देश में महिला आरक्षण को लेकर लंबे समय से चर्चा जारी है। देश की तमाम पार्टियां इस बात पर सहमत हैं कि महिलाओं को देश की संसद और राज्यों की विधानसभाओं में एक तिहाई आरक्षण दिया जाना चाहिए। कई मंचों से महिलाओं के हित को लेकर बड़ी-बड़ी बातें होती हैं और चुनावों में उनके वोट लेने के लिए तमाम योजनाओं का एलान भी होता है। इसके इतर नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NRCB) के आंकड़े दिखाते हैं कि हर दिन लगभग 80 महिलाओं का रेप होता है, 185 महिलाओं का अपहरण होता है। हैरानी की बात है कि सार्वजनिक जगहों, दफ्तरों और अपने घर में भी महिलाएं किसी न किसी तरह के अपराध का शिकार होती हैं।

 

NCRB की हालिया रिपोर्ट में साल 2024 में हुई आपराधिक घटनाओं का पूरा रिकॉर्ड दर्ज है। यह रिपोर्ट अलग-अलग राज्यों की पुलिस की ओर से दिए गए डेटा पर आधारित है। इस रिपोर्ट में देशभर में हुए अपराधों, उनसे जुड़ी धाराओं और हर राज्य का डेटा दिया गया है। यह रिपोर्ट बताती है कि देश में महिलाओं के खिलाफ गंभीर अपराध के मामले अभी भी बेहद ज्यादा हैं। 

 

अगर महिलाओं के खिलाफ अपराध की बात करें तो 2023 की तुलना में इसमें 1.5 प्रतिशत की कमी आई है। 2023 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के कुल 4,48,211 केस सामने आए थे और 2024 में 4,44,534 केस ही सामने आए है। इसमें रिश्तेदारों या पति की ओर से की गई हिंसा के 1,20,227 केस (27.2%), महिलाओं के अपहरण के 67829 केस (15.4%), POCSO के 67,809 (15.4% केस) और महिलाओं का शीलभंग करने के मकसद से किए गए हमलों के 48,303 केस (10.9%) सामने आए। 2023 में एक लाख महिला पर अपराध की दर 66.2 थी और 2024 में यह घटकर 64.6 हो गई।

 

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हालांकि, चिंताजनक बात यह है कि रेप जैसे गंभीर मामलों में सजा मिलने की दर बेहद कम है। 2024 के आंकड़े बताते हैं कि रेप के सिर्फ 5032 केस में सजा सुनाई गई और दोष सिद्धि की दर 24.4 प्रतिशत ही थी। इसी तरह अपहरण के सिर्फ 2973 केस में सजा सुनाई गई और दोष सिद्धि की दर 26.8 प्रतिशत थी।

 

मेट्रो शहरों में भी सुरक्षित नहीं हैं महिलाएं

2023 की तुलना में 2024 में महिलाओं के खिलाफ हुए अपराध में मामूली कमी आई। 2023 में मेट्रो शहरों में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 51,393 केस सामने आए और 2024 में 50,584 केस सामने आए। इसमें सबसे ज्यादा 28.4 प्रतिशत यानी 14,376 केस पति या उसके परिवार की ओर से की गई क्रूरता के और 20.1 प्रतिशत यानी 10,142 केस महिला के अपहरण से जुड़े थे।

 

मेट्रो शहरों (20 लाख से ज्यादा आबादी वाले) में POCSO के कुल 7508 मामले सामने आए। वहीं, महिला का शीलभंग करने वाले कुल 4671 केस सामने आए। मेट्रो शहरों में भी रेप के केस में दोषसिद्धि की दर सिर्फ 24.3 प्रतिशत ही रही। सिर्फ 326 केस में सजा हुई।

हर दिन लगभग 80 रेप

अगर सिर्फ रेप के मामलों की बात करें तो साल 2024 में रेप के कुल 29536 केस सामने आए। रेप के सबसे ज्यादा 4871 केस राजस्थान में सामने आए। वहीं, उत्तर प्रदेश में रेप के 3209 केस, महाराष्ट्र में 3091 तो मध्य प्रदेश में रेप के 3061 केस सामने आए। क्षेत्रफल के लिहाज से बड़े राज्यों को देखें तो गुजरात में कुल 661, पंजाब में 475 और तमिनलाडु में 419 केस सामने आए। पूर्वोत्तर के राज्यों में रेप के बहुत कम मामले सामने आए। 

 

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साल भर में रेप के प्रयास के कुल 2561 केस सामने आए। इस मामले में भी सबसे ज्यादा 778 केस राजस्थान में ही सामने आए। महाराष्ट्र, मणिपुर, सिक्किम और गुजरात में रेप के प्रयास के एक भी मामले सामने नहीं आए। केंद्र शासित प्रदेशों को देखें तो राजधानी दिल्ली में रेप के कुल 1058 और रेप के प्रयास का एक केस सामने आया। जम्मू-कश्मीर में रेप के कुल 261 केस सामने आए।

महिलाओं के खिलाफ अन्य अपराध

महिलाओं का शीलभंग करने के मकसद से किए गए हमलों के कुल 48303 केस सामने आए। इसमें से सबसे ज्यादा 8276 केस राजस्थान में आए। ओडिशा में 7299,  महाराष्ट्र में 5857 और कर्नाटक में कुल 4427 केस सामने आए। उत्तर प्रदेश में 4497, पंजाब में 390, केरल में 2367 और बिहार में कुल 225 केस सामने आए।

 

