बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना ने गुरुवार को हुए चुनाव को रद्द करने की मांग की है। उनका कहना है कि यह चुनाव बिना मतदाताओं के और असंवैधानिक है। चुनावों को लेकर जारी एक बयान में, हसीना ने ‘माताओं, बहनों और माइनॉरिटी कम्युनिटीज़ समेत सभी स्तर के लोगों’ को धन्यवाद दिया, जिन्होंने यूनुस की धोखाधड़ी वाली कोशिश को खारिज कर दिया, जिस पर उन्होंने ‘गैर-कानूनी और गैर-संवैधानिक तरीके से’ सत्ता हथियाने का आरोप लगाया।
हसीना ने बांग्लादेश की मौजूदा अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने गैर-संवैधानिक और गैर-कानूनी तरीके से सत्ता हासिल की है। उन्होंने कहा, 'आज का तथाकथित चुनाव जिसे यूनुस ने ऑर्गनाइज़ किया था, जिन्होंने गैर-कानूनी और गैर-संवैधानिक तरीकों से सत्ता हासिल की, असल में एक सोच-समझकर किया गया काम था।' उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव में 'लोगों के वोटिंग अधिकार, डेमोक्रेटिक मूल्यों और संविधान की भावना' को नज़रअंदाज़ किया गया और इसे 'अवामी लीग और वोटरों के बिना ऑर्गनाइज़ किया गया।
यह भी पढ़ें: बांग्लादेश में 12 को चुनाव, पोस्टर से शेख हसीना गायब क्यों? पार्टी दफ्तर सुनसान
चुनाव को बताया धोखाधड़ी
चुनावों को 'धोखाधड़ी' बताते हुए, हसीना ने कहा कि ये चुनाव उनकी पार्टी अवामी लीग के बिना और मतदाताओं के बिना कराए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि वोटरों की संख्या बहुत कम थी और ढाका शहर तथा देश के दूसरे हिस्सों में मतदान केंद्र 'पूरी तरह से मतदाताओं से खाली' थे। उन्होंने कहा, 'चुनाव आयोग की जानकारी के अनुसार, सुबह 11 बजे तक (साढ़े तीन घंटे में) सिर्फ 14.96% वोट पड़े थे। वोटिंग के सबसे अच्छे समय में इतनी कम भागीदारी यह साबित करती है कि लोगों ने अवामी लीग के बिना इस चुनाव का बहिष्कार किया और इसे ठुकरा दिया।'
पूर्व प्रधानमंत्री ने अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस पर लोगों के वोट देने के अधिकार, लोकतंत्र के मूल्यों और संविधान की अनदेखी करने का आरोप लगाया।' उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, ‘11 फरवरी की शाम से ही यह नाटक शुरू हो गया, मतदान केंद्रों पर कब्जा करना, गोलीबारी करना, पैसे बांटकर वोट खरीदना, बैलट पेपर पर अपनी मुहर लगाना और नतीजों की शीट पर एजेंटों के हस्ताक्षर करवाने' जैसे काम किए गए।
कहा- लोगों को डराया
हसीना ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ दिनों में आवामी लीग के वोटर, समर्थक, शुभचिंतक और अल्पसंख्यक समुदायों पर लगातार हमले, गिरफ्तारियां, डराने-धमकाने और डर का माहौल बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘उनका मकसद था कि लोगों को जबरदस्ती मतदान केंद्रों पर ले जाया जाए, लेकिन इसके बावजूद, इन लोगों ने इस धांधली वाले चुनाव को बायकॉट कर दिया और इसे ठुकरा दिया। नतीजा यह हुआ कि ज्यादातर मतदान केंद्र लगभग खाली रहे। मतदाता ही नहीं आए।’
इसके अलावा, उन्होंने वोटर लिस्ट पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि खासकर ढाका में वोटर लिस्ट में वोटरों की संख्या असामान्य रूप से बहुत बढ़ गई है, जो बहुत संदिग्ध और विश्वास करने लायक नहीं है। उनके मुताबिक चुनाव में जबरदस्ती, धमकी और हमलों से लोगों को वोट डालने के लिए मजबूर करने की कोशिश हुई, लेकिन लोग नहीं गए। इसलिए शेख हसीना ने इस चुनाव को फर्जी करार दिया और वोटर लिस्ट में भी गड़बड़ी किए जाने की बात कही।
तारिक रहमान बड़ा चेहरा
बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को चुनाव हो रहे हैं। यह देश का पहला चुनाव है जो शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद हो रहा है। हसीना को 2024 में बड़े छात्र-आंदोलन (जिसे कई लोग Gen Z uprising कहते हैं) के बाद देश छोड़कर भागना पड़ा था। अब वह भारत में निर्वासित (exile) जीवन जी रही हैं, और उनकी पार्टी (आवामी लीग) को चुनाव लड़ने से बैन कर दिया गया है।
यह भी पढ़ें: शेख हसीना के भाषण पर भड़क गया बांग्लादेश, भारत के लिए कह दी बड़ी बात
इस बार बांग्लादेश में 12.7 करोड़ से ज्यादा लोग वोट डालने के योग्य हैं। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के नेता तारिक रहमान अगली सरकार बनाने के सबसे बड़े दावेदार हैं। वह पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे हैं। उन्होंने 17 साल लंदन में खुद-निर्वासन में गुजारे थे और दिसंबर 2025 में वापस बांग्लादेश लौटे। तारिक रहमान ने वादा किया है कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आई तो वह लोकतंत्र की संस्थाओं को दोबारा मजबूत करेंगे, कानून का राज बहाल करेंगे, और रेंग रही अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाएंगे।
