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भारत में बढ़ गई बेरोजगारी, अब तो सरकारी आंकड़ों में सामने आ गया सच

NSSO की ओर से कराए गए एक सर्वेक्षण के मुताबिक इस साल मार्च के महीने में बेरोजगारी की दर बढ़ गई है। इसकी वजह है कि शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी में बढ़ोतरी हुई है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: Sora AI

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भारत में एक महीने में बेरोजगारी की दर में बढ़ोतरी हुई है। भारत सरकार के ही आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी 2026 में बेरोजगारी की दर 4.9 प्रतिशत थी लेकिन मार्च 2026 में बेरोजगारी की दर 5.1 प्रतिशत पहुंच गई। सर्वे के मुताबिक, यह बढ़ोतरी शहरों में बेरोजगारी बढ़ने के कारण हुई है। शहरी क्षेत्रों की जो आबादी फरवरी में 6.6 प्रतिशत थी वह मार्च में बढ़कर 6.8 प्रतिशत हो गई।

 

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की ओर से तय अंतराल पर श्रमबल सर्वेक्षण (PLFS) आबादी की गतिविधियों में भागीदारी, रोजगार और बेरोजगारी की स्थिति पर आंकड़ों का प्राथमिक स्रोत है। इसी सर्वेक्षण के आंकड़े बुधवार को जारी किए गए हैं। इन आंकड़ों के मुताबिक, 15 साल और उससे ज्यादा उम्र के व्यक्तियों की बेरोजगारी दर इस साल मार्च में बढ़कर 5.1 प्रतिशत हो गई है।

शहरी क्षेत्रों में बढ़ी बेरोजगारी

बता दें कि PLFS सर्वेक्षण के तौर-तरीकों को जनवरी, 2025 से बदला गया है ताकि देश के लिए वर्क फोर्स इंडीकेटर्स के मासिक और तिमाही अनुमान निकाले जा सकें। अप्रैल, 2025 से फरवरी, 2026 तक के मासिक बुलेटिन पहले ही जारी किए जा चुके हैं। मार्च, 2026 का वर्तमान मासिक बुलेटिन इस सीरीज का 12वां बुलेटिन है। PLFS पर जारी एक बयान में कहा गया है कि 15 साल और उससे ज्यादा की उम्र के व्यक्तियों में बेरोजगारी दर मार्च, 2026 में में मामूली बढ़कर 5.1 प्रतिशत हो गई है जो फरवरी, 2026 में 4.9 प्रतिशत थी। मुख्य रूप से शहरी बेरोजगारी दर में वृद्धि के कारण यह बढ़ोतरी हुई है जो मार्च, 2026 में बढ़कर 6.8 प्रतिशत हो गई जबकि बीते महीने फरवरी में यह 6.6 प्रतिशत थी।

 

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बयान के अनुसार, 15 वर्ष और उससे ज्यादा उम्र की ग्रामीण महिलाओं में बेरोजगारी दर मार्च, 2026 में लगभग स्थिर रही जबकि इसी आयु वर्ग के पुरुषों में बेरोजगारी दर फरवरी, 2026 की तुलना में मार्च, 2026 में मामूली अधिक थी। ग्रामीण क्षेत्रों में महिला बेरोजगारी दर मार्च, 2026 में स्थिर बनी रही। अखिल भारतीय स्तर पर, मासिक अनुमान कुल 3,75,262 व्यक्तियों के सर्वेक्षण से प्राप्त जानकारी पर आधारित है। शहरी श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर) में स्थिरता का रुख है। मार्च, 2026 में 15 साला और उससे ज्यादा उम्र के व्यक्तियों में समग्र श्रम बल भागीदारी दर 55.4 प्रतिशत दर्ज की गई, जो फरवरी, 2026 के 55.9 प्रतिशत से थोड़ी कम है।

LFPR और WPR में स्थिरता

ग्रामीण क्षेत्रों में एलएफपीआर मार्च, 2026 में 58 प्रतिशत थी जबकि फरवरी, 2026 में यह 58.7 प्रतिशत थी। वहीं, शहरी क्षेत्रों में एलएफपीआर लगभग स्थिर रही। बयान के अनुसार, इस साल मार्च में महिला श्रम बल भागीदार दर 34.4 प्रतिशत रही जबकि फरवरी, 2026 में यह 35.3 प्रतिशत थी। ग्रामीण क्षेत्रों में महिला एलएफपीआर मार्च, 2026 में 38.9 प्रतिशत रही जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 25.2 प्रतिशत थी।

 

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बयान के अनुसार, बीते महीने शहरी क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के श्रमिक जनसंख्या अनुपात (डब्ल्यूपीआर) में व्यापक रूप से स्थिरता बनी रही। बीते महीने समग्र WPR 52.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में, मार्च, 2026 में डब्ल्यूपीआर 55.5 प्रतिशत था जबकि फरवरी, 2026 में यह 56.3 प्रतिशत था। वहीं, शहरी क्षेत्रों में डब्ल्यूपीआर मार्च, 2026 में 46.8 प्रतिशत था जबकि फरवरी, 2026 में यह 47 प्रतिशत था।

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