देश की दूसरी सबसे बड़ी एयरलाइन एयर इंडिया पर अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध का असर दिखने लगा है। जेट फ्यूल की कीमतों में आए भारी उछाल के कारण एयर इंडिया ने अपनी उड़ानों में कटौती करने का फैसला किया है। जानकारी के मुकाबिक, एयरलाइन मई से जुलाई तक अपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को कम करने जा रही है। उड़ने कम करने के पीछे कई देशों का एयरस्पेस पर पाबंदी होना भी है।

 

पश्चिम एशिया में युद्ध को लेकर कर चल रही टेंशन के बाद कई द्शों ने एयरस्पेस पर पाबंदी लगाई है। इसकी वजह से एयर इंडिया को कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए लंबे रूट लेने पड़ रहे हैं, जिससे फ्यूल की खपत बढ़ गई।

 

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22,000 करोड़ के नुकसान का अनुमान 

द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एयर इंडिया अगले महीने जून में यूरोप, उत्तरी अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर के लिए अपनी उड़ानों की संख्या को कम करेगी। कंपनी के सूत्रों ने बताया है कि 31 मार्च, 2026 को खत्म हुए वित्त वर्ष में एयर इंडिया ग्रुप को 22,000 करोड़ से ज्यादा का नुकसान होने का अंदाजा है।

CEO ने कर्मचारियों को दिया संदेश

इस मामले को लेकर कंपनी के सीइओ कैंपबेल विल्सन ने एयर इंडिया के कर्मचारियों को भेजे एक मेल में कहा है कि एयरलाइन की कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें फायदे का सौदा नहीं रही हैं। यह उड़ाने जारी रखने से कंपनी का नुकसान और बढ़ेगा।

 

विल्सन ने अपने स्टाफ से कहा, 'हमने अप्रैल और मई के लिए कुछ फ्लाइट्स कम कर दी हैं। जेट फ्यूल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी, एयरस्पेस बंद होने और लंबे फ्लाइट रूट होने की वजह से हमारी कई इंटरनेशनल फ्लाइट्स चलाना फायदे का सौदा नहीं रहा।'

 

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घरेलु उड़ानों पर क्या पड़ेगा असर?

उन्होंने आगे कहा कि स्थिति बहुत मुश्किल बनी हुई है, जिससे एयरलाइन को और कड़े कदम उठाने पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा, 'एयरस्पेस और जेट फ्यूल की कीमतों की स्थिति बहुत मुश्किल बनी हुई है, जिससे हमारे पास जून और जुलाई के लिए शेड्यूल और कम करने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है।'

 

विल्सन ने आगे कहा कि हालांकि घरेलू ऑपरेशन पर भी असर पड़ा है, लेकिन इसका असर तुलनात्मक रूप से कम है। उन्होंने कहा, 'घरेलू फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी को सरकार द्वारा 25% तक सीमित करने की वजह से घरेलू फ्लाइट्स के मुनाफे पर भी काफी असर पड़ा है, लेकिन यह कम हद तक हुआ है।'