वहीं, यौन उत्पीड़न के मामलों को देखें तो साल भर में 15609 केस सामने आए। सबसे ज्यादा 2641 केस महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में आए। इसी तरह राजस्थान में 1381 केस, मध्य प्रदेश में 1238, केरल में 1160 और कर्नाटक में कुल 538 केस सामने आए। राजधानी दिल्ली में यौन उत्पीड़न के कुल 316 केस सामने आए।

 

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अगर ऑफिस में यौन उत्पीड़न के केस देखें तो साल भर में 388 केस और काम करने की अन्य जगहों पर यौन उत्पीड़न के कुल 512 केस सामने आए। ऑफिस में यौन उत्पीड़न के सबसे ज्यादा 89 केस केरल से सामने आए। महाराष्ट्र में 57, हिमाचल प्रदेश में 58 और झारखंड में 22 केस सामने आए। अन्य कार्यस्थलों पर यौन उत्पीड़न के मामलों को देखें तो मध्य प्रदेश में 63 केस, हिमाचल प्रदेश में 44 केस और गुजरात में 41 केस सामने आए। उत्तर प्रदेश में कुल 72 केस सामने आए।

सार्वजनिक जगहों पर भी सुरक्षित नहीं हैं महिलाएं

NCRB की रिपोर्ट बताती है कि सार्वजनिक परिवहन के साधनों और सार्वजनिक जगहों पर भी महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। साल 2024 में सार्वजनिक परिवहन के साधनों के जरिए यात्रा कर रही महिलाओं से यौन उत्पीड़न के कुल 49 मामले और सार्वजनिक जगहों पर यौन उत्पीड़न के कुल 1469 मामले सामने आए।

 

सार्वजनिक परिवहन के साधनों में यौन उत्पीड़न के सबसे ज्यादा 100 केस केरल में आए। राजधानी दिल्ली में भी इस तरह के 18 केस आए। केरल और दिल्ली के अलावा यूपी में 54, ओडिशा में 40, तेलंगाना में 45, मध्य प्रदेश में 65 और महाराष्ट्र में कुल 61 केस सामने आए।

 

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अगर सार्वजनिक जगहों पर यौन उत्पीड़न के केस देखं तो सबसे ज्यादा 549 केस ओडिशा में सामने आए। वहीं, उत्तर प्पदेश में 184, तमिलनाडु में 136, तेलंगाना में 100 और मध्य प्रदेश में 119 केस सामने आए। पूर्वोत्तर के कई राज्य ऐसे हैं जहां ना तो सार्वजनिक परिवहन में और ना ही सार्वजनिक जगहों पर यौन उत्पीड़न के केस सामने आए।

 

दहेज हत्या और घरेलू हिंसा

दहेज हत्या और घरेलू हिंसा से जुड़े हजारों मामले यह दिखाते हैं कि महिलाएं घर में भी सुरक्षित नहीं हैं। साल 2024 में पूरे देश में दहेज हत्या के कुल 5737 मामले सामने आए। इसके अलावा, पति या उसके रिश्तेदारों की ओर से की गई हिंसा के कुल 120227 केस सामने आए दहेज हत्या के सबसे ज्यादा 2038 केस उत्तर प्रदेश में सामने आए। वहीं, बिहार में 1078, मध्य प्रदेश में 450 और राजस्थान में 386 केस सामने आए। 

 

पति या उसके रिश्तेदारों की ओर से की गई घरेलू हिंसा के केस देखें तो सबसे बुरा हाल उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल का रहा। उत्तर प्रदेश में कुल 21266 केस और पश्चिम बंगाल में 19330 केस सामने आए। महाराष्ट्र, तेलंगाना और राजस्थान में भी 10 हजार से ज्यादा केस सामने आए। राजधानी दिल्ली में दहेज हत्या के 109 और घरेलू हिंसा के 4647 केस सामने आए।

 

इसी साल महिलाओं की जबरन शादी के लिए मजबूर करने के 28949 केस सामने आए। इसमें 12438 केस बिहार और 7859 केस यूपी के ही थे।

राजधानी दिल्ली में जमकर हो रहे अपराध

देश के 19 मेट्रो शहरों की बात करें तो एक साल में इन शहरों में रेप के कुल 3886 और रेप के प्रयास के 52 केस सामने आए। राजधानी दिल्ली में ही रेप के 1058 केस सामने आए। दूसरे नंबर पर मुंबई थी जहां रेप के 411 केस सामने आए। महिला का शीलभंग करने के मकसद से किए गए हमलों के कुल 4671 केस सामने आए। इसके कुल 897 केस बेंगलुरु में, 755 केस दिल्ली में, 857 केस मुंबई में और 629 केस जयपुर में सामने आए। मेट्रो शहरों के पब्लिक ट्रांसपोर्ट में यौन उत्पीड़न के कुल 75 केस और सार्वजनिक जगहों पर यौन उत्पीड़न के कुल 151 केस सामने आए।

 

 

इन मेट्रो शहरों में दहेज हत्या के कुल 341 केस आए। 341 में से 109 केस सिर्फ राजधानी दिल्ली में सामने आए। वहीं, पति और उसके रिश्तेदारों की ओर से की गई हिंसा के कुल 14376 केस मेट्रो शहरों में पाए गए। इसमें से सबसे ज्यादा 4647 केस राजधानी दिल्ली में आए। जबरन शादी के लिए किए जाने वाले अपहरण के कुल 757 मामले सामने आए। इसके सबसे ज्यादा केस बिहार की राजधानी पटना में सामने आए जहां कुल 439 केस दर्ज किए गए। गाजियाबाद में 116 और जयपुर में 43 केस दर्ज हुए।