अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का हमास को हटाकर गाजा में एक नई शासन व्यवस्था की स्थापना करने का सपना है। इसमें कई तरह के बोर्ड की स्थापना की जानी है। वहीं कई देशों की सेना को मिलाकर एक नया सैन्य गठबंधन तैयार किया जाएगा। इसका काम गाजा से इजरायली सेना और हमास को हटाकर उनकी जगह लेना है। शनिवार को अमेरिका ने शांति बोर्ड के तहत एक कार्यकारी समिति का गठन किया। मगर इजरायल अमेरिका के इस कदम से खुश नहीं है। ट्रंप प्रशासन के एक साल के कार्यकाल में पहली बार इजरायल और अमेरिका के बीच मतभेद खुलकर सामने आ चुके हैं।
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यकाल ने कार्यसमिति को अपनी नीति के खिलाफ बताया और कहा कि अमेरिका ने उसके साथ समन्वय करके इसका ऐलान नहीं किया है। माना जा रहा है कि कार्यकारी समिति में तुर्की और कतर को शामिल करने से इजरायल नाराज है। इसकी वजह यह है कि दोनों ही देश गाजा में इजरायल की कार्रवाई के सख्त खिलाफ है।
क्यों नाराज है इजरायल?
नेतन्याहू के बयान पर एक अमेरिकी सैन्य अधिकारी ने नाराजगी जताई। एक्सियोस ने अपनी रिपोर्ट में अज्ञात सैन्य अधिकारी का बयान प्रकाशित किया, जिसमें उसने कहा, 'यह हमारा गेम है, उनका नहीं। हमने पिछले कुछ महीनों में गाजा में ऐसे काम किए हैं, जिनके बारे में किसी ने सोचा भी नहीं था और हम आगे बढ़ते रहेंगे।' उधर, इजरायली प्रधानमंत्री ने यह मामला अपने विदेश मंत्री गिदोन सार को अमेरिकी समकक्ष मार्को रुबियो के सामने उठाने का निर्देश दिया है।
इजरायली मीडिया के मुताबिक शांति बोर्ड में तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन को शामिल करने का विरोध नहीं किया। इसकी वजह यह है कि शांति बोर्ड का जमीन स्तर पर सीधा दखल नहीं है। हालांकि इजरायल ने कार्यकारी समिति में तुर्की को शामिल करने का विरोध किया, क्योंकि यह गाजा में स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर काम करेगा। इजरायल यहां तुर्की का दखल नहीं चाहता है। मगर नेतन्याहू के विपरीत ट्रंप बार-बार न केवल एर्दोगन की तारीफ करते हैं, बल्कि कार्यकारी समिति में जगह भी दी।
अमेरिका ने नेतन्याहू को जानबूझकर नहीं बताया
इजरायल के चैनल 12 ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया कि बेंजामिन नेतन्याहू को जानबूझकर कार्यकारी समिति में तुर्की और कतर के शामिल होने की जानकारी नहीं दी गई। अधिकारी का कहना है कि गाजा का मामला अब अमेरिका के हाथ में है। नेतन्याहू ईरान के घटनाक्रम पर ध्यान दें। ट्रंप प्रशासन का उनके साथ बहस करने का कोई इरादा नहीं है।
कार्यकारी समिति में कौन-कौन?
- तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान
- कतर के वरिष्ठ राजनयिक अली थवादी
- मिस्र के खुफिया प्रमुख हसन रशाद
- यूएई के अंतरराष्ट्रीय सहयोग मंत्री रीम अल-हाशिमी
- ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर
- अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ
- ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर
- अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट के सीईओ मार्क रोवन
- इजरायली-साइप्रस व्यवसायी याकिर गाबे
- सिग्रिड काग और निकोले म्लादेनोव
कार्यकारी बोर्ड का काम क्या होगा?
शांति बोर्ड गाजा के पुनर्वास की निगरानी करने वाली सबसे टॉप बॉडी होगी। उसके तहत कार्यकारी समिति होगी। निकोले म्लादेनोव इसके मुखिया होंगे। इसका मुख्य काम राष्ट्रीय समिति (NCAG) के साथ जमीनी स्तर पर समन्वय और काम करना है। वहीं शांति बोर्ड की अध्यक्षता डोनाल्ड ट्रंप करेंगे। उनके अलावा दुनिया के अन्य नेता शामिल होंगे। राष्ट्रीय समिति में 15 फिलिस्तीनी टेक्नोक्रेट्स शामिल होंगे। इस समिति के पास गाजा के लोगों को बुनियादी सेवाएं देने की जिम्मेदारी होगी। राष्ट्रीय समिति की अध्यक्षता फिलिस्तीनी प्राधिकरण के पूर्व उप योजना मंत्री अली शाथ के पास है। कार्यकारी समिति शांति बोर्ड और गाजा की राष्ट्रीय समिति के बीच समन्वय करेगी।
नया संयुक्त राष्ट्र क्यों बना रहा अमेरिका?
जानकारी के मुताबिक अमेरिका ने शुक्रवार को तुर्की, कनाडा और अर्जेंटीना समेत कई देशों को शांति बोर्ड का न्योता भेजा है। वहीं टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका की मंशा शांति बोर्ड को एक ऐसा संगठन बनाना है, जो भविष्य में दुनियाभर के संघर्षों का समाधान खोज सके। मतलब अमेरिका संयुक्त राष्ट्र का एक विकल्प तैयार करने की कोशिश में है।
कैसे चलेगा गाजा का प्रशासन?
- शांति बोर्ड: यह गाजा मामलों की देखरेख करने वाली सबसे टॉप बॉडी होगी। ट्रंप अध्यक्ष और दुनियाभर के राष्ट्राध्यक्ष सदस्य होंगे।
- गाजा कार्यकारी समिति: शांति बोर्ड के अंदर ही एक कार्यकारी शाखा बनाई है। इसे गाजा कार्यकारी समिति नाम दिया गया है। इसका काम युद्ध के बाद गाजा के विकास कार्यों की देखरेख और प्रबंधन करना। इसके अलावा यह गाजा प्रशासन के लिए राष्ट्रीय समिति और शांति बोर्ड के बीच समन्वय करेगा।
- संस्थापक कार्यकारी बोर्ड: इसमें कार्यकारी समिति के ही कई लोगों के नामों को शामिल किया गया है। यह बोर्ड गाजा में शासन क्षमता निर्माण, क्षेत्रीय संबंध, पुनर्निर्माण, निवेश आकर्षण, बड़े पैमाने पर वित्तपोषण और पूंजी जुटाने का काम करेगा।
- गाजा प्रशासन के लिए राष्ट्रीय समिति (NCAG): यह समिति गाजा का प्रशासन व्यवस्था देखेगी। इसमें कुल 15 सदस्य होंगे। फिलिस्तीनी प्राधिकरण के पूर्व उप योजना मंत्री अली शाथ अध्यक्ष हैं। इसे गाजा के लोगों को दैनिक कामकाज और सेवाओं को पहुंचाने का कार्य सौंपा गया है।
- अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल (ISF): यह बल गाजा पट्टी की सुरक्षा व्यवस्था देखेगा। इजरायल की सेना को धीरे-धीरे पीछे हटना होगा। उसकी जगह आईएसएफ जवान तैनात होंगे। इसमें पाकिस्तान समेत कई देशों के सैनिकों को शामिल करने का लक्ष्य है। हालांकि हाल में अजरबैजान ने अपने सैनिक भेजने से साफ मना कर दिया है।
