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नर्स सरला भट हत्याकांड में यासीन मलिक मुख्य आरोपी, 36 साल पुराना केस है क्या?

नर्स सरला भट के रेप और मर्डर केस में सोमवार को स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी ने यासीन मलिक और चार अन्य के खिलाफ 737 पेज की चार्जशीट फाइल की।

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यासीन मलिक। Photo Credit- PTI

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जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के शुरुआती सालों में 1990 में कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट के रेप और मर्डर का मामला तीन दशकों से ज्यादा समय तक अनसुलझा रहा है। मगर, सोमवार को स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) ने बैन जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) चीफ यासीन मलिक और चार अन्य के खिलाफ 737 पेज की चार्जशीट फाइल की। यासीन मलिक को मुख्य आरोपी बनाया गया है। ​​यह दस्तावेज एक स्पेशल NIA कोर्ट में फाइल किया गया। 36 साल तक यह केस ठंडे बस्ते में पड़ा रहा था।

 

एजेंसी ने इसे आतंकवाद के पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में मील का पत्थर बताया है। एसआईए ने 2024 में मामला सौंपे जाने के बाद इसे फिर से खोला और यहां एनआईए की कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया। ​​यह मामला शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज सौरा में नर्स के तौर पर काम करने वाली सरला भट के लापता होने और इसके एक दिन बाद मृत पाए जाने की घटना से संबंधित है।

 

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कौन-कौन हैं आरोपी?

उस समय आतंकवादी संगठन जेकेएलएफ के स्वयंभू कमांडर-इन-चीफ रहे मलिक के अलावा, उसके चार साथियों- खुर्शीद अहमद चाल्कू, अब्दुल हामिद शेख, गुलाम मोहम्मद टपलू और मोहम्मद यूसुफ सूफी को भी मामले में आरोपी बनाया गया है। आरोपियों को आतंकवाद एवं विध्वंसक गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (टाडा),1987 और भारतीय शस्त्र अधिनियम, 1959 की विभिन्न धाराओं के तहत आरोपित किया गया है।

आतंकवाद के लिए ढाल नहीं बन सकता

एसआईए ने एक बयान में कहा कि मामला पुराना हो जाने पर भी आतंकवाद के लिए ढाल नहीं बन सकता और अत्याचारों के लिए जिम्मेदार लोग कानून के सामने जवाबदेह बने रहेंगे। यह मामला मार्च 2024 में एसआईए को सौंपा गया था और जांच एजेंसी ने पिछले दो सालों में कई जगहों पर छापेमारी की, ताकि पांचों आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र तैयार किया जा सके।

 

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मेहनत से तैयार किया गया दस्तावेज

एसआईए के एक प्रवक्ता ने कहा कि 737 पन्नों का यह आरोप पत्र, जिसे गहन जांच के बाद बहुत मेहनत से तैयार किया गया है, दशकों से जमा किये गए मौखिक, दस्तावेजी, फोरेंसिक, ‘बैलिस्टिक’, मेडिकल और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों का पुख्ता संग्रह है। लगभग 35 साल बाद आरोप पत्र दाखिल करना आतंकवाद पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में मील का पत्थर है और जम्मू कश्मीर में पुराने आतंकी अपराधों की जांच में यह एक सबसे अहम सफलता है।

एसआईए के प्रवक्ता ने क्या कहा?

एसआईए के प्रवक्ता ने कहा, 'जांच से पता चला है कि इस अपहरण और बर्बर हत्या की साजिश रचने और उसे अंजाम देने में मोहम्मद यासीन मलिक के साथ-साथ खुर्शीद अहमद चाल्कू, अब्दुल हामिद शेख, मोहम्मद यूसुफ सूफी उर्फ ​​इदरीस और गुलाम मोहम्मद टपलू भी शामिल थे। अब्दुल हामिद शेख, मोहम्मद यूसुफ सूफी उर्फ ​​इदरीस और गुलाम मोहम्मद टपलू की मौत हो चुकी है। मोहम्मद यासीन मलिक फिलहाल एक अन्य मामले में न्यायिक हिरासत में है।'

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