इजरायल और तुर्की के बीच तनाव पिछले कुछ वर्षों में चरम पर पहुंच चुका है। गाजा में हमास के खिलाफ जंग के बाद रिश्तों में और खटास आई है। इजरायल की सेना भी तुर्की को बड़ा खतरा मानने लगी है। हाल ही में इजरायल के पूर्व प्रधानमंत्री नेफ्ताली बेनेट ने कहा था कि ईरान के बाद तुर्की अगला लक्ष्य होगा। उन्होंने तुर्की को नया ईरान कहकर संबोधित किया था। इस बीच तुर्की ने इजरायल के साथ रिश्तों को और खराब करने वाला एक कदम उठाया है।
मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक तुर्की ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, रक्षा मंत्री इसराइल काट्ज, राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन गिविर, आईडीएफ चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल एयाल जमीर समेत अन्य 35 अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इसमें सभी के लिए 4,596 साल तक की जेल की मांग की गई है।
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बेंजामिन नेतन्याहू समेत सभी 35 इजरायली अधिकारियों पर तुर्की ने मानवता के खिलाफ अपराध, पिछले साल एक समुद्री बेड़े को गाजा तक पहुंचने से रोकने और उसमें सवार लोगों के साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया है।
कुर्दों का नरसंहार करते हैं एर्दोगन
तुर्की के इस कदम पर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। नेतन्याहू ने तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैय्यप एर्दोगन पर कुर्दों के नरसंहार का आरोप लगाया। उन्होंने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा, 'मेरे अुगवाई में इजरायल ईरान के आतंकवादी शासन और उसके गुर्गों के खिलाफ लड़ाई जारी रखेगा। दूसरी तरफ एर्दोगन उन्हें मदद पहुंचाते हैं और यहां तक कि अपने ही कुर्द नागरिकों का भी नरसंहार करते हैं।'
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तुर्की का चुप रहना ही बेहतर: इजरायली रक्षा मंत्री
ईरान के मिसाइल हमले का जवाब न देने वाले और कागजी शेर एर्दोगन अब यहूदी विरोधी भावना के दायरे में भाग रहे हैं। इजरायल के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व के खिलाफ तुर्की में दिखावटी मुकदमों की मांग उठा रहे हैं। यह कितनी हास्यास्पद बात है कि मुस्लिम ब्रदरहुड का एक आदमी, जिसने कुर्दों का नरसंहार किया, अपने हमास सहयोगियों से खुद का बचाव कर रहे इजरायल पर नरसंहार का आरोप लगा रहा है। इजरायल पूरी ताकत और दृढ़ संकल्प के साथ अपना बचाव करना जारी रखेगा। उसके (तुर्की) लिए चुप रहना ही बेहतर होगा।'
