देश में विमानन क्षेत्र को लेकर एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। पिछले 10 वर्षों में भारत की 11 एयरलाइंस विभिन्न कारणों से बंद हो चुकी हैं। यह जानकारी सरकार ने राज्यसभा में दी। जिससे साफ होता है कि एविएशन सेक्टर में चुनौतियां लगातार बनी हुई हैं।
साकेत गोखले ने राज्यसभा में एयरलाइन की नाकामियों पर सवाल उठाए थे। जिसका जवाब 23 मार्च को नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने लिखित में दिया। अपने जवाब में मुरलीधर मोहोल ने बताया कि एयरलाइंस क्यों बंद हुईं। यह भी बताया कि विमानन क्षेत्र पूरी तरह बाजार आधारित है और एयरलाइंस अपने व्यावसायिक निर्णय खुद लेती हैं।
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क्यों बंद हुई कंपनियां?
सरकार के मुताबिक, एयरलाइंस के बंद होने के पीछे तीन मुख्य कारण रहे हैं पहला भारी वित्तीय दबाव, दूसरा विमानों की अनुपलब्धता और तीसरा कंपनियों के भीतर के आंतरिक मुद्दे। कई कंपनियां ईंधन की बढ़ती कीमतों और कम किराए के बीच तालमेल नहीं बैठा सकीं, जिससे उनका कर्ज बढ़ता गया।
इसके अलावा, सरकार ने यह भी बताया कि एयरएशिया इंडिया और विस्तारा जैसी बड़ी कंपनियां खत्म नहीं हुईं, बल्कि उन्हें एयर इंडिया एक्सप्रेस और एयर इंडिया लिमिटेड में विलय कर दिया गया है। ताकि वे एक बड़ी कंपनी के तौर पर ज्यादा अच्छा से काम कर सकें।
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किंगफिशर पर अभी भी करोड़ों रुपये बकाया
बंद हो चुकी कंपनियों के बकाए को लेकर सरकार ने चौकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं। भगोड़े कारोबारी विजय माल्या की 'किंगफिशर एयरलाइंस' ने भले ही 2012 में उड़ान बंद कर दी थी लेकिन भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण (AAI) के 380.51 करोड़ रुपये आज भी उस पर बकाया हैं। यह मामला फिलहाल बेंगलुरु के आधिकारिक लिक्विडेटर के पास लंबित है। वहीं, 'ट्रूजेट' पर 0.03 करोड़ रुपये बकाया हैं। राहत की बात यह है कि जेट एयरवेज और हाल ही में बंद हुई गो फर्स्ट का AAI पर कोई बकाया दर्ज नहीं है।
