हर साल जब अप्रैल-मई के महीने में तगड़ी गर्मी पड़ती है तो खूब कूलर और AC चलते हैं। नतीजा यह होता है कि बिजली की मांग बढ़ जाती है। कई बार तो ट्रांसफॉर्मर तक फुंक जाते हैं और लोग बेहाल हो जाते हैं। शायद ऐसा पहली बार हुआ है कि गर्मी के बजाय सर्दी में बिजली की मांग काफी बढ़ गई है। इस समय पूरे उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। कई राज्यों में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक तापमान चल रहा है। ऐसे में बिजली की मांग बढ़ती जा रही है और यह मांग पिछले साल गर्मियों में पीक डिमांड से भी आगे निकल गई है।

 

रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार कम से कम दो बार ऐसा हुआ कि पीक डिमांड गर्मियों के दिनों की तुलना में ज्यादा हो गई। 9 जनवरी को पीक डिमांड 245 गीगावॉट थी और 13 जनवरी को 243 को गीगावॉट थी। वहीं, गर्मी के दिनों में यानी 12 जून को पीक डिमांड 242 गीगावॉट थी। 

गर्मी में कम और ठंडी में ज्यादा डिमांड कैसे?

 

दरअसल, 2025 की गर्मियों के समय बार-बार बारिश होने और तापमान कम रहने के चलते भीषण गर्मी वाले दिन कम रहे। नतीजा यह रहा कि बिजली की मांग बढ़ी तो लेकिन वह बहुत ज्यादा नहीं हुई। अनुमान था कि गर्मी में पीक डिमांड 277 गीगावॉट तक जा सकती है लेकिन यह डिमांड इससे कम ही रही।

 

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अगर पिछले पांच साल के आंकड़े देखें  तो 2020-21 के जनवरी महीने में पीक डिमांड 190 GW थी जबकि गर्मियों यह डिमांड 177 GW ही थी। 2023-24 की गर्मियों में पीक डिमांड 243 GW तक पहुंची जबकि इसी साल जनवरी में पीक डिमांड 223 GW तक पहुंची। आमतौर पर यह भी देखा गया है कि गर्मी में पीक डिमांड सर्दी की तुलना में ज्यादा ही रहती है। आखिरी बार 2020-21 में ऐसा हुआ था कि सर्दी में पीक डिमांड ज्यादा थी और गर्मी में कम थी। तब कोरोना महामारी के दौरान बिजली की मांग ज्यादा थी। उसके बाद से हर साल सर्दी में बिजली की मांग कम ही रही है। 

कारण क्या है?

 

दिसंबर 2025 में बिजली की मांग तेजी से बढ़ी और 241 GW तक पहुंच गई। सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के डेटा के मुताबिक, पिछले साल की तुलना में इसमें 7 पर्सेंट की बढ़ोतरी हुई थी। जनवरी के शुरुआती 15 दिनों में ही यह पीक डिमांड 245 GW तक पहुंच गई। 4 दिन बाद ही यह डिमांड फिर से 243 तक पहुंच गई।

 

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इसकी बड़ी वजह है कि इस साल ठंड तगड़ी पड़ रही है। उत्तर भारत के अलावा दक्षिण भारत के कई इलाकों में भी इस बार ठंड का असर देखा जा रहा है। साथ-साथ इंडस्ट्रियल और कमर्शियल डिमांड भी तेजी से बढ़ी है जिसके चलते पीक डिमांड रिकॉर्ड तोड़ रही है।