दुनिया एक नए तानाशाही के दौर की गवाह बन रही है। जहां लोकतंत्र का चोला ओढ़े अमेरिका किसी भी देश पर हमला कर सकता है। वहां के राष्ट्राध्यक्ष का अपहरण कर सकता है। आसपास के देशों को खुले तौर पर धमका सकता है। वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले की दुनियाभर में निंदा के बीच ट्रंप अपनी ही शेखी बघारने में जुटे हैं। मादुरो के खिलाफ सफल ऑपरेशन ने ट्रंप को मनबढ़ बना दिया है। 

 

यही कारण है कि वह अब कई देशों को खुली धमकी देने में जुटे हैं। डोनाल्ड ट्रंप, उनके सहयोगी और मीडिया रिपोर्ट्स से पता चलता है कि मौजूदा समय में छह देश अमेरिका के रडार पर हैं। प्रबल संभावना है कि ट्रंप प्रशासन 2026 में इन देशों के खिलाफ कोई बड़ा कदम उठा सकता है। आइये समझते हैं कि आखिर डोनाल्ड ट्रंप को इन देशों से समस्या क्या है?

 

डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी ताजा धमकी में तीन मैक्सिको, क्यूबा और कोलंबिया की सरकारों के खिलाफ एक्शन की धमकी दी। ट्रंप का आरोप है कि यह देश अमेरिका में ड्रग्स की तस्करी करते हैं। यहां रूस और चीन का दखल है। इस कारण पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिकी हित खतरे में है। यूरोप में अमेरिका की निगाह ग्रीनलैंड पर टिकी है। ट्रंप प्रशासन कई बार आर्थिक और सैन्य ताकत से कब्जे की बात खुलकर कह चुका है। ट्रंप की दादागिरी के सामने यूरोपीय नेताओं ने भी चुप्पी साध रखी है। 

 

ईरान: डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान को हमले की धमकी दे रहे हैं। पिछले साल जून महीने में अमेरिकी सेना ईरान के तीन परमाणु संयंत्रों पर हमला कर चुकी है। उस बार आरोप था कि ईरान परमाणु बम बना रहा है। मगर अबकी बहाना अलग है। ट्रंप ईरान के प्रदर्शनकारियों के साथ खड़े हैं। अपनी चेतावनी में कहा कि अगर ईरान ने प्रदर्शनकारियों पर को मारा तो अमेरिका दखल देगा। दरअसल, अमेरिका और इजरायल पिछले कई दशकों से ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई को हटाना चाहते हैं, क्योंकि उन्हें रूस का सहयोगी माना जाता है।

 

क्यूबा: अमेरिका के फ्लोरिडा तट से कुछ ही दूरी में छोटा सा देश क्यूबा बसा है। यह वामपंथ का गढ़ है। पिछले कई दशकों से अमेरिका और क्यूबा में तनातनी रही है। रूस से करीबी के कारण क्यूबा हमेशा अमेरिका के निशाने पर था। माना जा रहा है कि अमेरिका क्यूबा पर किसी भी वक्त धावा बोल सकता है। जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से पूछा गया कि क्या क्यूबा अगला निशाना है? जवाब में उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि वह बड़ी मुसीबत में है। एक दिन पहले भी रूबियो ने कहा था कि अगर मैं हवाना में होता और सरकार का हिस्सा होता तो थोड़ा चिंतित होता। ट्रंप खुद ही कह चुके हैं कि क्यूबा पतन के कगार पर है।

 

कोलंबिया: वेनेजुएला का पड़ोसी देश कोलंबिया सबसे अधिक टेंशन में है। इसकी वजह यह है कि डोनाल्ड ट्रंप खुले तौर पर कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो को धमकी दे चुके हैं। उन पर कोकीन तस्करी में शामिल होने का आरोप लगाया है। हाल ही में ट्रंप ने खुलासा किया कि अब कोलिंबिया के राष्ट्रपति को हटाने का अभियान है। उन्होंने यह भी धमकी दी कि वामपंथी नेता को अपनी जान का ख्याल रखना होगा। ट्रंप के जवाब में पेट्रो ने कहा कि मैं आपका इंतजार कर रहा हूं। आओ और मुझे पकड़ो।

 

मैक्सिको: ट्रंप मैक्सिको पर वही आरोप लगा रहे हैं, जो उन्होंने वेनेजुएला और कोलंबिया पर लगाया। ट्रंप ने अपनी धमकी में कहा कि ड्रग कार्टेल को नियंत्रित करने की खातिर मैक्सिको को कुछ जरूर करना होगा। अब आशंका जताई जा रही है कि ट्रंप प्रशासन ड्रग कार्टेल के बहाने मैक्सिको पर भी हमला कर सकता है।

 

