टरपंथियों के कब्जे में आ गया। ईरान के धार्मिक शासन में अभी भ्रष्टाचार चरम पर है, कई देशों ने प्रतिबंध लगाया है, आर्थिक स्थिति बेहाल है। युवा इस्लामिक रिपब्लिक से आजादी चाहते हैं।
कुछ विश्लेषक कहते हैं कि ये राजशाही की वापसी की असली मांग नहीं, बल्कि वर्तमान शासन से तंग आकर कोई भी विकल्प तलाशना है। रजा पहलवी विवादास्पद हैं। कुछ लोक उन्हें एकजुटता का प्रतीक मान रहे हैं, कुछ लोगो की नजर में वह विभाजनकारी है।
मौजूदा प्रदर्शन बीते एक दशक में 5वां सबसे बड़ा विरोध है। अगर सरकार ने हिंसा से दबाया तो ट्रंप दखल दे सकते हैं। अभी तक ईरान में अस्थिरता है, अशांति है और लोग सरकार पर भड़के हैं। ईरान का भविष्य क्या होगा, यह आने वाले दिनों में तय होगा।
