UAE को झटका: सऊदी अरब ने 9 दिन में यमन में कैसे पलटी हारी हुई बाजी?
कल तक अलग देश की मांग करने वाला यमन का विद्रोही गुट एसटीसी आज खुद ही टूट की कगार पर खड़ा है। सऊदी अरब की आक्रामक रणनीति के आगे न केवल यूएई को झुकना पड़ा, बल्कि एसटीसी को भी अपने कब्जे वाले शहरों से पीछे हटना पड़ा है।

एसटीसी पर आक्रामक सऊदी अरब। (AI Generated Image)
सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच तनातनी का माहौल है। इसकी वजह यमन का विद्रोही गुट दक्षिणी संक्रमणकालीन परिषद (STC) है। सऊदी अरब का आरोप है कि एसटीसी को यूएई का समर्थन प्राप्त है। हालांकि अबू धाबी इन आरोपों को खारिज करता है। 30 दिसंबर को सऊदी अरब ने यमन के मुकाला बंदरगाह पर हमला किया था। महज 9 दिन के सैन्य अभियान के बाद दक्षिणी यमन से यूएई समर्थित एसटीसी के पैर उखाड़ने लगे हैं। अदन शहर पर यमन की सरकारी सेना का कब्जा हो चुका है।
2014 से यमन गृह युद्ध की चपेट में है। एक बड़े भूभाग पर हूती विद्रोहियों का कब्जा है। वहीं कुछ हिस्से पर राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद (PLC) और दक्षिणी हिस्से में एसटीसी का नियंत्रण है। हूती के खिलाफ लड़ाई में एसटीसी राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद का समर्थक रहा है। मगर दक्षिण यमन को अलग देश बनाने की वकालत भी करता है। सऊदी अरब और यूएई उस अरब गठबंधन का हिस्सा है, जो हूती के खिलाफ पीएलसी के साथ हैं। मगर यूएई ने कुछ समय से पीएलसी के अलावा एसटीसी को भी सपोर्ट किया। यही बात सऊदी अरब को पंसद नहीं आ रही है।
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सऊदी अरब ने कैसे जीती हारी बाजी?
एसटीसी ने दक्षिण यमन में जनमत संग्रह और जल्द ही नया देश बनाने तक का ऐलान कर दिया था। माना जा रहा था कि किसी भी वक्त दक्षिण यमन नाम से एक नया देश अस्तित्व में आ सकता है। मगर सिर्फ 9 दिन के एक्शन में सऊदी अरब ने हारी हुई बाजी को जीत में बदल दिया है। आज एसटीसी न केवल टूट के कगार पर है, बल्कि उसका एक बड़ा भूभाग भी सऊदी समर्थित यमन सेना ने छीन लिया है।
- 30 दिसंबर को मुकाला पोर्ट पर हमले के तुरंत बाद सऊदी अरब ने यूएई पर एसटीसी को हथियार सप्लाई करने का आरोप लगाया। सऊदी अरब ने एयर स्ट्राइक में यूएई से भेजे गए सैन्य वाहनों को नष्ट किया। यह हमला यूएई और एसटीसी दोनों के लिए झटके के तौर पर थे। तुरंत बाद सऊदी अरब ने आबू धाबी पर अपनी सेना को यमन से बुलाने का दबाव बनाया। सऊदी अरब की मांग के आगे यूएई को झुकना पड़ा।
- सऊदी अरब के दवाब के बाद यमन ने आतंकवाद विरोधी अभियान खत्म कर दिया और यूएई की सेना को वापस जाने का आदेश दिया। यूएई की सेना के लौटने के बाद सऊदी अरब ने एसटीसी लड़ाकों पर बमबारी तेज की और उनसे हद्रामौत और अल-महारा प्रांतों को छीन लिया। एसटीसी को पीछे धकेलने के बाद सऊदी अरब ने एक शांति वार्ता का आयोजन किया। इसमें एसटीसी को भी बुलाया गया। मगर एसटीसी के नेता अल-जुबैदी सऊदी अरब नहीं पहुंचे। जबकि उनके गठबंधन के कुछ नेता वहां मौजूद रहे।
