तिरुपति मंदिर के ‘लड्डू प्रसादम’ को लेकर विवाद अभी भी जारी है। यह मामला अब सिर्फ आस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोगों की सेहत और किचन तक पहुंच गया है। सबसे पहले खबर आई थी कि लड्डू बनाने में जो घी इस्तेमाल हुआ, वह असली नहीं बल्कि सिंथेटिक था। इस मामले में उत्तराखंड की भोले बाबा डेयरी का नाम सामने आया था। अब खबर आ रही है उस घी में LABSA (लिनियर अल्काइल बेंजीन सल्फोनिक एसिड) जैसे खतरनाक केमिकल के अंश पाए गए हैं। इस खुलासे के बाद लोगों की चिंता और भी बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि घी में इस केमिकल का मिलना सीधे तौर पर भारी मिलावट का संकेत है। घी को साफ दिखाने या उसे घटिया किस्म की जानवरों की चर्बी के साथ मिक्स करने के लिए इस 'औद्योगिक सफाई एजेंट' का इस्तेमाल किया गया हो सकता है। ऐसा कहा जा रहा है कि यह कोई सामान्य घी है ही नहीं बल्कि जहर के समान है जो इंसानी शरीर के लिए बना ही नहीं है।
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क्या था पूरा मामला?
इस पूरे मामले को समझने के लिए घी की केमिस्ट्री और टेस्टिंग प्रक्रिया को जानना जरूरी है। घी की शुद्धता जांचने के लिए गैस क्रोमैटोग्राफी टेस्ट किया जाता है। शुद्ध घी में फैटी एसिड का एक खास प्रोफाइल होता है। अगर घी में किसी अन्य प्रकार की चर्बी या तेल मिलाया जाता है, तो उसकी 'S-Value' निर्धारित सीमा से बाहर चली जाती है, जो मिलावट का सीधा सबूत है।
इस तरह के मिलावट को पहचानना मुश्किल हो जाता है क्योंकि जब इन चर्बियों को रिफाइन किया जाता है, तो इनकी महक और रंग गायब हो जाते हैं। इन्हें घी के साथ एक निश्चित अनुपात में मिलाने पर पहचानना लगभग असंभव होता है। केवल हाई लेवल लैब टेस्ट ही इन 'फॉरेन फैट्स' को पकड़ सकते हैं।
क्या है LABSA?
अब बात करते हैं उस केमिकल की जिसका जिक्र अभी खबरों में हो रहा है, LABSA। आसान शब्दों में कहें तो यह एक ऐसा केमिकल है जिसका इस्तेमाल झाग बनाने के लिए किया जाता है। इसका इस्तेमाल डिशवॉश बार, वॉशिंग पाउडर और किसी सख्त इंडस्ट्री के लिए क्लीनर बनाने में किया जाता है।
घी में क्यों मिलाया गया?
अगर घी/तेल पुराना या खराब हो गया हो तो इसे बेहतर बनाने और साफ दिखाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। साथ ही जब घी में जानवरों की चर्बी मिलाई जाती है, तो उन्हें आपस में अच्छी तरह घोलने के लिए इस एसिड का गलत इस्तेमाल किया जाता है।
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सेहत के लिए कितना खतरनाक?
यह एक एसिड है इसलिए शरीर के लिए यह बिल्कुल बना ही नहीं है। अगर इसका सेवन लगातार किया जाता है तो यह पेट और फुड पाइप की कोमल परतों को जला सकता है या उन्हें गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। लंबे समय तक ऐसे मिलावटी घी का सेवन किडनी और लिवर जैसे महत्वपूर्ण अंगों को खराब कर सकता है।
यह ज्यादातर किसी कारखाने में इस्तेमाल किया जाता है। इससे समझा जा सकता है कि यह कितना ज्यादा खतरनाक हो सकता है। औद्योगिक ग्रेड के इन रसायनों में कई ऐसी कमियां होती हैं, जो कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का कारण बन सकती हैं।
