अक्सर खाने-पीने की चिजों में मिलावटखोरी का मुद्दा सुर्खियां बटोरता है। त्यौहारी सीजन में मिलावटखोरी की खबरें बड़े पैमाने पर आती हैं, जबकि आम दिनों में भी मिलावटखोरी- दूध-दूध से बने प्रोडक्ट, रिफाइंड तेल, सरसों तेल, साग-सब्जियों, मसाले आदि में होती है, मगर इसकी खबरें कम आती हैं। आम जनता इसी मिलावटी खाने को रोजाना खा रही है। खाने में मिलावट करके ज्यादा से ज्यादा कमाई करना जैसे बाजार का मुख्य ध्येय बन गया है। मगर, इस बीच मिलावटखोरी को मुद्दा बनाकर आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने संसद में आवाज बुलंद की है। मिलावटखोरी वह मुद्दा है, जिसपर कोई बात तो नहीं करता लेकिन यह रोजाना बच्चों, नौजवानों, महिलाओं और बुढ़ों की सेहत बिगाड़ रहा है।
मिलावटखोरी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए राघव चड्ढा ने संसद में चेतावनी दी कि बाजार में शुद्धता के लेबल लगाकर खुलेआम जहर बेचा जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह केवल भ्रष्टाचार नहीं बल्कि लोगों के स्वास्थ्य के साथ आपराधिक खिलवाड़ हो रहा है।
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जानलेवा इंजेक्शन का इस्तेमाल
उन्होंने संसद में कहा, 'यूरिया की मिलावट और सब्जियों को बड़ा करने के लिए 'ऑक्सीटोसीन' के जानलेवा इंजेक्शन का इस्तेमाल हो रहा है। गरम मसालों में ईंट का चूरा-लकड़ी का बुरादा, जो मसाले कैंसरकारी होने के चलते अमेरिका-यूरोप में बैन हैं वो भारत में बेचे जा रहे हैं, देसी घी की मिठाइयों में धड़ल्ले से वनस्पति-डालडा तेल मिलाया जा रहा है।' सांसद ने केंद्र सरकार से मांग की है कि ऐसे मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त कानून बनाकर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही कहा कि ऐसे लोगों के खिलाफ जुर्माने की राशि को बढाया जाए।
मुर्गी के मांस में स्टेरॉयड
राघव चड्ढा इससे पहले गिग वर्कर्स के लिए 10 मिनट में डिलीवरी करने वालों के ऊपर पड़ने वाले जोखिमों का मुद्दा उठा चुके हैं। राघव ने संसद में अपने भाषण का वीडियो अपने एक्स हैंडल पर शेयर करके लिखा कि भारत में सबसे बड़ा स्वास्थ्य संकट खाने में मिलावट है। उन्होंने बताया कि शहद में पीला रंग, मुर्गी के मांस में स्टेरॉयड और आइसक्रीम में डिटर्जेंट मिलाया जा रहा है। हम सब धीमा जहर पी रहे हैं! मैंने आज संसद में यह गंभीर मुद्दा उठाया। मेरा भाषण देखिए।
राघव चड्ढा ने कहा, 'आज मैं एक ऐसे विषय पर बात करना चाहता हूं जो लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। खाने में मिलावट का मुद्दा, जो खाने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। बाजार में शुद्धता का लेबल लगाकर फर्जी उत्पाद बेचे जा रहे हैं। दूध, मसाले, खाद्य तेल, पैकेज्ड फूड और पेय पदार्थों में असुरक्षित चीजें, हानिकारक केमिकल्स, हाई सैचुरेटेड फैट, शुगर या नमक मिले होते हैं। साथ ही भ्रामक न्यूट्रिशनल क्लेम्स चलाए जा रहे हैं, जो कहते हैं कि ये स्वास्थ्य के लिए अच्छे हैं, एनर्जी बूस्टिंग हैं। इन्हें बेचा जा रहा है।'
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राघव चड्ढा ने दिए सुझाव
राघव चड्ढा ने सरकार को सुझाव देते हुए कहा, 'मैं इस संबंध में कुछ सुझाव लाया हूं। पहला सुझाव FSSAI हमारे रेगुलेटर को मजबूत करें, पर्याप्त कर्मचारी दें, लैब टेस्टिंग को बढ़ावा दें। दूसरा, जुर्माना या पेनल्टी को वित्तीय रूप से प्रबंधनीय बनाना चाहिए, इसे बढ़ाने की जरूरत है। तीसरा, एक पब्लिक रिकॉल मैकेनिज्म होना चाहिए, अगर कोई उत्पाद मिलावटी है तो उसे पब्लिकली नाम लेकर शर्मिंदा करें, बाजार से हटाएं और भ्रामक स्वास्थ्य क्लेम्स की एडवरटाइजिंग रोकें।'
