पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अपनी ही पिछली सरकारों की नीतियों पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने संसद में यह माना कि अमेरिका ने पाकिस्तान को 'टॉयलेट पेपर' से भी बदतर समझा। उनका कहना था कि अमेरिका को जब जरूरत थी तो हमारा इस्तेमाल किया और फिर कचरे में फेंक दिया। उन्होंने यह भी कहा कि वाशिंगटन के साथ हाथ मिलाना देश की सबसे बड़ी भूल थी, जिसका खामियाजा पाकिस्तान आज भी भुगत रहा है।
आसिफ ने विशेष रूप से 1999 के बाद और 9/11 हमलों के बाद लिए गए फैसलों पर सवाल उठाए। उनका यह सीधा हमला पूर्व में सेना चीफ रहें जिया-उल-हक और परवेज मुशर्रफ पर था। उन्होंने कहा कि इन लोगों ने देश को दूसरों की जंग में झोंक दिया।
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ख्वाजा आसिफ ने क्या कहा?
ख्वाजा आसिफ ने कहा, 'जब सोवियत यूनियन अफगानिस्तान आया था, तब काबूल में मौजूद सरकार ने उसे आने की अनुमति दी थी। इसके बावजूद अमेरिका ने एक झूठी कहानी बनाई और उसे सच की तरह दुनिया के सामने पेश किया। इसी दौरान हमारे देश की शिक्षा व्यवस्था में ऐसे बदलाव किए गए, जिन्हें आज तक ठीक नहीं किया जा सका। अमेरिका को सही साबित करने के लिए हमने अपने इतिहास की तारीखें तक बदल दीं, ताकि उनकी बनाई कहानी सही लगे। इसके बाद भी हमें कोई समझ नहीं आई।'
ख्वाजा आसिफ ने आगे कहा, 'आज तक यह साफ नहीं हो पाया कि 9/11 हमले के पीछे कौन था। इस हमले में न तो कोई पश्तून था और न ही कोई हजारा। इन सभी कहानियों के पीछे परवेज मुशर्रफ थे क्योंकि उन्हें अमेरिका की वैशाखी चाहिए थी।'
जिहाद के नाम पर फैलाया गया भ्रम
ख्वाजा आसिफ ने दशकों से चले आ रहे नैरेटिव को चुनौती देते हुए कहा कि अफगानिस्तान की लड़ाई कभी भी धार्मिक युद्ध या जिहाद नहीं थी। यह पूरी तरह से अमेरिका के भू-राजनीतिक हितों को साधने का एक जरिया था।
उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि उस वक्त लोगों को गुमराह करने के लिए शिक्षा व्यवस्था तक में बदलाव किए गए ताकि इन युद्धों को सही ठहराया जा सके। इस वजह से पाकिस्तान में हिंसा और कट्टरपंथ बढ़ा जबकि अमेरिका अपना काम निकलते ही वहां से निकल गया।
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भारी नुकसान
ख्वाजा आसिफ के मुताबिक, अमेरिका के कहने पर पाकिस्तान ने तालिबान के खिलाफ रुख अपनाया लेकिन अंत में वाशिंगटन ने पाकिस्तान को हिंसा और आर्थिक बदहाली के दलदल में अकेला छोड़ दिया। उन्होंने साफ कहा कि इन गलत फैसलों की वजह से पाकिस्तान को जो सामाजिक और आर्थिक चोट पहुंची है, उसकी भरपाई कभी नहीं की जा सकती।
