उत्तर प्रदेश के अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर उठ रहे चोरी के आरोपों के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पहली बार अपनी कमाई और खर्च का पूरा हिसाब लोगों के सामने रखा है। ट्रस्ट के अनुसार, साल 2020 में गठन होने के बाद से अब तक उसे कुल 3,264 करोड़ रुपये का चढ़ावा और दान मिला है। इसमें से 2,370 करोड़ रुपये मंदिर के निर्माण और दूसरे जरूरी निर्माण कार्यों पर खर्च किए जा चुके हैं।
ट्रस्ट ने बताया कि श्रद्धालुओं के चढ़ावे से मिले 582 करोड़ रुपये में से 391 करोड़ रुपये मंदिर के संचालन, रखरखाव और दूसरे जरूरी प्रशासनिक कामों पर खर्च किए गए हैं। बाकी की रकम बैंक खातों में सुरक्षित रखी गई है। ट्रस्ट का कहना है कि हर पैसे का पूरा हिसाब-किताब रखा जाता है और समय-समय पर इसकी जानकारी भी लोगों के साथ शेयर की जाती है।
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चांदी के दान को बनाया गया सिल्वर बार
ट्रस्ट ने बताया कि श्रद्धालुओं की ओर से दान में मिले सभी चांदी के सामान को सरकारी टकसाल (गवर्नमेंट मिंट) में पिघलाकर सिल्वर बार बना दिया गया है। इस पूरी प्रक्रिया की फोटो, चांदी का वजन और उसकी शुद्धता के सर्टिफिकेट भी सुरक्षित रखे गए हैं। ट्रस्ट के मुताबिक, अब तक कुल 2,916 उपहार मिले हैं। हर उपहार का पूरा रिकॉर्ड दान देने वाले का नाम और तारीख के साथ रजिस्टर में दर्ज है। इतना ही नहीं, इन सभी उपहारों की हर साल एक स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंसी फर्म से फिजिकल वेरिफिकेशन भी कराई जाती है।
पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ट्रस्ट ने नई व्यवस्था शुरू की है। ट्रस्ट का कहना है कि जो श्रद्धालु नकद दान या कोई अन्य उपहार देते हैं, वे पहले से अनुमति लेकर अयोध्या आ सकते हैं और यह देख सकते हैं कि उनके दान का इस्तेमाल कहां और कैसे किया गया। ट्रस्ट का मानना है कि इस कदम से दान प्रक्रिया में लोगों का भरोसा और ज्यादा मजबूत होगा।
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SIT जांच जारी, ट्रस्ट ने संयम बरतने की अपील की
हाल ही में चढ़ावे की गिनती में हेराफेरी के आरोप सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। जांच एजेंसियों के अनुसार, गिनती के दौरान प्रतिदिन 6 से 8 लाख रुपये तक की गड़बड़ी की आशंका है। इस मामले में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और उनके पास से नकदी, विदेशी मुद्रा तथा सोने-चांदी के आभूषण बरामद किए गए हैं। सरकार ने SIT को 15 जुलाई तक अंतिम रिपोर्ट सौंपने का समय दिया है। वहीं, ट्रस्ट ने कहा है कि जांच पूरी होने और अदालत की प्रक्रिया समाप्त होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।


