सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की हत्या के बाद ईरान के नेतृत्व में एक शून्य पैदा हो गया है। देश को चलाने और अमेरिकी-इजरायली हमलों का करारा जवाब अब संक्रमणकालीन परिषद के आदेश पर दिया जाएगा। अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान के संविधान के अनुच्छेद 111 के तहत अस्थायी परिषद का गठन कर दिया गया है। यह शक्तिशाली संवैधानिक निगरानी संस्था तब तक ईरान का नेतृत्व करेगी जब तक देश को नया सर्वोच्च नेता नहीं मिल जाता है।

 

ईरान ने अयातुल्ला अलीरेजा अराफी को अस्थायी परिषद में जगह दी है। इसके अलावा राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश गुलाम-हुसैन मोहसेनी-एजेई को भी सदस्य बनाया गया है। वहीं विशेषज्ञों की 88 सदस्यीय सभा नए सर्वोच्च नेता का चयन करेगी। हालांकि चयन तक ईरान पर अस्थायी परिषद ही शासन रहेगा। 

 

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माना जा रहा है कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) और ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी भी अंतरिम परिषद में अहम भूमिका निभाएंगे। अली लारीजानी ईरानी संसद के पूर्व अध्यक्ष के अलावा अली खामेनेई के सलाहकार थे।

कैसे होगा सुप्रीम लीडर का चुनाव?

ईरान की जनता हर आठ साल में 88 सदस्यीय विशेषज्ञ सभा का चुनाव करती है। हर चुनाव लड़ने वाले सदस्य की जांच और अनुमोदन गार्जियन काउंसिल के माध्यम से किया जाता है। इस काउंसिल का आखिरी बार चुनाव अली खामेनेई ने किया था। विशेषज्ञ सभा में जिसे भी साधारण बहुमत मिलता है, वही अगला सर्वोच्च नेता बनता है। 

 

तीन सदस्यीय अस्थायी परिषद में कौन-कौन?

  • राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन
  • सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश गुलाम-हुसैन मोहसेनी-एजेई 
  • गार्जियन काउंसिल के अयातुल्ला अलीरेजा अराफी 

सुप्रीम लीडर की रेस में कौन-कौन?

अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई का नाम सर्वोच्च नेता की रेस में सबसे आगे है। उनका आईआरजीसी में भी खासा प्रभाव है। धर्मगुरु अलीरेजा अराफी का भी नाम चल रहा है। वे गार्जियन काउंसिल के सदस्य भी हैं। इसके अलावा विशेषज्ञों की सभा के उपाध्यक्ष भी हैं। उन्हें अस्थायी परिषद में भी जगह दी गई है। अराफी ईरान के मदरसा सिस्टम के भी हेड है। मोहम्मद मेहदी मीरबाघेरी का नाम भी चर्चा में है। वह कोम शहर में इस्लामी विज्ञान अकादमी के मुखिया हैं। 

 

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इस्लामिक ईरान के संस्थापक अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के पोते हसन खुमैनी का नाम भी चल रहा है। ईरान के सर्वोच्च न्यायायल के मुख्य न्यायाधीश गुलाम-हुसैन मोहसेनी-एजेई भी सुप्रीम लीडर की रेस में हैं। वे ईरान के खुफिया मंत्री भी रह चुके हैं। गुलाम की पहचान एक कट्टर नेता के तौर पर होती है।