ईरान में गुरुवार की रात 100 से अधिक शहरों में हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद देशभर में इंटरनेट और टेलीफोन सेवा को ठप कर दिया गया है। अभी तक 45 से अधिक प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है। उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी ताजा धमकी में कहा कि अगर ईरान के अधिकारी विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों को मारते हैं तो वह ईरान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे। व्यापाक विरोध प्रदर्शन और मृतकों की बढ़ती संख्या के बाद अमेरिकी दखल की आशंका बढ़ गई है। उधर, अमेरिकी विदेश विभाग लगातार ईरान प्रदर्शन से जुड़े वीडियो साझा कर रहा है।
गुरुवार को राजधानी तेहरान में बड़ी संख्या में जनता सड़क पर उतरी और अली खामेनेई के खिलाफ खूब नारेबाजी की। लोगों ने अपने घरों से भी आवाज बुलंद की। प्रदर्शनकारी ईरान में शाह शासन की वापसी और खामेनेई शासन का अंत चाहते हैं। गुरुवार की रात विरोध प्रदर्शन शुरू होते ही ईरान की सरकार ने तुरंत इंटरनेट और फोन सेवा बंद कर दी। बावजूद इसके हजारों की भीड़ सड़कों पर डटी रही।
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'मुल्लाओं के शासन का अंत'
जेल में बंद ईरान की नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी के बेटे अली रहमानी ने भी इस्लामी सत्ता को उखाड़ फेंकने की अपील की। उन्होंने कहा, '28 दिसंबर 2025 से ईरान के लोग सड़कों पर उतरे हैं। ठीक वैसे ही जैसे वे 2009 और 2019 में उतरे थे। हर बार वही मांगें उठीं; इस्लामी गणराज्य का अंत, पितृसत्तात्मक, तानाशाही और धार्मिक शासन का खात्मा, मौलवियों का अंत और मुल्लाओं के शासन का अंत।'
गुरुवार की रात रही सबसे खूनी
ईरान में महंगाई के खिलाफ पिछले 13 दिन से प्रदर्शन जारी हैं। ईरान ह्यूमन राइट्स के मुताबिक कल यानी गुरुवार की रात सबसे खूनी थी। इस दिन सबसे अधिक 13 लोगों की जान गई। वहीं अब तक 8 नाबालिग समेत 45 लोगों की मौत हो चुकी है। देशभर के अलग-अलग हिस्सों में दुकान और बाजार बंद रहे। अभी तक 2000 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है। बढ़ते विरोध प्रदर्शन के कारण ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और वहां की सेना पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
शाह की अपील पर सड़कों पर उतरी जनता
ईरान के निर्वासित शाह रेजा पहलवी ने गुरुवार की रात करीब 8 बजे लोगों घरों से निकलने की अपील की। उनकी इस अपील का असर यह हुआ कि राजधानी तेहरान समेत पूरे देश में जनता सड़क पर उतर आई। हजारों की भीड़ ने यह 'आखिरी लड़ाई है, पहलवी लौटेगा' और राजधानी तेहरान में इस्लामी गणराज्य व तानाशाह मुर्दाबाद जैसे नारे लगाए। सोशल मीडिया पर कुछ ईरानी नागरिकों ने इजरायल के समर्थन में वीडियो बनाए और वहां के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से दखल की अपील की।
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कहां-कितने की गई जान?
समाचार एजेंसी मिजान के मुताबिक तेहरान के करीब एक कस्बे में पुलिस कर्नल पर चाकू से हमला किया गया। वहीं फार्स न्यूज एजेंसी ने बताया कि चहारमहल और लोरदेगान शहर में दो सुरक्षाबलों की मौत हुई है। गोलीबारी में 30 अन्य लोग घायल हैं। ईरान के खोरासान रजावी प्रांत के उप राज्यपाल के मुताबिक चेनरान में थाने पर हमला किया गया है। यहां पांच लोगों की जान गई है।
ईरान की जनता सड़कों पर क्यों?
पिछले साल जून में ईरान और इजरायल के बीच 12 दिनों का युद्ध चला था। इसके बाद से ही उसकी आर्थिक स्थिति तेजी से बिगड़ी है। आज ईरान की मुद्रा रियाल अपने इतिहास में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई। मौजूदा समय में 1 डॉलर के मुकाबले 14 लाख रियाल विनिमय दर है। बढ़ती महंगाई के कारण ईरान के दुकानदार सड़कों पर उतरे। बाद में 10 विश्वविद्यालयों के छात्र भी इसमें शामिल हो गए। देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन राष्ट्रव्यापी बन गए। पहले मंहगाई पर जोर था, लेकिन अब जनता सत्ता परिवर्तन की मांग रही है।