अनप्लान्ड प्रेग्नेंसी यानी ऐसी गर्भावस्था जिसकी योजना पहले से नहीं बनाई गई हो। यह स्थिति किसी भी महिला या कपल के लिए भावनात्मक, मानसिक और शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकती है। कई बार डर, शर्म या समाज के दबाव में लोग बिना सही सलाह के फैसले ले लेते हैं, जो आगे चलकर स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं। ऐसे समय में सबसे जरूरी है घबराने के बजाय सही जानकारी लेना और विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह करना।

 

दिल्ली के इंदिरापुरम क्लाउडनाइन ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स की स्त्री रोग विशेषज्ञ और वरिष्ठ सलाहकार डॉक्टर भव्य राठौर से हमने इस बारे में बात की।

 

यह भी पढ़ें: फेफड़ों में खून का जमना कैसे हो सकता है जानलेवा?

अनप्लान्ड प्रेग्नेंसी होने पर सबसे पहला स्टेप क्या लेना चाहिए?

  • यदि पीरियड मिस हो जाएं और प्रेग्नेंसी की संभावना लगे, तो सबसे पहले घर पर प्रेग्नेंसी टेस्ट करें। अगर टेस्ट पॉजिटिव आता है, तो बिना देरी किए स्त्री रोग विशेषज्ञ (गायनेकोलॉजिस्ट) से मिलें। डॉक्टर अल्ट्रासाउंड और जरूरी जांचों के जरिए गर्भ की स्थिति और अवधि की पुष्टि करते हैं।
  • इस दौरान खुद को दोष देने या घबराने की बजाय शांत रहना जरूरी है। महिला को अपनी मानसिक और शारीरिक स्थिति, आर्थिक परिस्थितियों और भविष्य की योजनाओं को ध्यान में रखते हुए फैसला लेना चाहिए। पार्टनर और परिवार का सहयोग भी इस समय बहुत मायने रखता है।
  • कई लोग खुद से दवाएं लेते हैं। यह कितना खतरनाक हो सकता है?
  • आजकल इंटरनेट या दोस्तों की सलाह पर बिना डॉक्टर से पूछे मेडिकल अबॉर्शन पिल्स लेना आम हो गया है, लेकिन यह बेहद जोखिम भरा हो सकता है। हर महिला की बॉडी अलग होती है और हर प्रेग्नेंसी एक जैसी नहीं होती।

बिना जांच के दवा लेने से कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं, जैसे:

  • अत्यधिक ब्लीडिंग
  • अधूरा अबॉर्शन
  • गर्भाशय में इंफेक्शन
  • तेज दर्द और कमजोरी
  • एक्टोपिक प्रेग्नेंसी (जब गर्भ गर्भाशय के बाहर ठहरता है), जो जानलेवा हो सकती है।

कई बार महिलाएं सोचती हैं कि केवल पिल्स लेने से समस्या खत्म हो जाएगी लेकिन गलत तरीके से दवा लेने पर इमरजेंसी सर्जरी तक की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए किसी भी प्रकार की अबॉर्शन दवा केवल डॉक्टर की सलाह और निगरानी में ही लेनी चाहिए।

 

यह भी पढ़ें: ज्वाला गुट्टा ने एक साल में दान किया 60 लीटर ब्रेस्ट मिल्क, जानिए कारण

अबॉर्शन करवाने का क्या नुकसान हो सकता है?

यदि अबॉर्शन सुरक्षित तरीके और प्रशिक्षित डॉक्टर द्वारा किया जाए तो ज्यादातर मामलों में यह सुरक्षित माना जाता है। लेकिन असुरक्षित या गैरकानूनी तरीके से करवाया गया अबॉर्शन गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।

 

संभावित जोखिमों में शामिल हैं:

  • ज्यादा ब्लीडिंग
  • संक्रमण
  • गर्भाशय को चोट पहुंचना
  • हार्मोनल बदलाव
  • मानसिक तनाव, अपराधबोध या एंग्जायटी

कुछ महिलाओं को अबॉर्शन के बाद भावनात्मक रूप से काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इसलिए इस दौरान भावनात्मक सपोर्ट और सही काउंसलिंग भी जरूरी होती है।

क्या अबॉर्शन के बाद भविष्य में मां बनना मुश्किल होता है?

यह एक बहुत आम डर है, लेकिन हर अबॉर्शन के बाद फर्टिलिटी पर असर पड़े, ऐसा जरूरी नहीं है। यदि अबॉर्शन सुरक्षित तरीके से और सही समय पर किया गया हो, तो ज्यादातर महिलाएं भविष्य में सामान्य रूप से प्रेग्नेंट हो सकती हैं।

 

हालांकि, बार-बार अबॉर्शन करवाना या असुरक्षित तरीके अपनाना भविष्य की प्रेग्नेंसी पर असर डाल सकता है। बार-बार संक्रमण, गर्भाशय को नुकसान या गंभीर जटिलताओं के कारण फर्टिलिटी प्रभावित हो सकती है। इसलिए अबॉर्शन को गर्भनिरोधक विकल्प की तरह इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

बार-बार इमरजेंसी पिल्स लेने से क्या नुकसान हो सकता है?

कई लोग अनप्रोटेक्टेड सेक्स के बाद बार-बार इमरजेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स का इस्तेमाल करते हैं। ये पिल्स केवल इमरजेंसी स्थिति के लिए होती हैं, नियमित गर्भनिरोधक के रूप में नहीं।

  • पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं
  • हार्मोनल असंतुलन हो सकता है
  • मतली, सिरदर्द और थकान हो सकती है
  • अगली ओव्यूलेशन साइकल प्रभावित हो सकती है
  • मानसिक तनाव और चिंता बढ़ सकती है

हालांकि, इमरजेंसी पिल्स से स्थायी बांझपन नहीं होता, लेकिन बार-बार इस्तेमाल शरीर के प्राकृतिक हार्मोनल संतुलन को प्रभावित कर सकता है। इसलिए सुरक्षित और नियमित गर्भनिरोधक उपाय अपनाना ज्यादा बेहतर और सुरक्षित होता है।

 

यह भी पढ़ें: ज्वाला गुट्टा ने एक साल में दान किया 60 लीटर ब्रेस्ट मिल्क, जानिए कारण

लीगली कितने हफ्तों तक अबॉर्शन कराया जा सकता है?

भारत में मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) कानून के तहत कुछ परिस्थितियों में गर्भपात की अनुमति है।

सामान्य परिस्थितियों में 20 हफ्तों तक अबॉर्शन कराया जा सकता है।
कुछ विशेष परिस्थितियों, जैसे रेप, नाबालिग गर्भावस्था, भ्रूण में गंभीर असामान्यता या महिला के स्वास्थ्य को खतरा होने पर 24 हफ्तों तक अनुमति मिल सकती है।

इसके लिए योग्य डॉक्टर की सलाह और मेडिकल जांच जरूरी होती है। जितनी जल्दी डॉक्टर से संपर्क किया जाए, प्रक्रिया उतनी ही सुरक्षित और आसान होती है।

निष्कर्ष

अनप्लान्ड प्रेग्नेंसी जीवन का कठिन मोड़ हो सकता है, लेकिन डर या शर्म के कारण गलत फैसले लेना स्थिति को और जटिल बना सकता है। खुद से दवाएं लेने, इंटरनेट पर भरोसा करने या गैर-प्रशिक्षित लोगों से इलाज करवाने की बजाय विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेना सबसे सुरक्षित रास्ता है। साथ ही, भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए सही और नियमित गर्भनिरोधक उपायों के बारे में जागरूक होना भी बेहद जरूरी है।