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पहाड़ों पर मिल रहा पेट्रोल, यूपी में किल्लत, चूक कहां हो रही है?

उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में लोगों को पेट्रोल के लिए लंबा इतंजार करना पड़ रहा है। पेट्रोल पंप पर झगड़ा अब आम बात हो गई है।

Petrol Pump Crisis

प्रयागराज के एक पेट्रोल पंप पर लगी भीड़। Photo Credit: PTI

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उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल के कई जिलों में पेट्रोल और डीजल के लिए लोग तरस रहे हैं। गोंडा, बहराइच, बस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर की बात हो या प्रयागराज और वाराणसी का, हर जगह एक जैसी स्थिति है। सिर्फ सिद्धार्थनगर के दर्जनों पेट्रोल पंप पर ऐसा ही हालत है। सिद्धार्थनगर में 5 तहसील और 13 ब्लॉक हैं। हर जगह, एक जैसी स्थिति है। लोग पेट्रोल या डीजल भराने जा रहे हैं, लंबी कतारें लग रहीं हैं, बेबस होकर लौटना पड़ रहा है। कभी पेट्रोल पंप के कर्मचारी, तेल बांटना बंद कर दे रहे हैं, कभी यह रोना रो रहे हैं कि तेल ही नहीं आया है। नौगढ़, शोहरतगढ़, बांसी, इटवा और डुमरियागंज जैसी तहसीलों में यही आलम है। पूर्वांचल का यह हाल है, वहीं इसके उलट, उत्तराखंड से चारधाम यात्रा कर लौटे लोग अलग कहानी बता रहे हैं।
 

सिद्धार्थनगर में जिला अदालत है। यहां जाने वाले करीब 12 से ज्यादा वकीलों से खबरगावं ने बात की। सबका एक जवाब रहा कि अब हम कोर्ट में समय से पहुंच नहीं पा रहे हैं, वजह यह है कि पेट्रोल के लिए लाइन में लगाकर पेट्रोल डलाएं या कचहरी पहुंचे। लाइन में लगें तो भी यही चिंता लगी रह रही है कि पेट्रोल मिलेगा या नहीं। सनई और पकड़ी के पेट्रोल पंप पर आए दिन मारपीट की वारदात सामने आ रही है। 

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किन जगहों पर ज्यादा हालात खराब हैं?

सिद्धार्थनगर में 13 ब्लॉक हैं। नौगढ़, बढ़नी, शोहरतगढ़, बर्डपुर, जोगिया, उसका बाजार, बांसी, मिठवल, खेसरहा, भनवापुर, इटवा, खुनियांव, डुमरियागंज और लोटन। इन सभी ब्लॉक पर एक जैसा ही हाल है। लोग पेट्रोल के लिए लंबा इंतजार कर रहे हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं है। पेट्रोल के लिए मारामारी मची है। 

आनंद कुमार मिश्रा पेशे से वकील हैं। लोटन ब्लॉक से आते है। उनके इलाके में 2 पेट्रोल पंप, सामने पड़ते हैं। सोहांस और लोटन। दोनों जगहों पर पेट्रोल के लिए किल्लत है, लोगों को तेल नहीं मिल पा रहा है। उन्हें कार छोड़िए, समय से बाइक के लिए तेल नहीं मिल पा रहा है। 

सिद्धार्थनगर में दिनेश नगर पेट्रोल पंप पर उमड़ी भीड़। Photo Credit: Khabargaon

पेट्रोल पंप पर झगड़ रहे लोग

अनंद मिश्र ने कहा, 'पेट्रोल पंप पर पेट्रोल के लिए झगड़ा हो रहा है। लंबी कतारें हैं, पेट्रोल लेने के लिए जैसे गला काट प्रतियोगिता चल रही है। एक पेट्रोल पंप है, सैकड़ों गाड़ियां हैं। जुगाड़ वाले लोगों को गैलन में पेट्रोल मिल रहा है, जिसके पास जुगाड़ नहीं है, उसके हिस्से में इतंजार हो रहा है। ऐसा कई हफ्तों से है। लोग जरा सी बात पर एक-दूसरे को मारने के लिए उतारू हैं।'

जिनके पास साधन है, वे भी खा रहे बसों में धक्के 

उपेंद्र शुक्ल पेशे से शिक्षक हैं। वह शोहरगढ़ ब्लॉक में रहते हैं। यहां से करीब 20 किलोमीटर दूर उनका स्कूल है। वह अपनी बाइक से ही यात्रा करते हैं। बीते कई दिनों से वह ऑटो के धक्के खा रहे हैं क्योंकि बाइक के लिए पेट्रोल की किल्लत से जूझ रहे हैं। 

