डोनाल्ड ट्रंप... दुनिया को हड़काने, धौंस जमाने और अपनी चलाने निकले थे। अपने बेतुके बयान से दोस्तों को दुश्मन बना बैठे। कल तक जो यूरोपीय देश साथ थे, उन्होंने भी अलग राह पकड़ ली है। डोनाल्ड ट्रंप किस तरह अलग-थलग पड़ चुके हैं, इसकी एक झलक दावोस में दिखी। अमेरिका ने 50 से अधिक देशों को डोनाल्ड ट्रंप के शांति बोर्ड में शामिल होने का न्योता भेजा। मगर सिर्फ 24 देश ही पहुंचे। कई देशों ने शांति बोर्ड में शामिल होने से साफ मना कर दिया तो कुछ ने इस पर प्रतिक्रिया देना ही उचित नहीं समझा।
डोनाल्ड ट्रंप का व्यवहार निरंकुश है। सोचे समझे बिना कुछ भी बोल देते हैं। उनकी नीतियां बिल्कुल अस्थिर हैं। जब किसी भी शख्स के पास असीम ताकत आती है तो उसका निरंकुश होना स्वाभाविक है, लेकिन उनका अक्खड़पन, बेतुके बयान और वैश्विक नेताओं को बेइज्जत करने का तरीका सबको नहीं भाता है। अब दुनिया के बड़े देशों ने न केवल अमेरिकी नीतियों, बल्कि ट्रंप से भी दूरी बनाना शुरू कर दिया है।
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दावोस में शांति बोर्ड के हस्ताक्षर कार्यक्रम में वही देश पहुंचे जिनकी अमेरिका पर निभर्रता खूब है या वह चाहकर भी अमेरिका की किसी नीति विरोध करने की ताकत नहीं रखते हैं। इनमें से अधिकांश देशों की विदेश नीति तय करने में अमेरिका की भूमिका अहम रहती है। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात को छोड़ दें तो कोई बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश शांति बोर्ड का हिस्सा नहीं बना। ट्रंप भले ही दुनियाभर में इसे बड़ी कामयाबी बता रहे हो, लेकिन वास्तव में यह उनकी बड़ी हार है।
तीन महीने पहले: ट्रंप के साथ कौन-कौन था
पिछले साल अक्टूबर में मिस्र के शर्म अल-शेख शहर में गाजा पर अंतरराष्ट्रीय शांति शिखर सम्मलेन बुलाया गया। डोनाल्ड ट्रंप की अगुवाई में तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन, कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी, जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय, बहरीन के राजा हमद बिन ईसा अल खलीफा, फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, इंडोनेशियाई राष्ट्रपति प्रबोवो सुबिआंतो, जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्त्स, इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, ग्रीस के प्रधानमंत्री क्यारियाकोस मित्सोटाकिस, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और अरब लीग के महासचिव अहमद अबुल घीत, स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज, ओमान के विदेश मंत्री बदर अल बुसैदी, इराक के प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो के अलावा पैराग्वे और नीदरलैंड के प्रतिनिधिमंडल भी पहुंचे। भारत ने विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह को भेजा था।
अब ट्रंप के साथ कौन-कौन है
ट्रंप ने चीन, रूस और भारत समेत 50 से अधिक देशों को शांति बोर्ड में शामिल होने का न्योता भेजा। दावोस में हस्ताक्षर कार्यक्रम में सिर्फ 24 देशों ने ही हिस्सा लिया। हालांकि इसमें शामिल कोसोवो को दुनिया देश भी नहीं मानती है।
शांति बोर्ड से अमेरिका के अधिकांश पश्चिमी सहयोगियों ने दूरी बना ली। हालांकि बदले में रूस के करीबी और यूरोप के इकलौते तानाशाह बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको का साथ जरूर मिला। बेलारूस के शामिल होने के विरोध में यूक्रेन ने भी शांति बोर्ड से दूरी बना ली।
अमेरिका ने कार्यक्रम से पहले दावा किया कि 35 देशों ने हामी भरी है। मगर अब अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने कहा कि 25 से अधिक देशों ने साइन किया है। स्वतंत्र रूप से दावे की जांच में पता चला है कि 24 देशों ने शांति बोर्ड की सदस्यता हासिल की है। इनमें अधिकांश देश दक्षिण अमेरिका, मध्य पूर्व और एशिया से हैं।
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किसने न्योता स्वीकारा: संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, मिस्र, कतर, बहरीन, पाकिस्तान, तुर्की, हंगरी, मोरक्को, कोसोवो, अल्बानिया, बुल्गारिया, अर्जेंटीना, पैराग्वे, कजाकिस्तान, मंगोलिया, उज्बेकिस्तान, इंडोनेशिया, वियतनाम, इजरायल, आर्मेनिया, अजरबैजान, बेल्जियम और बेलारूस। यूरोप से शांति बोर्ड में शामिल होने वाले में हंगरी इकलौता देश है।
शांति बोर्ड से कौन दूर: इजरायल ने शांति बोर्ड पर साइन तो कर दिया है, लेकिन दावोस कार्यक्रम में वहां का कोई नेता नहीं पहुंचा। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी शामिल होने से मना कर दिया। फ्रांस, नॉर्वे,डेनमार्क, ब्रिटेन, स्लोवेनिया, स्वीडन और इटली ने साइन नहीं किया है। चीन ने भी ज्वाइन नहीं किया है। भारत बोर्ड में शामिल होगा या नहीं, अभी तक कुछ भी स्पष्ट नहीं है।
इन देशों ने जवाब ही नहीं दिया: ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, ब्राजील, चीन, क्रोएशिया, साइप्रस, फिनलैंड, जर्मनी, ग्रीस, भारत, आयरलैंड,जापान, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, ओमान, पोलैंड, पुर्तगाल, दक्षिण कोरिया, रोमानिया, रूस, सिंगापुर, स्पेन, स्विट्जरलैंड और थाईलैंड।
किस संगठन से शांति बोर्ड में कौन-कौन: जी 7 देशों से अमेरिका इकलौता है। जी 20 से अमेरिका समेत पांच (अर्जेंटीना, इंडोनेशिया, सऊदी अरब, तुर्की और अमेरिका) और ब्रिक्स से सिर्फ तीन देश मिस्र, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने शांति बोर्ड को ज्वाइन किया।
