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बांग्लादेश में 12 को चुनाव, पोस्टर से शेख हसीना गायब क्यों? पार्टी दफ्तर सुनसान

बांग्लादेश में आम चुनाव शेख हसीना की गैरमौजूदगी में हो रहे हैं। बांग्लादेश में ज्यादातर जगहों पर खालिदा जिया के पोस्टर लगे हुए हैं, जबकि पूर्व पीएम शेख हसीना सड़कों, चौक-चौराहों से पोस्टरों में गायब हैं।

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बांग्लादेश चुनाव। Photo Credit- PTI

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बांग्लादेश में गुरुवार (12 फरवरी, 2026) को आम चुनाव के लिए वोटिंग होनी है। चुनाव की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। चुनाव में मुख्य लड़ाई बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और कट्टरपंथी जमात ए इस्लामी के बीच है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग पर बैन लगा दिया गया है, जिससे उनकी पार्टी चुनाव में शामिल होने से वंचित रह गई है। इस तरह से पड़ोसी अशांत बांग्लादेश 18 महीनों की लंबी राजनीतिक अस्थिरता के बाद एक स्थित सरकार के लिए वोट करेगा।

 

बांग्लादेश के चुनाव आयोग के अनुसार, देशभर में हजारों की तादात में वोटिंग सेंटर तैयार किए गए हैं। 12 फरवरी को 299 संसदीय सीटों के लिए वोट डाले जाएंगे। मतदान सुबह साढ़े 7.30 बजे से शुरू होगा। पूरी मतदान प्रक्रिया बैलेट पेपर के माध्यम से करवाई जाएगी। 

 

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12 फरवरी को वोटों की गिनती

मतदान पूरा होने के बाद 12 फरवरी को ही शाम 4 बजे से वोटों की गिनती शुरू हो जाएगी। चुनाव आयोग ने अनुमान जताया है कि चुनावी परिणाम अगले 24 घंटों में आ जाएंगे। देश में 10 फरवरी की सुबह साढ़े 7.30 बजे चुनाव प्रचार बंद हो जाएगा।

 

बता दें कि बांग्लादेश की आबादी इस समय 18 करोड़ से ज्यादा है। इसमें से 12.6 करोड़ मतदाता हैं। इसमें से लगभग 6.4 करोड़ पुरुष और लगभग 6.2 करोड़ महिलाएं हैं।

शेख हसीना की गैरमौजूदगी में चुनाव

इस बीच बांग्लादेश में आम चुनाव शेख हसीना की गैरमौजूदगी में हो रहे हैं। बांग्लादेश में ज्यादातर जगहों पर खालिदा जिया के पोस्टर लगे हुए हैं, जबकि पूर्व पीएम शेख हसीना सड़कों, चौक-चौराहों से पोस्टरों में गायब हैं। राजधानी ढाका में लगे ज्यादातर पोस्टरों में खालिदा जिया और उनके बेटे तारिक रहमान के पोस्टर लगे हैं। यह 2014, 2018 और 2022 के बाद पहली बार है कि बांग्लादेश पर राज करने वाली और जिनके पोस्टर से ढाका की सड़कें पटी रहती थीं, वही शेख हसीना आम चुनाव से गुमनाम हैं।

 

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बीएनपी के सत्ता में आने की उम्मीद

दरअसल, 20 साल बाद बीएनपी को एक बार फिर से सत्ता में वापसी की उम्मीद है। बीएनपी की टॉप पॉलिसी बनाने वाली बॉडी के सदस्य और बड़े हिंदू नेता गोयेश्वर चंद्र रॉय के मुताबिक, 'हम लोगों से बाहर जाकर वोट देने के लिए कह रहे हैं, उन्हें पिछले 17 सालों से इससे दूर रखा गया है।'

 

वहीं, ढाका के गुलिस्तान इलाके में मौजूद अवामी लीग के केंद्रीय कार्यालय के अंदर-बाहर दोनों जगह सन्नाटा पसरा हुआ है। ऐसे में आवामी लीग के बैन के बाद बांग्लादेश में मुख्य मुकाबला BNP और जमात-ए-इस्लामी में है। इसमें भी BNP पूरे देश में सक्रिय होकर चुनाव जीतने की ओर ध्यान लगाए हुए है। दूसरी तरफ कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी शांत बैठकर चुनाव में उलटफेर करने का इंतजार कर रही है।


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