सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (सीसीपीए) ने दिल्ली के प्रसिद्ध कोचिंग संस्थान वाजीराव एंड रेड्डी इंस्टीट्यूट पर 15 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा (सीएसई) 2023 के रिजल्ट से जुड़े भ्रामक विज्ञापनों के लिए लगाया गया है।

 

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने सोमवार को एक बयान में बताया कि सीसीपीए ने 20 फरवरी को अपना आदेश जारी किया था। संस्थान ने अपनी वेबसाइट पर गलत और भ्रामक दावे किए थे। जैसे- यूपीएससी सीएसई 2023 में 1016 रिक्तियों में से 645 से ज्यादा चयन वाजीराव एंड रेड्डी इंस्टीट्यूट से हुए, टॉप 10 में 6, टॉप 50 में 35, 'टॉप 100 में 64 छात्र।

 

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जानकारी छिपाने का आरोप

सीसीपीए ने पाया कि संस्थान ने महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई। खासकर यह नहीं बताया कि सफल उम्मीदवारों ने कौन से कोर्स किए थे। संस्थान कई अलग-अलग प्रोग्राम चलाता है, लेकिन विज्ञापनों से ऐसा लगता था कि सभी सफल छात्र उनके नियमित कोर्स में पढ़े और पूरी तैयारी संस्थान से की।

 

यह जानकारी यूपीएससी की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए बहुत जरूरी होती है। जानकारी छिपाने से छात्रों को सही फैसला लेने में दिक्कत होती है। सीसीपीए ने कहा कि यह छिपाव उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 2(9) का उल्लंघन है।

नहीं दे पाए रसीदें

जांच में संस्थान ने 431 एनरोलमेंट फॉर्म दिए, जिनमें कोर्स का नाम और एनरोलमेंट की तारीख नहीं थी। संस्थान ने कोई संतोषजनक सबूत जैसे फीस रसीदें नहीं दिए।

 

यह दूसरी बार है जब संस्थान पर ऐसा जुर्माना लगा है। पहले यूपीएससी सीएसई 2022 के लिए 7 लाख रुपये का जुर्माना लगा था। हर साल करीब 11 लाख छात्र यूपीएससी परीक्षा देते हैं। ऐसे विज्ञापन बहुत से छात्रों और उनके परिवारों को गुमराह कर सकते हैं। वे ढेर सारा समय पैसा लगाते हैं।

57 संस्थानों को नोटिस

अब तक सीसीपीए ने 57 कोचिंग संस्थानों को नोटिस दिए हैं। 29 संस्थानों पर 1.24 करोड़ रुपये का जुर्माना लगा है और उन्हें ऐसे दावे बंद करने को कहा है। सीसीपीए ने कहा कि कोचिंग संस्थानों को अपने विज्ञापनों में पूरी और सच्ची जानकारी देनी चाहिए ताकि छात्र सही फैसला ले सकें।

बनी हैं गाइडलाइंस

मंत्रालय ने भ्रामक विज्ञापनों पर रोक के लिए गाइडलाइंस भी बनाई हैं। आईएएस कोचिंग सेक्टर की कीमत करीब 3000 करोड़ रुपये है, जबकि पूरा कोचिंग उद्योग 58,088 करोड़ रुपये का है। दिल्ली यूपीएससी की तैयारी का मुख्य केंद्र है।

 

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वाजीराव एंड रेड्डी इंस्टीट्यूट के प्रवक्ता ने कहा कि उन्हें आदेश देर रात मिला। उन्होंने दावा किया कि उनकी वेबसाइट पर कोई भ्रामक विज्ञापन नहीं है। उन्होंने पहले भी (नवंबर 2024 में) ऐसे आदेश के खिलाफ नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रेड्रेसल कमीशन (एनसीडीआरसी) में अपील की थी, जहां जुर्माने पर रोक लगी है। मामला अभी अदालत में है। वे वकीलों से सलाह लेकर आगे कदम उठाएंगे।