अमेरिका किसी भी हाल में ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की नीयत में है। अमेरिकी प्रशासन के बयान से साफ है कि दो तरह की रणनीति पर काम चल रहा है। पहली रणनीति ग्रीनलैंड को खरीदने की है और दूसरी सैन्य ताकत से कब्जे की है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने बुधवार को कहा, 'राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का हमेशा ही इस क्षेत्र (ग्रीनलैंड) को खरीदने का इरादा रहा है।' दूसरी तरफ व्हाइट हाउस ने सैन्य विकल्प का भी सुझाव दिया।
मौजूदा समय में ट्रंप प्रशासन सैन्य समेत विभिन्न विकल्पों पर चर्चा कर रहा है। कुछ दिन पहले ही ट्रंप ने कहा था कि वह ग्रीनलैंड के मामले को दो महीने में सुलझा लेंगे। बुधवार को अपनी प्रेस ब्रीफिंग में व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने सैन्य विकल्प पर कहा, 'राष्ट्रपति ट्रंप के लिए सभी विकल्प खुले हैं। वह इस बात का आकलन कर रहे हैं कि अमेरिका के सर्वोत्तम हित में क्या है? लेकिन मैं बस इतना कहना चाहूंगा कि राष्ट्रपति का पहला विकल्प हमेशा कूटनीति ही रहा है।'
यह भी पढ़ें: 'आओ, मुझे पकड़ो' कहने वाले राष्ट्रपति के आगे झुके ट्रंप, अब मिलने बुलाया
ग्रीनलैंड को खरीदने और जबरन कब्जे पर मंथन
उधर, ग्रीनलैंड को खरीदने के सवाल पर विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा, 'राष्ट्रपति का इरादा शुरुआत से ही यही रहा है। उन्होंने यह बात बहुत पहले ही कह दी थी। यह कोई नई बात नहीं है। उन्होंने अपने पहले कार्यकाल में भी इसकी बात की थी। वह कोई पहले अमेरिकी राष्ट्रपति नहीं हैं, जिन्होंने इस पर विचार किया है कि हम ग्रीनलैंड को कैसे हासिल कर सकते हैं? इसमें दिलचस्पी तो है।'
अगर खतरा होगा तो सैन्य विकल्प भी खुला: रूबियो
अमेरिकी विदेश मंत्री ने आगे कहा, 'अगर राष्ट्रपति को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए कोई खतरा दिखाई देता है तो हर राष्ट्रपति के पास सैन्य साधनों के माध्यम से उसका समाधान करने का विकल्प होता है। एक राजनयिक के तौर पर हम हमेशा इसे अलग-अलग तरीकों से सुलझाने को प्राथमिकता देते हैं।'
यह भी पढ़ें: क्या अब भारत पर लगने जा रहा 500 प्रतिशत टैरिफ? समझ लीजिए ट्रंप का प्लान
ग्रीनलैंड पर ट्रंप की नीयत क्यों खराब?
ग्रीनलैंड आर्कटिक सर्कल के ऊपर स्थित है। यह डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है। ग्रीनलैंड के पास अपनी सरकार है। सिर्फ विदेशी मामलों को डेनमार्क की संसद संभालती है। यह इलाका खनिज संसाधनों से प्रचुर मात्रा में भरा है। यही कारण है कि अमेरिका की इस पर नजर है। हालांकि वह ग्रीनलैंड पर कब्जे के पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा का तर्क देता है। अमेरिका का कहना है कि ग्रीनलैंड पर कब्जे के बाद चीन और रूस की आक्रामकता को रोकने में मदद मिलेगी।
दबी जुबान में यूरोप ने अमेरिका के खिलाफ उठाई आवाज
उत्तरी कैरोलिना के रिपब्लिकन सीनेटर थॉम टिलिस भी सेना के माध्यम से ग्रीनलैंड पर कब्जे की बात कह चुके हैं। उधर, डेनमार्क ने ट्रंप के दावों के खिलाफ आवाज उठाई। यूरोपीय नेताओं ने भी एक संयुक्त बयान जारी किया। इसमें कहा गया, 'ग्रीनलैंड वहां के लोगों का है। ग्रीनलैंड से जुड़े मामलों पर फैसला लेने का अधिकार सिर्फ डेनमार्क और ग्रीनलैंड को है। डेनमार्क साफ कह चुका है कि ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है। हालांकि उम्मीद जताई जा रही है कि अगले हफ्ते डेनमार्क और ग्रीनलैंड के विदेश मंत्रियों की मुलाकात मार्को रूबियो से होगी।