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'नसीब हो, सेटिंग या रसूख, पेट्रोल तभी...', पूर्वांचल में परेशान क्यों आम आदमी?

पूर्वांचल के कई जिलों में पेट्रोल के लिए मारामारी मची है। पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग रहीं हैं लेकिन किसी को पेट्रोल नसीब नहीं हो रहा है।

UP Petrol Crisis

सिद्धार्थनगर के दिनेश नगर पेट्रोल पंप पर उमड़ी भीड़। Photo Credit: Khabargaon

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अमेरिका और ईरान के बीच ठनी जंग की वजह से यूपी में तेल की जमाखोरी बढ़ गई है। यह खबर आपको चौंका देगी लेकिन यह सच है। लोग घबराहट में ज्यादा तेल खरीदकर स्टोर कर रहे हैं, पूर्वाचंल के कई जिलों में ऐसा ही हाल है। जमाखोरी इसलिए क्योंकि लोग घंटों पेट्रोल पंप पर कतार में लगकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं, पेट्रोल पंप प्रंबंधन सप्लाई ही रोक दे रहा है। 

जानने वालों को तो पेट्रोल-डीजल गैलन में मिल जा रहा है आम जनता का हाल-बेहाल है। सिर्फ एक जिले की यह बात नहीं है, कई जिलों में ऐसे ही हालात हैं। सिद्धार्थनगर से लेकर संतकबीर नगर तक पूर्वांचल में एक जैसे ही हालात बने हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि जब पुलिस या प्रशासन से इसकी शिकायत की जाए तो एक रटा-रटाया जवाब आता है, क्या करें, लोग वहां तैनात हैं, कैसे करें। 

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पेट्रोल पंप पर आम आदमी किन चीजों से जूझ रहा है, इसे ऐसे समझ सकते हैं-

इंतजार में सैकड़ों गाड़ियां, पेट्रोल के लिए घंटों का इंतजार 

20 अप्रैल की बात है। एक परिवारिक समारोह में हिस्सा लेने आकाश शर्मा घर से निकले। सिद्धार्थनगर के परिगंवा गांव से उन्हें संत कबीर नगर जिले के कटार गांव में जाना था। परिगंवा से कटार की दूरी करीब 120 किलोमीटर है।

परिगंवा के पास में ही शोहरतगढ़ तहसील है। पहला पेट्रोल पंप यहां पड़ता है। जब पेट्रोल भराने गए तो पता चला कि पेट्रोल स्टेशन पर पेट्रोल ही नहीं है। थोड़ी दूर आगे बढ़ने पर दिनेश नगर में एक पेट्रोल पंप है। पेट्रोल भराने के लिए सैकड़ों गाड़ियां दोपहर 1.50 पर लगीं थीं।

खास लोगों को मिल रहा पेट्रोल-डीजल, दूसरे तरस रहे 

आकाश ने सोचा कि पेट्रोल भरा लेते हैं। पेट्रोल भराने गए तो पता चला कि लोग यहां घंटों से खड़े हैं लेकिन पेट्रोल नहीं मिल रहा है। कुछ लोगों को पेट्रोल मिल रहा है। बीच-बीच में कुछ खाली गैलन दिखते हैं, जिनमें लोग पेट्रोल भरते हैं और निकल जाते हैं।

जिनकी गाड़ियों में पेट्रोल भरा जाता है वे या तो दंबंग किस्म के लोग होते हैं या पेट्रोल पंप के जानने वाले। 2 घंटे जूझने के बाद यह कहा गया कि पेट्रोल अब नहीं मिलेगा। शाम में आइए। 

सिद्धार्थनगर के ज्यादातर पेट्रोल पंप पर यही हाल रहा। सनई चौराहे पर भी एक पेट्रोल पंप है। उसे बंद कर दिया गया था। पूछने पर पता चला कि पेट्रोल ही नहीं है।

सनई से करीब 18 किलोमीटर दूर है। इस रूट पर भी जितने पेट्रोल पंप मिले या तो वहां बहुत ज्यादा भीड़ थी, घंटों से लोग परेशान थे, या बंद थे। यही हाल, संतकबीर नगर पहुंचने तक रहा। कटार में भी लोग यही कहते मिले कि पेट्रोल मिल नहीं रहा है, घर कैसे पहुंचे। ऐसा आलम तो कभी हमने नहीं देखा। 

दिनेश नगर, चिल्हिया पेट्रोल पंप पर लगी लंबी कतारें। 

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धड़लल्ले से हो रही है जमाखोरी 

पहले लगा कि यह एक दिन की बात होगी। अगले दिन 21 अप्रैल को सिद्धार्थ नगर से उसका बाजार के लिए निकले। शाम के 7 बज चुके थे। शोहरगढ़ पेट्रोल पंप बंद पड़ा मिला। दिनेश नगर पेट्रोल पंप पर तेल था। करीब 2 घंटे तक खड़े रहे। आसपास गाड़ियों का अंबार। सैकड़ों मोटरसाइकिल पर खड़े लोग मिले। लोग तेल-तेल चिल्लाते रहे, तेल नहीं मिला। मिला भी तो सिर्फ उन लोगों को, जिन्हें पेट्रोल पंप प्रबंधन के लोग जान रहे थे।

