अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि वह नाटो (NATO) से अमेरिका को बाहर निकालने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। उन्होंने इस ट्रांसअटलांटिक गठबंधन को 'कागजी बाघ' (paper tiger) बताया है।
ट्रंप ने ब्रिटेन के अखबार द टेलीग्राफ को दिए एक इंटरव्यू में यह बात कही। उन्होंने कहा, 'NATO से बाहर निकलने की बात पर दोबारा विचार नहीं किया जा सकता। मेरे ऊपर NATO का कभी असर नहीं हुआ। मैं हमेशा जानता था कि यह सिर्फ एक कागजी बाघ है। और पुतिन भी यह जानते हैं।'
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यूरोप ने किया था इनकार
ट्रंप के ये बयान NATO के साथ अमेरिका के लंबे समय से चले आ रहे सुरक्षा संबंधों की समीक्षा का सबसे मजबूत संकेत माने जा रहे हैं।
ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब NATO के सहयोगी देशों ने ईरान के साथ चल रहे संघर्ष में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को सुरक्षित करने के लिए अमेरिका के आह्वान पर सैनिक भेजने से इनकार कर दिया। दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। इसके बाधित होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।
कहा- सहयोग की कमी
ट्रंप ने सहयोगी देशों की आलोचना करते हुए कहा कि उनमें एक-दूसरे के प्रति सहयोग के भाव की कमी है। उन्होंने कहा, 'हम यूक्रेन सहित हर जगह अपने आप गए लेकिन वह हमारे लिए नहीं आए।'
ट्रंप ने ब्रिटेन की सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की आलोचना की क्योंकि ब्रिटेन ने अमेरिका-इजराइल के सैन्य अभियान में शामिल होने से इनकार कर दिया।
ट्रंप ने कहा, 'तुम्हारे पास नेवी भी नहीं है। तुम बहुत बूढ़े हो और तुम्हारे एयरक्राफ्ट कैरियर काम नहीं करते थे।' हालांकि उन्होंने लंदन को रक्षा खर्च पर कोई सीधा सलाह देने से इनकार कर दिया।
फिर से विचार करने की चेतावनी
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी इस आलोचना की। उन्होंने NATO को 'एकतरफा सड़क' बताया और चेतावनी दी कि संघर्ष के बाद वॉशिंगटन अपनी भूमिका की फिर से जांच कर सकता है। रुबियो ने संकट के दौरान सहयोगी देशों के सैन्य ठिकानों का ऐक्सेस बहुत सीमित होने पर चिंता जताई।
क्या है प्रावधान?
इस बहस ने NATO के आर्टिकल 5 (सामूहिक रक्षा प्रावधान) पर भी सवाल उठा दिए हैं। यह प्रावधान अब तक सिर्फ एक बार, 11 सितंबर 2001 के हमलों के बाद लागू किया गया था। अधिकारी बताते हैं कि यह प्रावधान सिर्फ तब लागू होता है जब किसी सदस्य देश पर हमला होता है, न कि आक्रामक कार्रवाइयों जैसे वर्तमान ईरान संघर्ष में, जो अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हमलों से शुरू हुआ था।
खबरें आ रही हैं कि अमेरिकी प्रशासन NATO में संरचनात्मक बदलावों पर विचार कर रहा है। इनमें 'पे-टू-प्ले' मॉडल शामिल है, जिसमें रक्षा खर्च से जुड़ी शर्तें होंगी। साथ ही जर्मनी से अमेरिकी सैनिकों की संख्या घटाने की भी संभावना है।
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ट्रंप के इन बयानों से यूरोपीय देशों और अमेरिका के बीच बढ़ते मतभेद साफ नजर आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका NATO से बाहर निकलता है तो वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था पर इसका गहरा असर पड़ सकता है।
