अमेरिका ने ईरान के खिलाफ चल रहे युद्ध में अपनी लंबी दूरी की स्टेल्थ क्रूज मिसाइल JASSM-ER का बड़ा स्टॉक इस्तेमाल करने का फैसला किया है। ये मिसाइलें दुश्मन की एयर डिफेंस से बचकर दूर से सटीक हमला करने में सक्षम हैं। हर मिसाइल की कीमत करीब 1.5 मिलियन डॉलर है।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका अब इन मिसाइलों को पश्चिम एशिया के बेस पर भेज रहा है। अमेरिका ईरान पर चौतरफा घिरे हैं। अमेरिका में ही उनका अब विरोध शुरू हुआ है। लोग सवाल कर रहे हैं कि आखिर अगर इस जंग में अमेरिका का नुकसान हो रहा है तो फिर डोनाल्ड ट्रंप इसे जारी क्यों रख रहे हैं?

ट्रंप ने ईरान को क्या धमकी दी है?

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को धमकी दी है कि अगर शांति समझौता नहीं मानता या हॉर्मुज स्ट्रेट नहीं खोलता तो तबाही तय है। उन्होंने एक बार फिर दोहराया है कि अब समय खत्म हो रहा है। 48 घंटे बाद नरक जैसे हालात ईरान के होंगे। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने पहले 10 दिन का समय दिया था, लेकिन अब सिर्फ 48 घंटे बचे हैं। अमेरिका, ईरान पर नए सिरे से हमले करने जा रहा है। 

यह भी पढ़ें: ईरान के जबड़े से अपने पायलट को निकाल लाया अमेरिका, कैसे? जानिए

JASSM-ER मिसाइल क्या है?

जॉइंट एयर-टू-सर्फेस मिसाइल-एक्सटेंडेड रेंज (JASSM-ER), लॉकहीड मार्टिन कंपनी ने बनाई है। यह लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइल है। इसकी रेंज करीब 930 किलोमीटर से ज्यादा है। ये F-15E, F-16 जैसे फाइटर जेट्स और B-52H, B-1B, B-2 जैसे फाइटर जेट से लॉन्च की जा सकती है। 

कितनी तबाही मचा सकता है JASSM-ER?

JASSM-ER में 1000 पाउंड का पेनेट्रेटिंग ब्लास्ट-फ्रैगमेंटेशन वारहेड है, जो किसी भी निशाने को पूरी तरह से तबाह कर सकता है। दिलचस्प बात यह है कि ये मिसाइलें, घूमते टार्गेट को भी भेदने में सक्षम हैं।

कैसे अमेरिका की मदद करेगा?

JASSM-ER को लॉन्च करने के लिए ईरान की सीमा पर जाने की जरूरत नहीं है। ग्लोबल पॉजिशनिंग सिस्टम और ग्लोबल मैप के जरिए, अमेरिका, 500 किलोमीटर दूरी से हमले कर सकता है। 

ईरान से लड़ने के लिए किन मिसाइलों का इस्तेमाल हुआ?

जंग के 35 दिन से ज्यादा का वक्त बीत गया है। युद्ध के पहले चार हफ्तों में अमेरिकी ऑपरेशंस में 1000 से ज्यादा JASSM-ER मिसाइलें खर्च हो चुकी हैं। युद्ध शुरू होने से पहले अमेरिका के पास करीब 2300 ऐसी मिसाइलें थीं। अब जितनी मिसाइलें बची हैं, उन्हें ईरान के लिए भेजा जा रहा है। रिपोर्ट बताती है कि अगर ये भी तबाह हो गईं तो दुनिया में करीब 425 मिसाइलें ही बची रहेंगी।

यह भी पढ़ें: ईरान से जंग ही नहीं, 5 मुद्दे और हैं जो ट्रंप के जी का जंजाल बन गए हैं

कैसे ईरान के करीब आएंगी ये मिसाइलें?

अमेरिका ने प्रशांत महासागर और दूसरे इलाकों से मिसाइलें उठाकर, सेंट्रल कमांड के बेस और ब्रिटेन के फेयरफोर्ड एयरबेस पर भेजना शुरू कर दिया है। इससे चीन जैसे दूसरे संभावित खतरे के लिए तैयार स्टॉक कम हो रहा है। ज्यादातर मिसाइलें अभी इस्तेमाल नहीं होंगी, लेकिन उन्हें ईरान ऑपरेशन के लिए तैयार रखा जा रहा है। छोटी रेंज वाली JASSM मिसाइलों का भी बड़ा हिस्सा इस युद्ध में लगा दिया गया है।

किस विमान की ली जाएगी मदद?

B-52H बॉम्बर विमानों की तैनाती इन्हीं मिसाइलों के लिए की जाएगी। 3 मार्च 2026 को एक अमेरिकी B-52H स्ट्रैटोफोर्ट्रेस बॉम्बर अनजान जगह पर लैंडिंग कर रहा था। यह विमान, JASSM-ER मिसाइलों को ले जाने में सक्षम है। ईरान पर संभावित हमलों में अहम भूमिका निभा सकता है। 

यह भी पढ़ें: न जमीन पर कब्जा, न हवा में मजबूत, जेट नहीं, ईरान ने अमेरिका का हौसला गिराया है

ईरान में क्या निशाना बनाना चाहता है अमेरिका?

अमेरिका इन मिसाइलों को इस्तेमाल करके ईरान की रणनीतिक तौर पर अहम जगहों को निशाना बनाएगा। ईरान के पेट्रोलियम ठिकानों से लेकर सैन्य ठिकानों तक, अमेरिका हमला कर सकता है। ये मिसाइलें भी ईरान के साथ-साथ अमेरिका को भी महंगी पड़ने वाली हैं।