कुछ लोगों के हाथ में गैलन थे। उनमें डीजल और पेट्रोल भरा गया। जब वहां के लोगों ने विरोध किया तो लाइट ऑफ कर दी। अंधेरा कर दिया। लोग चीखते चिल्लाते रहे, कई लोगों ने कहा कि उन्हें इमरजेंसी है, जाना जरूरी है। बीमार और बूढ़े लोग भी थे, उन्हें भी सिर्फ इंतजार मिला, जानकारों को पेट्रोल। बीच-बीच में कभी लाइटें ऑन कर दी जाती थीं, कभी बंद। झगड़ा भी हुआ, लोग बेहाल थे। अराजक स्थिति थी, दिलचस्प बात यह है कि 2 पुलिसकर्मी भी थे, लेकिन मूक दर्शक की तरह। चीखते रहे, किसी ने उनकी सुनी नहीं। 

ठीक इसी वक्त, लौटू यादव पकड़ी पेट्रोल पंप पर गए थे। लोगों ने गांव में शोर किया कि पकड़ी में पेट्रोल मिल रहा है। अपनी कार लेकर वह परिगंवा से निकले। पेट्रोल पंप पर गए और सैकड़ों गाड़ियां खड़ीं मिलीं। अंदर ही नहीं घुस पाए, 2 घंटे तक इंतजार किया। तब तक सामने मार भी हो गई। दो गुट झगड़ पड़े। लोगों जैसे तैसे मामला शांत हुआ। यहां कोई पुलिसकर्मी भी नहीं था। 

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पुलिस क्या कर रही है?

पुलिस की आंखों के सामने लोग गैलन में तेल भरकर ले जा रहे हैं। पुलिस देख रही है, पुलिस उन्हें रोक नहीं रही है। पेट्रोल पंप के सामने लिखा होता है कि गैलन में तेल नहीं देंगे। यह सब, वहीं हो रहा था। ऐसा भी नहीं है कि जरूरतमंद ले जा रहे थे। जरूरत आदमी को 4 से 5 लीटर की हो सकती है, 10 लीटर की हो सकती है, 50 से 60 लीटर तेल की जरूरत, जमाखोरी हो सकती है, जरूरत नहीं।

दिनेशनगर पेट्रोल पंप से थोड़ी ही दूर पर पुलिस स्टेशन है। पुलिस स्टेशन पर खबरगांव ने फोन किया। फोन करने वाले अधिकारी ने फोन उठाया। अधिकारी ने कहा, 'बताइए क्या अब पेट्रोल बंटवाएं...पुलिस बोल रही है।'

  • सवाल: पेट्रोल की जमाखोरी अब अपराध नहीं है क्या?
  • जवाब: कहना क्या चाहते हैं, पहले स्पष्ट करें, मैं समझा नहीं?
  • सवाल: दिनेश नगर पेट्रोल पंप पर रसूखदार लोग गैलन में भर-भरकर तेल ले जा रहे हैं, जरूरत आदमी को पेट्रोल ही नहीं दिया जा रहा है, अराजक स्थिति है, आप लोग कुछ करते क्यों नहीं?
  • जवाब: हम बताइए क्या करें, पेट्रोल बंटवाएं। एक जवान वहां तैनात है। कुछ और को भेजते हैं, अभी हम हम भी थोड़ी देर में पहुंचेंगे।
  • सवाल: कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी आपकी है। अगर आपके रहते यह अराजक स्थिति पैदा हो रही है, लोग बेहाल हो रहे हैं तो जिम्मेदार कौन है? खुलकर जमाखोरी हो रही है, आप रोकेंगे नहीं?
  • जवाब: करते हैं, करते हैं।

पूर्वांचल में हो क्या रहा है?

पूर्वांचल के कई जिलों में यही स्थिति है। कहीं पेट्रोल है, कहीं पेट्रोल के लिए मारामारी हो रही है। लोग परेशान हैं। आम लोगों को आसानी से पेट्रोल नहीं मिल रहा है। जमाखोरी का आलम यह है कि रसूखदार लोग 40 से 50 लीटर तक स्टोर कर ले रहे हैं, जिसकी वजह से जरूरतमंदों को पेट्रोल नहीं मिल रहा है। 

जो लोग ट्रैक्टर या दूसरी कॉमर्शियल गाड़ियां चला रहीं हैं, उन्हें ज्यादा मुश्किलें आ रही हैं। तय समय पर पहुंचना है लेकिन तेल का इंतजाम नहीं हो पा रहा है। कड़ी दोपहर में भी लोग इंतजार कर रहे हैं। सीमावर्ती इलाकों में हालात और बुरे हैं। लोग लंबी दूरी की यात्रा करने से बच रहे हैं।

जहां पेट्रोल मिल भी रहा है, वहां सैकड़ों बाइकें इकट्ठे लग जा रही हैं, जिसकी वजह से कार और बड़ी गाड़ी वालों तक पेट्रोल पहुंचाना अपने आप में एक अलग टास्क साबित हो रहा है। पेट्रोल पंप पर कतारें तो लग रहीं हैं लेकिन पेट्रोल-डीजल नसीब वालों को मिल रहा है।

जमाखोरी कितना बड़ा अपराध है, जान लीजिए 

विशाल अरुण मिश्रा, AoR, सुप्रीम कोर्ट:-

तय सीमा से ज्यादा, चाहे डीलर या कोई आम आदमी, पेट्रोल या डीजल स्टॉक करता है, कालाबाजारी करता है तो धारा 7 के तहत उसे 7 साल की जेल और जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है। बरामद सामग्री जब्त भी की जा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड, विशाल अरुण मिश्र से जब खबरगांव ने यह सवाल किया कि क्या जमाखोरी अपराध है, उन्होंने जवाब दिया, 'भारत में पेट्रोल और डीजल की जमाखोरी एक गंभीर दंडनीय अपराध है। एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955 की धारा 3 और 7 के तहत जमाखोरी प्रतिबंधित है। इस कानून के तहत सरकार पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति और वितरण को नियंत्रित करती है।'

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