विपक्ष के विरोध के बाद लोकसभा में संविधान (131वां) संशोधन विधेयक धराशायी हो गया। शुक्रवार को कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संविधान (131वां संशोधन) विधेयक- 2026 लोकसभा में पेश किया। संविधान संशोधन विधेयक के तहत 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिला आरक्षण लागू करना था। वहीं लोकसभा में सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव था।
मोदी सरकार ने संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र में तीन विधेयकों पर करीब 21 घंटे तक चर्चा की। मगर महिला आरक्षण से जुड़े विधेयक विपक्ष के विरोध के आगे टिक नहीं सके। सबसे पहले संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026 पर मतदान हुआ। विधेयक के पक्ष में 298 और 230 वोट विपक्ष में पड़े। लोकसभा के कुल 528 सदस्यों ने वोटिंग की। अगर यह विधेयक पास हो जाता तो लोकसभा में सीटों की संख्या 543 से बढ़कर 850 हो जाती।
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विधेयक को पास करने के लिए सरकार को 352 वोट की जरूरत थी। मगर 54 वोट से बिल लोकसभा में गिर गया। संविधान संशोधन विधेयक के गिरने के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि सरकार बाकी दो विधेयकों को आगे नहीं बढ़ाएगी।
इन विधेयकों पर हुई चर्चा
- संविधान (131वां संशोधन) विधेयक- 2026
- केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक- 2026
- परिसीमन विधेयक- 2026
संविधान संशोधन विधेयक पारित होने का प्रावधान क्या है?
संविधान संशोधन विधेयक तभी पारित माना जाता है, जब उसे सदन में उपस्थिति वोट देने वाले सदस्यों का दो तिहाई समर्थन हासिल हो। संविधान के अनुच्छेद 368(2) के मुताबिक सूचीबद्ध अहम मुद्दों को प्रभावित करने वाले संविधान संशोधन विधेयकों को संसद से पास होने के बाद कम से कम आधे राज्यों की विधानसभाओं से भी अनुमोदन की जरूरत पड़ती है।
कांग्रेस का चाल, चरित्र और चेहरा बेनकाब: शेखावत
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि जिस तरह आज महिलाओं के आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक गिरा है। जिस तरह कांग्रेस ने एक बार फिर देश को बांटने के अपने एजेंडे को पूरी तरह से सामने रखा, उससे कांग्रेस की चाल, चरित्र और चेहरा बेनकाब हो गया है।
महिला आरक्षण, जनगणना और परिसीमन कैसे आपस में जुड़े?
केंद्र सरकार ने 2023 में 106वें संविधान संशोधन अधिनियम के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसद आरक्षण दिया। इसमें कहा गया था कि आरक्षण 2023 में अधिनियम के लागू होने के बाद पहली जनगणना के आधार पर प्रभावी होगा। अगली जनगणना 2027 में प्रस्तावित है। जनगणना के दो साल बाद यानी 2029 में लोकसभा चुनाव होने हैं। सरकार को इस बात की संभावना बेहद कम थी कि 2027 की जनगणना के आधार पर अगले लोकसभा चुनाव से पहले परिसीमन पूरा हो पाएगा। परिसीमन के आधार पर ही महिलाओं को आरक्षण देना था। इन बाधाओं को खत्म करने की खातिर मोदी सरकार 131वां संविधान संशोधन लाई।
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यह संविधान संशोधन सरकार को 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करने और बाद में उसी परिसीमन के आधार पर महिला आरक्षण को लागू करने की ताकत देता। वहीं इन्हीं प्रावधानों को केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक के माध्यम से केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जाता। परिसीमन विधेयक- 2026 अगर पास हो जाता तो केंद्र सरकार को परिसीमन आयोग गठित करने का अधिकार मिल जाता।
क्या है 131वां संविधान संशोधन?
131वां संविधान संशोधन के तहत लोकसभा सीटों की संख्या 850 करना था। वहीं नए परिसीमन को लागू करना और महिला को 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले 33 फीसद आरक्षण देना था। विधेयक के मुताबिक 815 सीटें राज्यों और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों से प्रस्तावित थीं।
कहां फंस गया पेच
मगर इस पूरी प्रक्रिया में एक पेच फंस रहा था। दरअसल, 1976 में 42वां संविधान संशोधन किया गया। इसमें 1971 की जनगणना के आधार पर लोकसभा में हर राज्य की कुल सीटों की संख्या और राज्य विधानसभाओं में कुल सीटों की संख्या को साल 2000 तक स्थिर कर दिया गया। साल 2001 में 84वां संविधान संशोधन करके सीटों की संख्या को 2026 के बाद पहली जनगणना के प्रकाशन तक स्थिर किया गया। इस लिहाज से केंद्र सरकार लोकसभा में सीटों की संख्या बिना संविधान संशोधन के नहीं बढ़ा सकती थी।
परिसीमन भी 2027 की जनगणना के बाद होता। जब परिसीमन 2027 के बाद होता तो महिला आरक्षण भी बाद में लागू होता। हालांकि सरकार ने इसकी एक काट निकाली। वह 131वां संविधान संशोधन लाई, ताकि 2011 की जनगणना को परिसीमन और महिला आरक्षण का आधार बनाया जा सके। हालांकि विपक्ष के विरोध के कारण सरकार की उम्मीदों पानी फिर गया।
