दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति शादी का वादा करके महिला से शारीरिक संबंध बनाता है और बाद में कुंडली न मिलने के बहाने शादी से इनकार कर देता है, तो यह धोखाधड़ी के जरिए शारीरिक संबंध बनाने जैसा अपराध होगा। यह अपराध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 69 के तहत आता है।

 

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने यह टिप्पणी एक आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए की। आरोपी पर आरोप था कि उसने एक महिला से कई बार शारीरिक संबंध बनाए। उसने बार-बार शादी का भरोसा दिया था। उसने कहा था कि कुंडली मिलान में कोई समस्या नहीं है। लेकिन बाद में उसने कुंडली न मिलने का बहाना बनाकर शादी करने से मना कर दिया।

 

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शख्स ने दिया था आश्वासन

कोर्ट ने कहा कि आरोपी ने महिला को बार-बार आश्वासन दिया कि शादी में कोई रुकावट नहीं है। कुंडली भी मैच कर गई है। इसी भरोसे पर महिला ने शारीरिक संबंध बनाए। लेकिन बाद में कुंडली न मिलने का बहाना बनाना संदेह पैदा करता है। इससे लगता है कि शुरुआत से ही वादा झूठा था। ऐसे में यह धारा 69 बीएनएस के तहत अपराध बनता है। धारा 69 में धोखे से या झूठे शादी के वादे से शारीरिक संबंध बनाने पर 10 साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।

 

आरोपी जनवरी 2026 से जेल में था। उसने जमानत मांगी। उसके वकील ने कहा कि संबंध सहमति से बनाए गए थे। दोनों 8 साल से एक दूसरे को जानते थे। यह सिर्फ रिश्ता खराब होने का मामला है, बलात्कार या झूठे वादे का नहीं। लेकिन कोर्ट ने यह दलील नहीं मानी।

शिकायत ले ली थी वापस

कोर्ट ने फैसले में लिखा कि पहले महिला ने नवंबर 2025 में शिकायत की थी। लेकिन आरोपी और उसके परिवार के शादी का आश्वासन देने पर शिकायत वापस ले ली। बाद में जब शादी से इनकार हुआ तो जनवरी 2026 में नई एफआईआर दर्ज हुई। इसमें आईपीसी की धारा 376 (बलात्कार) और बीएनएस की धारा 69 लगाई गई।

 

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कोर्ट ने कहा कि यह मामला सिर्फ 'रिश्ता खराब होने' का नहीं है। आरोपी को पता था कि उसके परिवार में कुंडली मिलान बहुत जरूरी है। फिर भी उसने बार-बार आश्वासन दिया। अगर कुंडली इतनी महत्वपूर्ण थी तो पहले ही जांच कर लेनी चाहिए थी। बाद में बहाना बनाना गलत लगता है। कोर्ट ने आगे कहा कि आपसी रिश्ते में अगर शादी नहीं होती तो सिर्फ इसलिए अपराध नहीं बनता। लेकिन यहां हालात अलग हैं।