दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार को कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के पति रॉबर्ट वाड्रा और 10 अन्य के खिलाफ दायर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की चार्जशीट का संज्ञान लिया है। हरियाणा के शिकोहपुर में एक जमीन सौदे से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में पिछले साल जुलाई में ईडी ने यह आरोपपत्र दाखिल किया था। अदालत ने 16 मई को रॉबर्ट वाड्रा को तलब भी किया है।

 

विशेष न्यायाधीश सुशांत चांगोत्रा ​​ने कहा कि चार्जशीट और दस्तावेजों की पहली निगाह में की गई विस्तृत जांच से वाड्रा और आठ अन्य आरोपियों के खिलाफ आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त सामग्री सामने आई है। तदनुसार मैं मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम की धारा 70 (कंपनियों द्वारा किए गए अपराध) के साथ पढ़ी जाने वाली धारा 3 (मनी लॉन्ड्रिंग) के तहत अपराधों का संज्ञान लेता हूं, जो अधिनियम की धारा 4 के तहत दंडनीय हैं।'

 

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इनको अदालत का समन

अदालत ने रॉबर्ट वाड्रा, केवल सिंह विर्क, स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड (अब स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी), स्काई लाइट रियल्टी प्राइवेट लिमिटेड, रियल अर्थ एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड (अब रियल अर्थ एस्टेट्स) और ब्लू ब्रीज ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड (अब ब्लू ब्रीज ट्रेडिंग), नॉर्थ इंडिया आईटी पार्क्स प्राइवेट लिमिटेड (अब नॉर्थ इंडिया आईटी पार्क्स), लंबोदर आर्ट एंटरप्राइजेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (अब लंबोदर आर्ट एंटरप्राइजेज इंडिया) और एसजीवाई प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड (इसे पहले ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड के नाम से जाना जाता था) को समन जारी किया है।

 

न्यायाधीश चांगोत्रा ​​ने कहा, 'इस अदालत को इस तथ्य का ध्यान रखना होगा कि इस चरण में जांच का दायरा बहुत सीमित है और इसे अभियोजन शिकायत में किए गए दावों और उसके साथ संलग्न दस्तावेजों की जांच तक ही सीमित रखना होगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मामले में आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं।' 

 

वहीं अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में आरोपी सत्यनंद याजी को समन नहीं भेजा है। कोर्ट ने कहा, 'अभियोजन पक्ष रिकॉर्ड पर ऐसा कोई भी सबूत पेश करने में नाकाम रहा है, जिससे पहली नजर में यह साबित हो सके कि आरोपी नंबर-2 सत्यनंद याजी अपराध से मिली रकम से जुड़ी किसी भी प्रक्रिया या गतिविधि में शामिल थे।

डीएलएफ यूनिवर्सल पर लगे आरोपों की जांच करे ED

रॉबर्ट वाड्रा की प्रोप्राइटरी फर्म आर्टेक्स के बारे में अदालत ने कहा कि यह कोई अलग कानूनी इकाई नहीं है। वाड्रा इसके कथित कामों के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि ईडी से यह उम्मीद की जाती है कि वह डीएलएफ यूनिवर्सल प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ लगे आरोपों की आगे जांच करे, जो मुख्य अपराध की एफआईआर में आरोपी कंपनियों में से एक है,  ताकि इस मामले में पूरा न्याय सुनिश्चित हो सके। अगर कोई जाहिर काम या चूक पाई जाती है तो ऐसे कामों या चूक के लिए जिम्मेदार लोगों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।

क्या है शिकोहपुर जमीन केस?

प्रियंका गांधी वाड्रा के पति रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ हरियाणा के गुरुग्राम जिले के मानेसर-शिकोहपुर में एक जमीन सौदे से जुड़ी जांच चल रही है। 2008 के फरवरी महीने में स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड ने शिकोहपुर में 3.5 एकड़ जमीन ओकारेश्वर प्रॉपर्टीज से 7.5 करोड़ रुपये में खरीदी। रॉबर्ट वाड्रा स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड में निदेशक थे। चार साल बाद यानी सितंबर 2012 में स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड ने यह जमीन डीएलएफ को 58 करोड़ रुपये में बेच दी।

 

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उस वक्त हरियाणा में भूपेंद्र सिंह हुड्डा की अगुवाई में कांग्रेस सरकार थी। तत्कालीन भूमि चकबंदी और भूमि अभिलेख महानिदेशक-सह-पंजीकरण महानिरीक्षक व पूर्व आईएएस अधिकारी अशोक खेमका ने 2012 में चकबंदी अधिनियम और कुछ अन्य प्रक्रियाओं के उल्लंघन का हवाला दिया और जमीन का म्यूटेशन कैंसिल कर दिया।


हरियाणा में कांग्रेस सरकार होने के कारण इस मामले ने खूब तूल पकड़ा। हालांकि रॉबर्ट वाड्रा मामले को अपने और अपने परिवार के खिलाफ सियासी बदले की कार्रवाई बताते हैं। उनका दावा है कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया है।