ईरान की सरकार ने एक बार फिर विपक्षी नेताओं और सुधारवादी आंदोलन से जुड़े चेहरों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। सुरक्षा बलों ने देशभर में छापेमारी कर कई बड़े नेताओं को हिरासत में ले लिया है। जानकारों का मानना है कि यह कार्रवाई देश में उठ रही विरोध की आवाजों को पूरी तरह बंद करने की एक कोशिश है।

 

इससे पहले भी ईरान में हुए देशव्यापी प्रदर्शनों को जबरन दबाया गया था। उस दौरान हुई हिंसा में हजारों लोगों की जान गई थी और बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को जेल में डाल दिया गया था। इस कार्रवाई से साफ है कि सरकार किसी भी तरह के विद्रोह को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।

 

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प्रमुख गिरफ्तारियां और सजा

इस कड़ी में सबसे बड़ा नाम नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी का है। खबरों के मुताबिक, उन्हें दोबारा गिरफ्तार कर सात साल से ज्यादा की जेल की सजा सुनाई गई है। इसके अलावा सुधारवादी मोर्चे की प्रमुख अजर मंसूरी और पूर्व राजनयिक मोहसेन अमीनजादेह समेत कई अन्य महत्वपूर्ण कार्यकर्ताओं को भी हिरासत में लिया गया है।

कौन हैं नरगिस मोहम्मदी? 

नरगिस मोहम्मदी ईरान की प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं, जो महिलाओं के अधिकारों और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करती रही हैं। वह 21 अप्रैल 1972 को जन्मीं और इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद मानवाधिकार क्षेत्र में सक्रिय हुईं।

नरगिस मोहम्मदी शिरीन एबादी द्वारा स्थापित डिफेंडर्स ऑफ ह्यूमन राइट्स सेंटर (DHRC) की उपाध्यक्ष हैं।

 

वह ईरान में अनिवार्य हिजाब कानूनों, मृत्युदंड और राजनीतिक दमन के खिलाफ लगातार आवाज उठाती रही हैं। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद उनके परिवार को भी नुकसान हुआ, जब उनके परिवार के लोगों को गिरफ्तार किया गया।

 

उन्हें 2023 में नोबेल शांति पुरस्कार मिला, जो जेल में बंद रहते हुए ईरानी महिलाओं के संघर्ष का प्रतीक बना। उनके बच्चे ओस्लो में पुरस्कार लेने गए। यह सम्मान  उनको ईरान में महिलाओं पर अत्याचार के खिलाफ लड़ाई के लिए दिया गया।


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13 बार गिरफ्तारी

फरवरी 2026 में ईरान की अदालत ने उन्हें साढ़े सात साल की जेल की सजा सुनाई। इसमें 6 साल राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ साजिश और डेढ़ साल प्रचार के आरोप में शामिल है। साथ ही उनका निर्वासन और यात्रा पूरी तरह से प्रतिबंध है । उन्हें 13 बार गिरफ्तार किया गया है, जिसमें दिसंबर 2025 में मशहद में एक शोक सभा के बाद हुई गिरफ्तारी शामिल है। 

बढ़ता अंतरराष्ट्रीय दबाव

ईरान की यह सख्ती ऐसे समय में सामने आई है जब वह अमेरिका के साथ परमाणु समझौते को लेकर चर्चा के दौर में है। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि कोई ठोस समझौता नहीं होता, तो सैन्य कार्रवाई का विकल्प खुला है। ऐसे में आंतरिक विद्रोह को दबाकर ईरान की सरकार अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखना चाहती है।