स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पोक्सो मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की है ताकि उनके खिलाफ पोक्सो मामले में दर्ज एफआईआर से गिरफ्तारी से बचाव हो सके। 

 

गिरफ्तारी को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि प्रशासन की ओर से इस मामले में न ही किसी का फोन उनको आया है और न ही उनको किसी ने नोटिस दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि उनसे किसी ने संपर्क नहीं किया है।

 

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कहा- मेडिकल जांच क्यों नहीं करवाई

अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, 'हमें अभी तक कोई नोटिस नहीं मिला है। जब वे (पुलिस) आएंगे, तो हम उनसे बात करेंगे। पुलिस ने अभी तक हमसे कॉन्टैक्ट नहीं किया है, न ही हमें कुछ बताया गया है, न ही हमें कोई नोटिस दी गई है। सबसे ज़रूरी बात यह है कि उन बच्चों से हमारा क्या कनेक्शन है? जि बच्चों ने कभी हमारे इंस्टिट्यूशन में एडमिशन नहीं लिया, आप उनके हज़ारों मेडिकल टेस्ट कर सकते हैं। यह आप पर है कि आप उनका हमसे कनेक्शन साबित करें। हमने बताया कि हमारे वकील FIR के खिलाफ कोर्ट जाने पर काम कर रहे हैं। POCSO जैसे केस में पुलिस को तुरंत एक्शन लेना चाहिए। उन्हें बच्चे की बात पर यकीन करना चाहिए और यकीन करने के बाद तुरंत मेडिकल जांच करवानी चाहिए। तुरंत एक्शन लेना चाहिए। तो सवाल यह है कि पुलिस ने इसे रजिस्टर क्यों नहीं किया?'

केक काटते हुए दिखाई फोटो

पुलिस की जांच पर सवाल खड़े करते हुए अविमुक्तेश्वरानंद ने मीडियाकर्मियों को एक फोटो दिखाते हुए कहा कि उनके खिलाफ शिकायत करने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी ने के साथ वही पुलिस अधिकारी हैं जो उनके केस की जांच कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोग उन्हें फोटो भेज रहे हैं जिसमें उनकी केस की जांच करने वाली अधिकारी अजय पाल शर्मा केक काटते हुए उनके खिलाफ शिकायत करने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी के साथ दिख रहे हैं।

 

 

 

 

उन्होंने कहा कि एक हिस्ट्रीशीटर के साथ मिलकर एक पुलिस अधिकारी गठजोड़ कर रहा है यह बात पूरी तरह से अपने आप में सबकुछ कह रही है।

कोर्ट ने दिया था निर्देश

यह बयान तब आया है जब प्रयागराज से झूंसी के एक पुलिस स्टेशन को पोक्सो कोर्ट से निर्देश दिया गया कि अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया जाए।  आशुतोष ब्रह्मचारी की शिकायत के आधार पर कोर्ट ने यह आदेश जारी किया।

 

एफआईआर में कहा गया है कि अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य ने दो या तीन के साथ मिलकर एक नाबालिग के साथ बार-बार यौन शोषण किया। शिकायत के मुताबिक यौन शोषण का काम गुरुकुल और माघ मेला जैसे धार्मिक समारोह के दौरान भी किया गया। विद्या मठ में रिपोर्टर्स से बात करते हुए, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दावा किया कि यह केस मनगढ़ंत है।

बताया झूठा केस

उन्होंने कहा, उन्होंने कहा, 'हमें पहले से कोई जानकारी नहीं थी, और हमने आप लोगों को यह पहले भी बताया था। अब बात यह है कि यह एक झूठा केस है। वे क्या कहेंगे? वे वही कहेंगे जो उन्हें सिखाया गया है। उसके आगे वे क्या कहेंगे? इसीलिए वे शायद बोल नहीं पा रहे हैं, क्योंकि केस पूरी तरह से मनगढ़ंत है। अब, हमारे पास एक फोटो है जो हमें पब्लिक ने भेजी है, अलग-अलग जगहों से कई लोगों ने यह कहते हुए भेजी है, ऐसे लोगों से आप किस तरह के इंसाफ की उम्मीद कर सकते हैं? तो यह एक सवाल है जो हमने आपके सामने रखा है, और हमने फोटो भी दिखाई है। अच्छा होगा अगर आपके ज़रिए पब्लिक को पता चले कि क्या हो रहा है। क्योंकि जब पब्लिक कोई राय बनाती है, तो आपके द्वारा दी गई जानकारी उसका आधार बनती है।'

 

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अग्रिम जमानत की अर्जी

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की अग्रिम जमानत अर्जी में FIR की जांच जारी रहने तक गिरफ्तारी से प्रोटेक्शन मांगा गया है। PTI के मुताबिक, सूत्रों ने बताया कि कोर्ट में अर्जी फाइल करने से पहले सरकारी वकील के ऑफिस को एक नोटिस भेजा गया है। अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर विवाद 18 जनवरी को मौनी अमावस्या से भी जुड़ा है, जब कथित तौर पर माघ मेला अधिकारियों ने उन्हें संगम में डुबकी लगाने से रोक दिया था, जिसके बाद उन्हें 11 दिन तक धरना देना पड़ा था। इस घटना के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, 'जब मैं वहां 11 दिनों तक बैठा रहा, तो किसी भी अधिकारी ने मुझे डुबकी लगाने के लिए नहीं कहा। अब बहुत देर हो चुकी है। मैं अगले साल माघ मेले में जाऊंगा और सम्मान के साथ स्नान करूंगा।'