दिल्ली में अब तक के सबसे बड़े डिजिटल अरेस्ट साइबर फ्रॉड मामले में बड़ी जानकारी सामने आई है। इस चर्चित केस की जांच अब आधिकारिक तौर पर CBI को सौंप दी गई है। इस मामले में दक्षिण दिल्ली के गुलमोहर पार्क इलाके में रहने वाले बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट कर उनसे 22.92 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। इस केस से लोगों की साइबर सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े हो गए थे । पिछले साल दिसंबर में सुप्रीम कोर्ट ने इस केस की जांच CBI को सौंपने के आदेश दिए थे।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, यह मामले कुछ दिन पहले ही CBI को ट्रांसफर कर दिया गया था। इस मामले की जांच के लिए एक विशेष टीम का गठन किया गया है जिसमें CBI की आर्थिक अपराध यूनिट के अधिकारी शामिल हैं। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि CBI डिजिटल अरेस्ट के उन सभी मामलों की जांच करेगी, जिनमें 10 करोड़ से ज्यादा की रकम शामिल है।
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बुजुर्ग से करोड़ों की ठगी
दक्षिण दिल्ली के गुलमोहर पार्क इलाके में रहने वाले बुजुर्ग के साथ ठगी हुई थी। अगस्त 2025 में उन्हें एक फोन आता है और इस एक फोन के कारण उनकी जिंदगी की सारी कमाई ठगों के पास चली गई। फोन करने वाले ने खुद को मुंबई पुलिस का बताते हुए दावा किया कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल ड्रग तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे क्राइम में हुआ है। बुजुर्ग के अनुसार, शुरूआत में फोन नॉर्मल पूछताछ लगा लेकिन बाद में बुजुर्ग को एक फर्जी जांच प्रक्रिया में उलझा दिया, जिसे उन्होंने डिजिटल अरेस्ट बताया।
घर में किया डिजिटल अरेस्ट
फोन पर बुजुर्ग को पूछताछ के बहाने से ही ठगों ने उलझा लिया था। इस दौरान ठगों ने खुद को पुलिस, ED और CBI के अधिकारी बताकर बुजुर्ग को यकीन दिला दिया कि वह किसी बड़े मामले में फंस चुके हैं। फोन पर उन्हें सख्त निर्देश दिए गए कि वह घर से बाहर न निकलें, किसी से बात न करें और हर समय वीडियो कॉल पर रहें। बुजुर्ग को इतना डरा दिया कि वह खुद को गिरफ्तार समझकर वीडियो कॉल पर ही बैठे रहे। बुजुर्ग काफी ज्यादा डर गए और डर का फायदा उठाकर ठगों ने उनसे कई किश्तों में अलग-अलग बैंक अकाउंट्स में पैसा ट्रांसफर करवा लिया।
22 करोड़ से ज्यादा की ठगी
यह सिलसिला करीब एक महीने तक चला। आरोपियों ने बुजुर्ग से कुल 22.92 लाख रुपये की रकम ट्रांसफर करवाई। पुलिस जांच में सामने आया है कि इस पैसे को कई अलग-अलग खातों में भेजकर उसे कई स्तरों पर घुमाया गया, ताकि उसका ट्रेल छिपाया जा सके। इसके लिए म्यूल अकाउंट्स का इस्तेमाल किया गया, फर्जी डॉक्यूमेंट, डिजिटल लेयरिंग का इस्तेमाल किया गया। इससे साफ है कि इस ठगी में कोई बड़ा गिरोह शामिल हो सकता है।
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मामले में क्या-क्या हुआ?
- इस मामले में लोगों की साइबर सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। 9 सितंबर 2025 को बुजुर्ग ने नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करवाई।
- दिल्ली पुलिस की स्पेशल यूनिट ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए करीब 12.11 करोड़ रुपये फ्रीज कर लिए लेकिन पूरे पैसे रिकवर नहीं हुए और ना ही ठगों का पता चला।
- इसके बाद बुजुर्ग ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कों की जवाबदेही तय करने, ठगी की रकम वापस दिलाने और ऐसे साइबर अपराधों को रोकने के लिए सख्त गाइडलाइंस बनाने की मांग की।
- अब इस मामले की जांच CBI करेगी।
