अमेरिका के न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी अपनी एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवादों में घिर गए हैं। 'वर्ल्ड हिजाब डे' पर उन्होंने एक पोस्ट लिखी थी, जिसको लेकर अब विवाद हो गया है। दरअसल, जोहरान के ऑफिस ऑफ इमिग्रेंट अफेयर्स ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में हिजाब को मुस्लिम महिलाओं की आस्था, पहचान और गर्व का प्रतीक बताया था। उनके इसी पोस्ट को लेकर बवाल मचा है।

 

हालांकि, इस पोस्ट को ईरान में अनिवार्य रूप से लागू हिजाब कानूनों के खिलाफ चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के संदर्भ में असंवेदनशील बताया जा रहा है। सोशल मीडिया पोस्ट शेयर कहा गया, 'आज, हम दुनिया भर में मुस्लिम महिलाओं और लड़कियों के विश्वास, पहचान और गर्व का जश्न मनाते हैं, जो हिजाब पहनना चुनती हैं, जो भक्ति और मुस्लिम विरासत के जश्न का एक शक्तिशाली प्रतीक है।'

 

 

 

 

यह भी पढ़ें: पहले EU, अब खाड़ी के देश, भारत की नई ट्रेड डील क्या है, असर क्या होगा?

सोशल मीडिया यूजर्स की तीखी प्रतिक्रिया

उनके इसी बयान पर सोशल मीडिया यूजर्स ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कहा गया है कि जोहरान की पोस्ट में ईरान में महिलाओं की असलियत को नजरअंदाज किया गया है, जबकि ईरान में हिजाब पहनने से मना करने पर महिलाओं को गिरफ्तार किया गया, उन्हें पीटा गया और कईयों की मौतें हुईं।

पत्रकार मसीह अलीनेजाद का विरोध

ईरानी-अमेरिकन पत्रकार मसीह अलीनेजाद ने जोहरान ममदानी को सीधे संबोधित करते हुए कहा, 'सच कहूं तो, मुझे अपने ही खूबसूरत शहर न्यूयॉर्क में टॉर्चर महसूस हो रहा है, जब आप वर्ल्ड हिजाब डे मना रहे हैं, जबकि मेरे घायल देश, ईरान में औरतों को हिजाब और उसके पीछे की इस्लामिक सोच को मना करने पर जेल में डाला जा रहा है, गोली मारी जा रही है और मार दिया जा रहा है।'

 

 

 

 

यह भी पढ़ें: वॉशिंगटन पोस्ट में छंटनी, शशि थरूर के बेटे ईशान की गई नौकरी, विदेशी ब्यूरो बंद

जोहरान के बयान पर उठाया सवाल

मसीह अलीनेजाद ने आरोप लगाया कि इस तरह की पोस्ट उत्पीड़न करने वालों के साथ खड़े होने जैसा है और ईरान में महिलाओं के दमन पर जोहरान ममदानी की चुप्पी शर्मनाक है। वहीं, फ्रांस के लेखक और दार्शनिक बर्नार्ड-हेनरी लेवी ने भी ममदानी के ऑफिस ऑफ इमिग्रेंट अफेयर्स हैंडल से हुए पोस्ट की आलोचना करते हुए इसके समय और संदेश पर सवाल उठाया है।

 

तुर्की-अमेरिकी अर्थशास्त्री तैमूर कुरान ने कहा कि हिजाब इस्लाम के भीतर भी एक विवादास्पद प्रतीक है और कई देशों में इसे गर्व नहीं बल्कि उत्पीड़न के रूप में देखा जाता है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि किसी एक धार्मिक पोशाक का सरकारी स्तर पर महिमामंडन धार्मिक पक्षपात को बढ़ावा दे सकता है।