- सऊदी अरब के कहने पर यमन की सरकार ने अल-जुबैदी के खिलाफ राजद्रोह का केस शुरू किया और पीएलसी से भी हटा दिया। इसके बाद अल-जुबैदी की एसटीसी पर भीषण बमबारी की गई। भयानक हमले के बाद एसटीसी को पीछे हटने पड़ा। अब अदन सरकार और राष्ट्रपति भवन पर सऊदी समर्थित यमन की सरकारी सेना का कब्जा हो गया है। यमन के अदन शहर पर एसटीसी का कब्जा था। एयरपोर्ट भी विद्रोहियों के हवाले थे। मगर सऊदी अरब की ताजा बमबारी के बाद अदन शहर एसटीसी के कब्जे से बाहर निकल गया है।
- सऊदी अरब ने जमीनी कार्रवाई के अलावा एसटीसी के कई नेताओं को भी तोड़ लिया। इनमें सबसे अहम नाम अब्दुल रहमान अल-महरमी है। महरमी अभी रियाद में है। वह सऊदी अरब के साथ अपने रिश्ते बेहतर करने में जुटे हैं। माना जा रहा है कि एसटीसी की अगली कमान अल-महरमी को ही मिल सकती है।
यमन से भागा एसटीसी का मुखिया अल-जुबैदी
अब खबर आ रही है कि एसटीसी नेता ऐदारौस अल-जुबैदी अबू धाबी भाग चुके हैं। जुबैदी अदन बंदरगाह से एक जहाज पर सवार होकर सोमालीलैंड के बेरबेरा बंदरगाह पहुंचा। इसके बाद यूएई के अधिकारियों के साथ मोगादिशु एयरपोर्ट पहुंचा। यहां से उड़ा विमान अबू धाबी के अल-रीफ सैन्य हवाई अड्डे पर उतरा।
अभी अग्निपरीक्षा बाकी
यमन के अल-धाले प्रांत में सऊदी अरब और यमन की सरकारी सेना की अग्निपरीक्षा होगी। यह इलाका अल-जुबैदी का गढ़ है। यहां एसटीसी का खूब प्रभाव है। अगर यहां सऊदी अरब एसटीसी का प्रभाव कम करने में सफल होता है तो यह उसकी बड़ी जीत होगी। उधर, सऊदी अरब के समर्थन से यमन की सरकार हूती विरोधी बलों को दोबारा एकजुट करने लगी है। सभी को अब सरकार के अधीन लाया जा रहा है, ताकि भविष्य में एसटीसी जैसे विद्रोह का सामना न करना पड़े।
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एसटीसी ने क्यों बढ़ाई सऊदी की टेंशन?
एसटीसी ने हाल ही में यमन के हद्रामौत और अल-महारा प्रांतों पर कब्जा किया। पहले इन प्रांतों पर पीएलसी का नियंत्रण था। यह राज्य सऊदी अरब की सीमा से लगते हैं। सऊदी अरब को चिंता सता रही थी कि अगर एसटीसी लड़ाके उसकी सीमा तक पहुंच जाते हैं तो वहां अशांति फैल सकती है। इसके अलावा सऊदी अरब के आर्थिक हित भी दांव पर होंगे, क्योंकि यमन का दक्षिणी भाग अदन की खाड़ी और लाल सागर से लगता है। अगर यहां यूएई की मदद से एसटीसी नया देश बना लेता है तो क्षेत्र में सऊदी प्रभुत्व कमजोर पड़ेगा और इस अहम अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्ग पर अबू धाबी की ताकत बढ़ेगी।
कौन सा दांव खेल रहा था यूएई?
हाल ही में इजरायल ने सोमालीलैंड को देश के तौर पर मान्यता दी है। सऊदी अरब समेत 19 मुस्लिम देशों ने इजरायल के इस कदम की आलोचना की। मगर संयुक्त अरब अमीरात ने अभी तक कोई बयान नहीं दिया। माना जा रहा है कि यूएई सोमालीलैंड के समर्थन में है। इसकी एक वजह यह है कि सोमालीलैंड दक्षिण यमन की ठीक सामने लाल सागर के तट पर स्थित है। यूएई एसटीसी और सोमालीलैंड से अपने बेहतर रिश्ते स्थापित करके लाल सागर के दोनों तट पर अपनी पकड़ को मजबूत बनाना चाह रहा है।
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