उत्तरी अटलांटिक महासागर में 7 जनवरी 2026 को अमेरिकी सेना ने रूसी झंडे वाले तेल टैंकर ‘मैरिनेरा (बेला-1)’ को जब्त कर लिया। रूस टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, इस जहाज पर कुल 28 लोग सवार थे, जिनमें 3 भारतीय, 2 रूसी, 6 जॉर्जियाई और 17 यूक्रेनी नागरिक शामिल थे। अमेरिका की ओर से अभी तक क्रू मेंबर के पहचान के संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं आई है। भारत की ओर से इस पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई हैं। रिपोर्ट में परिवहन मंत्रालय के हवाले से बताया गया है कि रूसी झंडे वाले इस तेल टैंकर को हिरासत में लिया गया है। बताया जा रहा है कि अमेरिकी सेना कैरिबियन सागर से ही इस टैंकर का पीछा कर रही थी।
अमेरिका की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि टैंकर को वेनेजुएला से कथित संबंधों के चलते जब्त किया गया। वहीं, रूस के विदेश मंत्रालय ने इस कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का उल्लंघन बताया है और अमेरिका की कड़ी आलोचना करते हुए इसे नव-उपनिवेशवाद की नीति करार दिया है।
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रूसी मंत्रालय का बयान
रूसी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि अमेरिका सभी क्रू सदस्यों के साथ मानवीय व्यवहार करे और रूसी नागरिकों को तुरंत वापस भेजे। मंत्रालय ने वाशिंगटन से अंतरराष्ट्रीय कानूनों, मानदंडों और सिद्धांतों का सख्ती से पालन करने की अपील की है। साथ ही मैरिनेरा टैंकर और अन्य जहाजों के खिलाफ की जा रही सभी अवैध कार्रवाइयों को तुरंत रोकने की मांग की गई है। रूस ने कहा कि कुछ अमेरिकी अधिकारियों का यह दावा कि जहाज पर कब्जा वेनेजुएला के प्राकृतिक संसाधनों पर वाशिंगटन के नियंत्रण की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, पूरी तरह निंदनीय है। रूस ने ऐसी नव-औपनिवेशिक सोच को सिरे से खारिज किया है।
अंग्रेजी अखबार रॉयटर्स के मुताबिक, हाल के समय में यह पहली बार है जब अमेरिकी सेना ने रूसी झंडे वाले किसी जहाज को जब्त किया है। TASS न्यूज एजेंसी के अनुसार, सत्तारूढ़ यूनाइटेड रशिया पार्टी के वरिष्ठ सांसद आंद्रेई क्लिशस ने अमेरिकी कार्रवाई को खुली समुद्री डकैती बताया।
रूस ने दिखाए सबूत
रूस के परिवहन मंत्रालय ने कहा कि जिस समय से अमेरिकी नौसेना ने जहाज पर चढ़ाई की, तब से उसका जहाज से संपर्क टूट गया है। रूस टुडे ने जहाज के आसपास मंडराते एक हेलीकॉप्टर की तस्वीर जारी की और बताया कि अमेरिकी सेना प्रतिबंधित टैंकर पर चढ़ने की कोशिश कर रही थी।
बयान में यह भी कहा गया है कि अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के लगाए गए एकतरफा प्रतिबंध अवैध हैं। खुले समुद्र में जहाजों को जब्त करने या अधिकार क्षेत्र स्थापित करने की कोशिशों को किसी भी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि मैरिनेरा को रूसी कानून के तहत अस्थायी रूप से रूसी झंडे के साथ यात्रा करने की अनुमति दी गई थी।
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मंत्रालय ने यह भी कहा कि रूस ने कभी इस तरह की कार्रवाइयों की सहमति नहीं दी। इसके उलट, पिछले कई हफ्तों से अमेरिकी तटरक्षक बल के मैरिनेरा का पीछा किए जाने को लेकर रूस ने अमेरिकी सरकार के समक्ष आधिकारिक विरोध दर्ज कराया है और इसे तुरंत बंद करने की मांग की है। सामने आए तथ्यों के अनुसार, अमेरिकी सेना का एक नागरिक जहाज पर चढ़कर उस पर कब्जा करना और चालक दल को हिरासत में लेना अंतरराष्ट्रीय कानून और समुद्री स्वतंत्रता के मूल सिद्धांतों का गंभीर उल्लंघन है।
अमेरिका ने क्या कहा?
अमेरिका ने पुष्टि की है कि उसने उत्तरी अटलांटिक और कैरेबियन क्षेत्र में वेनेजुएला से जुड़े दो प्रतिबंधित तेल टैंकरों को जब्त किया है। इनमें से एक रूसी झंडे वाला बेला 1 है, जिसने पिछले महीने अमेरिकी नाकाबंदी से बचने के बाद अपना नाम बदलकर मैरिनेरा कर लिया था। दूसरा जहाज पनामा के झंडे वाला एम सोफिया है, जो प्रतिबंधों के दायरे में आता है। इस मामले पर ब्रिटेन का भी बयान आया है, जिसमें कहा गया है कि उसने बेला 1 को जब्त करने में अमेरिका का समर्थन किया है।