भारत के सबसे बड़ा प्राइवेट बैंकों में से एक एचडीएफसी बैंक ने सोमवार को भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार को अपना पार्ट-टाइम (नॉन-एग्जीक्यूटिव) चेयरमैन नियुक्त किया। बैंक में अनियमितताओं में घिरे पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने मार्च में इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद से यह पद खाली चल रहा था।
पूर्व IAS अधिकारी राजीव कुमार भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त रहते हुए विपक्ष के निशाने पर रहे थे।
यह भी पढ़ें: 1 जुलाई से पेट्रोल-डीजल पर लगी सारी पाबंदियां खत्म, सरकार ने हटाए प्रतिबंध
शेयरहोल्डर की मंजूरी जरूरी
एचडीएफसी बैंक के बोर्ड ने 29 जून को हुई अपनी मीटिंग में राजीव कुमार को 30 जून, 2026 से चार साल के लिए एडिशनल (इंडिपेंडेंट) डायरेक्टर के तौर पर नियुक्त करने की मंजूरी दी है। तीन साल के लिए पार्ट-टाइम चेयरमैन के तौर पर उनकी नियुक्ति भारतीय रिजर्व बैंक की मंजूरी पर निर्भर है। वहीं, इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के तौर पर नियुक्ति के लिए शेयरहोल्डर की मंजूरी भी जरूरी होगी।
यह भी पढ़ें: नर्स सरला भट हत्याकांड में यासीन मलिक मुख्य आरोपी, 36 साल पुराना केस है क्या?
अतनु चक्रवर्ती ने क्यों पद छोड़ा?
मार्च में अतनु चक्रवर्ती के पद छोड़ने के बाद बैंक के बोर्ड में इंडिपेंडेंट डायरेक्टर, पुराने बैंकर केकी मिस्त्री ने अंतरिम पार्ट-टाइम चेयरमैन के तौर पर काम संभाला था। आरबीआई ने केकी मिस्त्री को पद पर बने रहने के लिए 90 दिन का एक्सटेंशन देने की मंजूरी दी थी, जो अब खत्म हो गई थी।
बता दें कि अतनु चक्रवर्ती ने 18 मार्च, 2026 को अचानक यह कहते हुए पद छोड़ दिया था कि पिछले दो सालों में बैंक के अंदर कुछ घटनाएं और तरीके उनके 'पर्सनल वैल्यू' और एथिक्स से मेल नहीं खाते थे।
राजीव कुमार आर्थिक मोर्चे पर
राजीव कुमार इस पद पर काम करने वाले दूसरे IAS अधिकारी हैं। कुमार झारखंड कैडर के 1984 बैच के IAS अधिकारी हैं। उनसे पहले पूर्व चेयरमैन अतुन चक्रवर्ती गुजरात कैडर के 1985 बैच के रिटायर्ड IAS अधिकारी थे। राजीव कुमार 2017 से 2020 तक वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के सेक्रेटरी के तौर पर काम किया है। इस दौरान उन्होंने शेल कंपनियों और वित्तीय सेवा प्रणाली में काले धन पर नकेल कसने का काम किया।


