नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के जर्नल ने हाल ही में एक स्टडी प्रकाशित की है। इस स्टडी में बताया गया कि जो महिलाएं अक्सर केमिकल वाले स्ट्रेटनर का इस्तेमाल करती हैं उनमें गर्भाशय का कैंसर होने का खतरा उन लोगों के मुकाबले बढ़ जाता है जो इस्तेमाल नहीं करती हैं। केमिकल स्ट्रेटनर इस्तेमाल करने वाली महिलाओं में कैंसर का खतरा 80% तक बढ़ जाता है।

 

खासतौर से वे लोग जो इस प्रोडक्ट का बार-बार इस्तेमाल करते हैं। World Psychiatry जर्नल में पब्लिश रिपोर्ट के मुताबिक जो लोग बार-बार स्ट्रेटनर का इस्तेमाल करते हैं उनके जीवन में 4.05% का खतरा बढ़ जाता है। 

 

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केमिकल स्ट्रेटनर से बढ़ता है कैंसर का खतरा

National Institutes of Health के मुताबिक जो लोग स्ट्रेटनर का इस्तेमाल नहीं करते हैं उन्हें केवल 1.64% जोखिम का सामना करना पड़ता है। भले ही यह संख्या देखने में छोटी लग रही हो लेकिन इसका स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ता है।  यह उस स्थिति में विशेष रूप से सच है जहां भारत में मोटापा, मधुमेह और देर से बच्चे पैदा करने जैसे अन्य स्वास्थ्य जोखिम बढ़ रहे हैं।

 

डॉक्टर कस्तुरबा बरुआ ऑन्कोलॉजिस्ट (कैंसर विशेषज्ञ) ने बताया, 'हम अक्सर मरीज से उसकी डाइट, एक्सरसाइज और रेगुलर हेल्थ चेकअप के बारे में पूछते हैं लेकिन हम कभी उनके हेयर प्रोडक्ट्स के बारे में नहीं पूछते हैं। स्टडी में केमिकल हेयर स्ट्रेटनर और गर्भाशय कैंसर के बीच में संबंध पाया गया है।'

क्यों खतरनाक है हेयर केमिकल ट्रीटमेंट

डॉक्टर बरुआ ने कहा कई हेयर स्ट्रेटनर में फॉर्मल्डिहाइड और अन्य जहरीले पदार्थ होते हैं। ये केमिकल आपके हार्मोन के बैलेंस को बिगाड़ता है। इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) ने फॉर्मेल्डिहाइड को कैंसर पैदा करने वाला एजेंट बताया है।  US FDA ने भी हेयर ट्रीटमेंट से जुड़े खतरों के बारे में जानकारी दी है। दुनिया में केराटिन और केमिकल स्ट्रेटनिंग जैसे ट्रीटमेंट्स की मांग बढ़ी है। बहुत से लोग इन ट्रीटमेंट्स का यूज कर रहे हैं इसलिए जागरूक होना जरूरी है।

 

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कैसे कैंसर के खतरे को कम करें

  • केमिकल वाले प्रोडक्ट्स का कम से कम इस्तेमाल करें।
  • प्रोडक्ट्स को चुनते समय जरूरी बातों का ध्यान रखें।
  • रेगुलर चेकअप करवाएं।
  • वजन को नियंत्रण में रखें।