स्विटजरलैंड का दावोस शहर इन दिनों खूब चर्चा में हैं। भारत कई राज्यों के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री या राज्यों के प्रतिनिधि वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम (WEF) में हिस्सा लेने के लिए दावोस पहुंचे हैं। भारत के कई राज्यों ने कई बड़े कंपनियों के साथ कई करार भी किए हैं और उन्हें निवेश का न्योता दिया है। अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी यहां पहुंचे और ग्रीनलैंड के अलावा दुनिया के तमाम मुद्दों पर बयान देकर इस शहर को और चर्चा में ला दिया है। दूर देश का एक बर्फीला सा शहर इन वैश्विक घटनाओं का केंद्र पहली बार नहीं बन रहा है। लगभग हर साल ही इस देश में ऐसे आयोजन होते हैं, जिनमें दुनियाभर के नेता, कारोबारी या अन्य लोग इकट्ठा होते रहते हैं।
तमाम खूबियों के लिए मशहूर स्विटजरलैंड देश हर साल जनवरी के महीने में जैसे दुनिया का केंद्र बन जाता है। 50 से ज्यादा देशों के नेता बिजनेस के सिलसिले में बातचीत करने, योजनाएं बनाएं और एक-दूसरे से करार करने के लिए यहां इकट्ठा होते हैं। पहाड़ों से घिरा यह छोटा सा शहर कुछ दिनों के लिए एक कार्निवाल में बदल जाता है। ऐसे में इस शहर की खूबियां जानना तो बनता है।
क्यों खास है दावोस?
असल में एक बड़े क्षेत्र के छोटे से हिस्से का नाम ही दावोस है। जिस रिजॉर्ट में वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम का आयोजन होता है, उसका नाम भी दावोस ही है। हर साल जब वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम का आयोजन होता है तो इसका मकसद दुनिया की आर्थिक दशा बदलना होता है। हर साल के कार्यक्रम में सैकड़ों भाषण होते हैं, सैकड़ों सेशन होते हैं और आर्थिक विकास को लेकर चर्चा होती है।
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बहुत सारे लोग यहां सिर्फ नेटवर्क बनाने, बड़े-बड़े कारोबारियों और नेताओं से मिलने ही आते हैं। 4 दिन तक दुनिया के बड़े-बड़े लोग एक ही जगह पर होते हैं, ऐसे में कारोबारियों, नेताओं और पत्रकारों के लिए यह एक बेहतरीन मौका होता है।
क्या वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम में जाने का पैसा लगता है?
असल में तो इस कार्यक्रम में जाने वाले ज्यादातर लोगों को पैसा नहीं देना पड़ता है। कंपनियों को 27000 स्विस फ्रैंक्स (लगभग 31 लाख रुपये) देने होते हैं। हालांकि, अरबों-खरबों का कारोबार करने वाली कंपनियों के लिए यह राशि मायने नहीं रखती है। बस इतना है कि इस कार्यक्रम में आने के लिए आपको WEF का सदस्य होना चाहिए। इस सदस्यता के लिए हर साल 60 हजार से 6 लाख स्विस फ्रैंक्स तक की फीस चुकानी पड़ती है।
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इस कॉन्फ्रेंस के लिए अलग-अलग कलर के पास दिए जाते हैं। देशों के राष्ट्राध्यक्षों या इस तरह की शख्सियतों को खास सफेद रंग का बैज दिया जाता है जिससे वे हर जगह जा सकें।
वहीं, हिस्सा लेने आए लोगों के पति यानी पत्नी को अलग रंग, पत्रकारों को अलग रंग और अन्य कैटगरी के लोगों को अलग रंग के बैज दिए जाते हैं। सबसे निचला स्तर 'होटल बैज' का है, जिसका मतलब है कि आप कॉन्फ्रेंस में कतई नहीं जा सकते। आप सिर्फ नाइट पार्टी में जा सकते हैं या फिर स्कीइंग करने जा सकते हैं।