ग्रीनलैंड: पिछले साल से ही डोनाल्ड ट्रंप की निगाह ग्रीनलैंड पर टिकी है। खास बात यह है कि ग्रीनलैंड नाटो सदस्य डेनमार्क का एक स्वायत्त इलाका है। अब अमेरिका की उसी पर ही नीयत खराब हो चुकी है। ट्रंप का तर्क यह है कि अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा की खातिर ग्रीनलैंड पर कब्जा जरूरी है। मगर विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की निगाह यहां पर मौजूद रेयर अर्थ मिनरल्स पर टिकी है। ट्रंप ने 4 जनवरी को कहा, 'हमें ग्रीनलैंड की बिल्कुल जरूरत है। हम लगभग दो महीनों में ग्रीनलैंड के मुद्दे को सुलझा लेंगे।' मतलब साफ है कि दो महीने में अमेरिका ग्रीनलैंड में कुछ बड़ा करने की तैयारी में है। हालांकि डेनमार्क ने इसका कड़ा विरोध जताया है। ट्रंप का कहना है कि ग्रीनलैंड के आसपास रूसी और चीनी जहाज है। इस कारण से यह क्षेत्र अमेरिका के लिए खतरा है।

 

वेनेजुएला: निकोलस मादुरो के अपहरण के बाद वेनेजुएला में अमेरिका की राह आसान नहीं है। वहां की सेना और राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने अमेरिकी आक्रामकता का जवाब देने की बात कही। उधर, अमेरिका ने एक नई धमकी में कहा कि अगर डेल्सी रोड्रिगेज बात नहीं मानती हैं तो अमेरिका वेनेजुएला पर और हमले करेंगे।

डोनाल्ड ट्रंप क्यों देशों को निशाना बना रहे?

  • ट्रंप की नजर वेनेजुएला के तेल और खनिज पदार्थों पर टिकी है। ग्रीनलैंड में रेयर अर्थ मिनरल्स खूब है। अमेरिका चाहता है कि इस क्षेत्र में उसका दबदबा रहे, ताकि रेयर अर्थ मिनरल्स की रेस में वह चीन को पीछे छोड़ सके।

 

  • ईरान में हमले की सबसे खास वजह यह है कि रूस के एक और सहयोगी को खत्म करना और मध्य पूर्व में अमेरिकी स्थिति को मजबूत करना। अगर वहां अमेरिकी हितों वाली सरकार आती है तो ईरान के तेल पर भी अमेरिका का ही कब्जा होगा।

 

  • कोलंबिया पर हमले के पीछे ट्रंप ड्रग्स कार्टेल को कारण बताते हैं। मगर मामला इससे उलट दिख रहा है। दरअसल, जब अमेरिका अप्रवासी लोगों को निकाल रहा था, तब उसने कोलिंबिया के लोगों को भी निकाला था। हथकड़ी बांधने के कारण कोलंबिया ने आपत्ति दर्ज कराई थी और अमेरिका के दो जहाजों को अपने यहां उतारने नहीं दिया था। अब व्यक्तिगत नाराजगी में ही ट्रंप कोलंबिया के राष्ट्रपति को हटाना चाहते हैं।

 

  • क्यूबा न केवल रूस का सहयोगी है, बल्कि वामपंथ का बड़ा गढ़ है। इसकी लोकेशन अमेरिकी तट के बेहद करीब है। सुरक्षा कारणों से अमेरिका क्यूबा को बड़ा खतरा मानता है। दरअसल, एक बार रूस ने यहां मिसाइलें तैनात कर दी थी, जिसे दुनिया क्यूबा मिसाइल संकट के तौर पर जानती हैं। अब अमेरिका नहीं चाहता है कि दोबारा उसे इस स्थिति का सामना करना पड़े।

तो गुंडों वाली भाषा से चलेगी दुनिया

निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद ट्रंप प्रशासन अधिक घमंड में आ गया है। उसकी भाषा शैली बदल गई। अब बातचीत कूटनीति से इतर धमकी भरे अंदाज में अधिक हो रही है। इसका अंदाजा आप मॉर्को रुबियो के एक बयान से लगा सकते हैं, जिसमें उन्होंने कहा, 'दुनिया के लिए संदेश यह है कि इस राष्ट्रपति के साथ खिलवाड़ न करें, क्योंकि इसका नतीजा अच्छा नहीं होगा।'

 

रुबियो के एक बयान से यह भी साफ होता है कि ट्रंप ने वेनेजुएला के खिलाफ लड़ाई ड्रग्स और तेल से अधिक व्यक्तिगत खुन्नस में की। उन्होंने अपने बयान में कहा, 'मादुरो ने ट्रंप की इच्छा के आगे झुकने के बजाय बड़ा बनने का प्रयास किया। नतीजा यह हुआ कि वेनेजुएला के नेता को आंखों पर पट्टी बांधकर एक युद्धपोत से न्यूयॉर्क लाया गया। यहां उन्हें मादक पदार्थों की तस्करी के आरोपों का सामना करना पड़ेगा।' उधर, धमकी भरे स्वर में स्टीफन मिलर ने कहा, 'हम एक महाशक्ति हैं। राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में हम एक महाशक्ति की तरह व्यवहार करेंगे।'