पाकिस्तानी तालिबान ने लंबे समय से पाकिस्तान की नाक में दम करके रखा है। अब चर्चा है कि उत्तर पश्चिमी पाकिस्तान में अफगानिस्तान से लगती सीमा पर पाकिस्तानी सेना कोई ऑपरेशन चला सकती है। इसी के चलते उस इलाके से 70 हजार से ज्यादा लोग अपना घर छोड़कर चले गए हैं। स्थानीय निवासियों और अधिकारियों के इस दावे को अब पाकिस्तान के रक्षा मंत्री मोहम्मद आसिफ ने गलत बताया है। उनका कहना है कि खैबर पख्तूनख्वा में न तो कोई मिलिट्री ऑपरेशन चल रहा है और न ही इसकी कोई योजना है।
इस्लामाबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मोहम्मद आसिफ ने कहा कि मिलिट्री ऑपरेशन नहीं खराब मौसम के चलते पलायन हो रहा है। दरअसल, कुछ हफ्तों से खैबर पख्तूनख्वा के तिराह शहर के लोग अपने घर छोड़कर जा रहे हैं। लोगों को डर है कि इस इलाके में पाकिस्तानी तालिबान को निशाना बनाने के मकसद से पाकिस्तानी आर्मी बड़ा ऑपरेशन कर सकती है। मोहम्मद आसिफ की यह टिप्पणी इसी संबंध में आई है।
पाकिस्तान सरकार पर बरसे खैबर पख्तूनख्वा के लोग
यह पलायन ऐसे समय में शुरू हुआ है जब मस्जिदों के लाउडस्पीकर से एलान किए जा रहे हैं कि लोग 23 जनवरी तक तिराह छोड़ दें। बता दें कि पिछले साल अगस्त में पाकिस्तान ने उत्तर-पश्चिम के बाजौर जिले में पाकिस्तानी तालिबान के खिलाफ एक मिलिट्री ऑपरेशन शुरू किया था, जिसके कारण लाखों लोग विस्थापित हुए थे। खैबर पख्तूनख्वा की प्रांतीय सरकार के प्रवक्ता शफी जान ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर विस्थापित लोगों की दुर्दशा के लिए पाकिस्तानी सरकार को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि इस्लामाबाद के अधिकारी सैन्य अभियान के बारे में अपने पहले के रुख से पीछे हट रहे हैं।
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खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सुहैल अफरीदी ने सेना की आलोचना करते हुए कहा है कि उनकी सरकार सैनिकों को तिराह में पूरी तरह से कोई मिलिट्री ऑपरेशन चलाने की अनुमति नहीं देगी।अफरीदी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के नेता हैं जिनकी पार्टी के अगुवा जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान हैं। सेना का कहना है कि वह तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान या टीटीपी के नाम से मशहूर पाकिस्तानी तालिबान के खिलाफ खुफिया जानकारी पर आधारित अभियान जारी रखेगी।
ह्यूमन शील्ड की तरह इस्तेमाल करते हैं आतंकी
अधिकारियों का कहना है कि TTP के कई नेताओं और लड़ाकों ने अफगानिस्तान में शरण ली है और उनमें से सैकड़ों तिराह में घुस गए हैं। कई बार जब आतंकवादी ठिकानों पर छापेमारी होती है तो ये आतंकी स्थानीय लोगों को ह्यूमन शील्ड की तरह इस्तेमाल करते हैं।
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इस इलाके में राहत कार्य पर नजर रख रहे स्थानीय सरकारी प्रशासक तलहा रफीक आलम ने बताया कि अब तक स्थानीय अधिकारियों ने तिराह से लगभग 10,000 परिवारों (लगभग 70,000 लोग) के पलानय को दर्ज किया है। तिराह लगभग 150,000 लोगों की आबादी वाला इलाका है। आलम ने कहा कि रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि मूल रूप से 23 जनवरी निर्धारित की गई थी जिसे बढ़ाकर 5 फरवरी कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था की स्थिति में सुधार होने पर विस्थापित लोग वापस लौट सकेंगे।
