दुनियाभर की दिग्गज कंपनियां इन दिनों आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अपनाने की होड़ में लगी हैं। कंपनियां इसके इस्तेमाल से अपना खर्च कम करना चाहती है और मुनाफा भी बढ़ाना चाहती है लेकिन नेशनल ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक रिसर्च (NBER) की एक नई रिपोर्ट ने इन दावों पर पानी फेर दिया है।  NBER की रिसर्च में करीब 6,000 बड़े अधिकारियों पर सर्वे किया गया है जिसमें पता चला है कि पिछले तीन सालों में AI की वजह से कंपनियों की प्रोडक्टिविटी या कर्मचारियों की संख्या में कोई खास बदलाव नहीं आया है।

 

हैरानी की बात यह है कि जहां एक तरफ AI को भविष्य की क्रांति बताया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ 90 फीसदी से ज्यादा कंपनियों का मानना है कि पिछले तीन साल में AI ने उनके काम करने के तरीके या कर्मचारियों की कार्यक्षमता पर कोई असर नहीं डाला है। 

 

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सर्वे में अधिकारियों ने क्या बताया

सर्वे में करीब दो-तिहाई अधिकारी शामिल हुए थे। उन्होंने माना कि वे AI का इस्तेमाल तो करते हैं लेकिन हफ्ते भर में यह इस्तेमाल औसतन सिर्फ डेढ़ घंटे तक ही सीमित है। वहीं, 25 फीसदी लोग ऐसे भी हैं जो दफ्तरों में इसका बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं कर रहे।

भविष्य को लेकर उम्मीद बरकरार

इन नतीजों के बावजूद, कंपनियों का AI पर से भरोसा उठा नहीं है। बिजनेस जगत को उम्मीद है कि अगले तीन सालों में हालात बदलेंगे। कंपनियों ने माना कि आने वाले समय में प्रोडक्टिविटी 1.4% और आउटपुट 0.8% तक बढ़ सकता है। 

 

ऐसा अनुमान है कि 2028 तक AI की वजह से इन चार प्रमुख देशों (US, UK, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया) में करीब 17.5 लाख नौकरियां कम हो सकती हैं। फिलहाल कंपनियां AI का इस्तेमाल सिर्फ टेक्स्ट लिखने, फोटो/वीडियो बनाने और डेटा प्रोसेसिंग जैसे कामों के लिए कर रही हैं।

 

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निवेश डूबने का डर

सिर्फ NBER ही नहीं, पिछले साल की एक MIT रिपोर्ट भी कुछ इसी ओर इशारा करती है। उस रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियों ने Generative AI पर 30 से 40 अरब डॉलर का भारी-भरकम निवेश तो किया है लेकिन 95 फीसदी संगठनों को इससे कोई फायदा नहीं मिला है। सैकड़ों AI प्रोजेक्ट्स की जांच के बाद पता चला कि सिर्फ 5 फीसदी कंपनियां ही ऐसी हैं जो AI से असली मुनाफा कमा पा रही हैं, बाकी सब अभी भी बस प्रयोग ही कर रहे हैं।