ईरान पर चौतरफा दबाव बढ़ता जा रहा है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि परमाणु समझौते का समय तेजी से खत्म हो रहा है। अब अमेरिका ने ईरान सरकार पर इंटरनेट बंद करके मुनाफा कमाने का आरोप लगाया है। उधर, यूरोपीय यूनियन ने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स को आतंकी सूची में डाल दिया है। इस बीच ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर का कहना है कि हमारा लक्ष्य ईरान को परमाण हथियार न विकसित करने देना है। हम अपने सहयोगियों के साथ मिलकर काम करने में जुटे हैं। 

 

मतलब साफ है कि पश्चिम के देश ईरान के खिलाफ लामबंद हो रहे हैं। ईरान को भी पता है कि किसी भी वक्त हमला किया जा सकता है। यही कारण है कि ईरान ने एक नई धमकी दी है। उसने कहा कि अमेरिकी हमले के जवाब में उसका पलटवार सीमित नहीं होगा।

 

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अमेरिकी एयरक्राफ्ट करियर को तबाह करने की धमकी

ईरान की सेना ने हमलों के जवाब में अमेरिकी एयरबेस और विमानवाहक पोतों को निशाना बनाने की धमकी दी। सरकारी टेलीविजन में ईरान के सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अकरमिनिया ने कहा कि अमेरिकी विमानवाहक पोतों में बड़ी कमजोरियां हैं। खाड़ी क्षेत्र में स्थित कई अमेरिकी सैन्य ठिकाने हमारी मध्यम दूरी की मिसाइलों की जद में हैं।

पूरा ईरान हाई अलर्ट मोड पर

अमेरिकी सैन्य तैनाती की बीच न केवल ईरान की सेना बल्कि पूरा देश हाई अलर्ट है। एक तरफ पर्दे के पीछे कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। दूसरी तरह ईरान युद्ध की भी तैयारी में जुटा है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने शुक्रवार को तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन और यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से फोन पर बात की।  


इस दौरान पेजेशकियन ने कहा कि ईरान किसी भी अमेरिकी हमला कै तुरंत और निर्णायक जवाब देगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ईरान युद्ध नहीं, बातचीत चाहता है।

 

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ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची लगातार कूटनीतिक प्रयास तेज किए हैं, ताकि तनाव को कम किया जा सके। उन्होंने पाकिस्तान, कतर, यूएई, सऊदी अरब और तुर्की के विदेश मंत्रियों से फोन पर बात की। उन्होंने अपने समकक्षों को बताया कि ईरान परमाणु कार्यक्रम के शांतिपूर्ण स्वरूप पर बैठकर बातचीत करने पर तैयार है, लेकिन अपनी रक्षा क्षमताओं और मिसाइल कार्यक्रम पर बात नहीं करेगा। 

यूरोपीय संघ पर एक्शन लेगा ईरान

यूरोपीय यूनियन ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) को आतंकी सूची में शामिल किया है। अपनी प्रतिाक्रिया में ईरान ने इसे यूरोप का पाखंड बताया और कहा कि यूरोपीय संघ के सदस्य देशों की सेनाओं को आतंकवादी घोषित करके करारा जवाब दिया जाएगा।

इजरायल के करीब पहुंचा अमेरिकी पोत

सऊदी अरब समेत खाड़ी के कई देश अमेरिका पर हमला न करने का दवाब बना रहा हैं। अब खुलासा हुआ है कि वाशिंगटन पहुंचे सऊदी अरब के रक्षा मंत्री को अमेरिका राजी करने में जुटा है, ताकि ईरान पर हमला किया जा सके।

 

उधर, तुर्की ने अमेरिका से ईरान की संप्रभुता का सम्मान करने की अपील की। तमाम कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद अमेरिका लगातार अपनी सैन्य तैनाती बढ़ा रहा है। इजरायल के करीब अकाबा की खाड़ी में अमेरिका का एक और सैन्य पोत तैनात हो चुका है। जॉर्डन में एफ-15ई स्ट्राइक ईगल और कतर में बी-52 बमवर्षक विमानों को तैनात किया गया है।