अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) ने अपनी 2026 की वार्षिक रिपोर्ट में भारत को उन देशों की सूची में रखा है, जहां 'विशेष चिंता' की जरूरत है। USCIRF ने अमेरिकी सरकार से सिफारिश की है कि भारत को 'कंट्री ऑफ पर्टिकुलर कंसर्न' की लिस्ट में रखा जाए। आसान भाषा में इसे 'विशेष चिंता वाला देश' कह सकते हैं।
 

USCIRF ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (R&W) पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है। अमेरिकी संस्था का दावा है कि भारत में धार्मिक आजादी खतरे में है, अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। आयोग का कहना है कि रॉ और RSS धार्मिक स्वतंत्रता के मामलों में भेदभावपूर्ण नीति अपनाते हैं। 

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USCIRF का नया दावा क्या है?

USCIRF की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति 2025 में और बिगड़ी है, जिसमें धार्मिक अल्पसंख्यकों और उनके पूजा स्थलों को निशाना बनाया गया। रिपोर्ट में अमेरिकी सरकार से अपील की गई है कि वह भारत को हथियार न बेचे और ऐसी बिक्री को रोकने के लिए आर्म्स एक्सपोर्ट कंट्रोल एक्ट की धारा 6 लागू कर दे। सुरक्षा सहायता और द्विपक्षीय व्यापार नीतियों को धार्मिक स्वतंत्रता में सुधार से जोड़े। 

USCIRF ने अमेरिकी संसद से 'ट्रांजिशनल रिप्रेशन रिपोर्टिंग एक्ट 2024' को फिर से पारित करने की मांग की थी। यह मांग की जा रही है कि अमेरिका में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ भारतीय सरकार की ओर से किए जा रहे दमन की सालाना रिपोर्ट भी दी जाए। 

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भारत सरकार ने क्या कहा है?

 भारत सरकार ने इस रिपोर्ट पर अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। बीते कुछ साल में USCIRF की रिपोर्टों को पूर्वाग्रह और राजनीति से प्रेरित बताया है। भारत ऐसे आरोपों को एक सिरे से खारिज करता रहा है। 

USCIRF क्या चाहता है?

  • भारत को विशेष चिंता वाला देश माना जाए
  • RSS और R&W पर रोक लगे, संपत्ति जब्त हो
  • अमेरिका में संस्था से जुड़े लोगों पर प्रतिबंध लगे 
  • हथियार बिक्री रोकने के लिए आर्म्स एक्सपोर्ट कंट्रोल एक्टर की धारा 6 लागू हो 
  • सुरक्षा सहायता और व्यापार नीतियों को धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़ा जाए  
  • भारत में USCIRF और राज्य विभाग को जांच करने की इजाजत मिले

किस आधार पर USCRIF कह रहा है ऐसा?

USCIRF का इशारा वक्फ कानूनों की तरफ है। आयोग का कहना है कि साल  2025 में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति और खराब हुई, सरकार ने अल्पसंख्यक समुदायों और उनके पूजा स्थलों को निशाना बनाने वाली नई विधेयकों को लागू किया।  

अमेरिका का कहना है कि धर्म परिवर्तन से जुड़े कानूनों को देश के कई राज्यों ने सख्त किया है, कड़ी जेल योजनाओं का खाका तैयार किया है। भारतीय अधिकारियों ने नागरिकों और धार्मिक शरणार्थियों को डिपोर्ट करने की आसान योजनाएं बनाई हैं। भारत ने अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों पर सही समय पर कार्रवाई नहीं की है। 

USCIRF का कहना है कि महाराष्ट्र, ओडिशा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में सांप्रदायिक झड़पें हुईं, जिनमें RSS से जुड़े विश्व हिंदू परिषद जैसे समूहों को हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया गया। वक्फ (संशोधन) अधिनियम और उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण अधिनियम जैसी विधेयकों की आलोचना की गई है।  

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USCIRF पर लगते हैं दुष्प्रचार के आरोप

अमेरिका की यह संस्था, भारत के खिलाफ नफरती सोच से भरी है। ऐसे आरोप इस संस्था पर कई बार लगे हैं। साल 2025 में विदेश मंत्रालय ने USCIRF की रिपोर्ट को पूर्वाग्रही और राजनीतिक रूप से प्रेरित करार दिया था। मंत्रालय ने कहा था कि USCIRF अलग-थलग घटनाओं को गलत तरीके से पेश कर भारत की जीवंत विविधतापूर्ण संस्कृति का अपमान करती है। यह अमेरिका का सुनियोजित एजेंडा है। भारत सरकार ने कहा था कि भारत में डेढ़ अरब लोग रहते हैं, यहां हर धर्म के अनुयायी हैं। भारत सह अस्तित्व में भरोसा करता है। भारत ने कई बार USCIRF को वीजा देने से इनकार किया है। यह संस्था भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करती है।

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USCIRF है क्या?

यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (USCIRF) की स्थापना साल 1998 में हुई थी। साल 1998 में ही अमेरिकी संसद ने इसे एक अधिनियम बनाकर स्थापित किया था। यह विदेश में धार्मिक स्वतंत्रता की जांच करने का दावा करती है। अमेरिकी राष्ट्रपति, विदेश मंत्री और संसद को यह सिफारिशें भेजती है। इस आयोग में 9 कमिश्नर होते हैं, जिनकी नियुक्ति राष्ट्रपति और अमेरिकी संसद के सीनियर नेता करते हैं।