पश्चिमी एशिया में जारी तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने के चलते दुनिया के कई देशों में कच्चे तेल को लेकर संकट खड़ा हो गया है। भारत में भी अब गैस की सप्लाई प्रभावित हो रही है। इस बीच खबर आई है कि भारत अपने पड़ोसी देश बांग्लादेश को 5 हजार टन डीजल की सप्लाई कर रहा है। यह खबर चर्चा का विषय बन गई है क्योंकि बीते कुछ महीनों में बांग्लादेश और भारत के रिश्ते ठीक नहीं रहे हैं। आपसी तनाव के चलते ही बांग्लादेश की क्रिकेट टीम ने भारत में हुए टी20 वर्ल्ड कप में भी हिस्सा नहीं लिया था।
यह डीजल पाइपलाइन के जरिए भारत से बांग्लादेश पहुंचाया जा रहा है। बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPC) के चेयरमैन मोहम्मद रेजानुर ने बताया है कि यह तेल पार्बतीपुर बॉर्डर के जरिए बांग्लादेश पहुंचेगा। वहीं, ईरान और इजरायल के तनाव के चलते कई शिपिंग कंपनियों का माल रास्ते में ही रुक गया है। तेल कंपनियों को भी कच्चा तेल खरीदने में समस्या हो रही है। फिलहाल, तेल के बारे में भारत सरकार और तेल कंपनियों का कहना है कि अगले कम से कम एक महीने तक इस तरह का कोई संकट नहीं आने वाला है।
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हालांकि, गैस को लेकर भारत में अब संकट देखने को मिल रहा है। कई मेट्रो शहरों में होटल और रेस्तरां को कमर्शियल गैस नहीं मिल पाने के चलते वे लगभग ठप होने की कगार पर हैं। इसी तरह गैस की सप्लाई न मिल पाने के चलते कई फैक्ट्रियों का कामकाज भी प्रभावित हो रहा है।
क्यों दिया जा रहा है तेल?
मोहम्मद रेजानुर ने बताया है, 'भारत के साथ हमारा पुराना करार है जिसके तहत भारत हर साल बांग्लादेश को 1.8 लाख टन डीजल की सप्लाई करता है। इसी के तहत 5 हजार टन डीजल बांग्लादेश पहुंच रहा है। समझौते के तहत छह महीने में कम से कम 90 हजार टन डीजल की सप्लाई हो जानी चाहिए। आज 5000 टन की सप्लाई आ रही है और हमें उम्मीद है कि अगले दो महीनों में हमें पूरा 90 हजार टन डीजल मिल जाएगा।'
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पिछले रविवार को बांग्लादेश के ऊर्जा मंत्रालय ने एक बयान में कहा था, 'मौजूदा संकट की स्थिति में कई मीडिया चैनल खबरें चला रहे हैं कि कई लोग जमाखोरी कर रहे हैं और जानबूझकर यह दिखा रहे हैं कि तेल की कमी हो रही है। इसी संकट को दूर करने के लिए सरकार ने अलग-अलग गाड़ियों के लिए तेल की लिमिट तय र दी है। फिर भी यह देखा जा रहा है कि तय लिमिट से ज्यादा तेल बेचा जा रहा है और लोग कालाबाजारी करने के लिए तेल इकट्ठा कर ले रहे हैं।'