लाइन देखकर लौट रहे हैं लोग

पेट्रोल पंप का हाल देखकर लाइन में लगने की हिम्मत नहीं कर पा रहे हैं। उनकी भी यही शिकायत है कि शोहरतगढ़ से सनई चौराहे तक, जितने पेट्रोल पंप हैं, वहां जुगाड़ वालों को पेट्रोल नसीब हो रहा है, नहीं तो मारामारी मच रही है। शोहरतगढ़ में बोरा पेट्रोल पंप पर तो पेट्रोल आते ही खत्म होने का दावा किया जा रहा है। 

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शादी-सगाई में पहुंचना भी हुआ है मुहाल

यही हाल चेतिया ब्लॉक का भी है। सूरज कुमार जोगिया ब्लॉक से आते हैं। शादियों का सीजन चल रहा है। वह एक फंक्शन में शामिल होने के लिए जाने वाले थे लेकिन पता चला कि पेट्रोल खत्म हो गया। बाइक लेकर वह जोगिया पेट्रोल पंप पर गए, वहां भी लौटना पड़ा। बांसी भी गए, वहां से भी बिना भराए लौटना पड़ा। या तो घंटो लाइन में लगकर पेट्रोल भराए या घर लौटे, यही दो रास्ते रह गए हैं।

अस्पताल जाना भी हुआ है मुश्किल 

नकाही चौधरी की उम्र 80 साल की है। वह शोहरगढ़ ब्लॉक से आती हैं। बीते कई दिनों से वह बीमार हैं। गोरखपुर दिखाना चाहती हैं। पड़ोसी के पास गाड़ी है। उनके बेटे 2 दिन से 1500 का पेट्रोल डलाना चाह रहे हैं, उन्हें बैरंग लौटना पड़ रहा है। पेट्रोल पंप वाले ने कह दिया है कि 500 से ज्यादा का पेट्रोल नहीं मिलेगा। गोरखपुर आने-जाने में कम से कम 12 से 13 लीटर पेट्रोल की जरूरत पड़ती है। 

ऐसे संदेश तो लगे हैं लेकिन धड़ल्ले से रसूखदारों को गैलन और बोतल में मिल रहा पेट्रोल। Photo Credit: PTI

पड़ोसी जिलों का भी हाल बेहाल है 

संतकबीर नगर से लेकर बस्ती तक का यही हाल है। लोग पेट्रोल और डीजल के लिए बेहाल हैं। पुलिस का रटा-रटाया जवाब होता है कि हम इसमें क्या कर सकते हैं। विधायक और सांसद का फोन संपर्क से बाहर ही रहता है। प्रशासन की आंखों के सामने यह सब हो रहा है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। जो कार्रवाई हो भी रही है वह अपर्याप्त है। न जमाखोरी रुक रही है, न ही पेट्रोल बांटने की सही प्रक्रिया का पालन कराया जा रहा है। अनिवार्य लाइसेंस के बाद भी हालात खराब ही हैं। 

न लंबी लाइनें, न कोई परेशानी, उत्तराखंड में सब ठीक है

उत्तराखंड की दुर्गम पहाड़ियों पर हरिद्वार, ऋषिकेश से लेकर बद्रीनाथ तक, पेट्रोल की न तो किल्लत है, न ही लोग परेशान हैं। लोगों को लंबी लाइनों में नहीं लगना पड़ रहा है। भीषण गर्मी पड़ रही है, पर्वतीय क्षेत्र और चारधाम यात्रा की वजह से यहां देश के कोने-कोने से लोग पहुंच रहे हैं। पहाड़ियों पर मुश्किल से ही तेल के टैंक पहुंचते हैं, इसके बाद भी लोगों को सहजता से पेट्रोल मिल रहा है। ऐसा क्यों है, इसे लेकर जब उत्तराखंड के कुछ पेट्रोल पंप कर्मचारियों से बात की गई तो जवाब मिला।

 

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उत्तराखंड के रुद्र प्रयाग के पास स्थित पेट्रोल पंप। Photo Credit: Khabargaon

कर्मचारियों का कहना है कि यहां किसी को गैलन में पेट्रोल और डीजल नहीं दिया जा रहा है। न जमाखोरी की जा रही है, न होने दी जा रही है। लोगों में ज्यादा से ज्यादा पेट्रोल या डीजल लेने की होड़ नहीं मची है, जगह-जगह पुलिस तैनात है, जो किसी भी तरह की धांधली पर नजर रख रही है। यूपी के सीमांत इलाकों में ऐसी स्थिति नहीं है। महानगरों में जैसा भी हाल हो, पूर्वांचल में बेहतर नियंत्रण की जरूरत है। पेट्रोल पंप पर गैलन और बोतलों में पेट्रोल देना अवैध है, फिर भी पहुंच वाले लोगों को हजारों का पेट्रोल-डीजल मिल रहा है, वहीं जरूरतमंद लोग तरस रहे हैं।

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