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'धनखड़ पर दबाव डालने के लिए किया ED का प्रयोग', संजय राउत की किताब में दावा

शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने अपनी हालिया किताब अनलाइक्ली पैराडाइज में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को लेकर कई बातों का दावा किया है।

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जगदीप धनखड़ । Photo Credit: PTI

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शिव सेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने अपनी जेल में लिखी किताब के नए संस्करण में बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को मोदी सरकार ने इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया था। ED जैसी केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल करके धमकी दी गई, क्योंकि सरकार उनके स्वतंत्र फैसलों से नाराज थी।

 

राउत ने अपनी किताब ‘अनलाइक्ली पैराडाइज’ के अंग्रेजी संस्करण में चार नए अध्याय जोड़े हैं। यह किताब पिछले साल आई थी। नए अध्यायों में उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाइयों पर लिखा है। उन्होंने लिखा कि ED को लोग अब BJP की ‘शाखा’ कहने लगे हैं। राउत लिखते हैं कि केंद्र सरकार ने ED का इस्तेमाल चुनाव आयोग (ECI) और उपराष्ट्रपति जैसे लोकतांत्रिक संस्थानों पर दबाव डालने के लिए किया।

 

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2 चैप्टर ईडी से जुड़े हैं

किताब के दो अध्याय ED से जुड़े हैं। एक ‘सुप्रीम कोर्ट बनाम ED’ और दूसरा ‘चुनाव आयोग के दरवाजे पर और उपराष्ट्रपति के घर’। सोमवार को दिल्ली में इस किताब का विमोचन हुआ। आम आदमी पार्टी के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल और अन्य नेताओं ने किताब रिलीज की।

पैसे बाहर भेजने का आरोप

राउत ने किताब में लिखा है कि अफवाहें थीं कि धनखड़ और उनकी पत्नी ने जयपुर का घर बेच दिया और पैसे का कुछ हिस्सा विदेश भेज दिया। ED ने उनकी गतिविधियों पर नजर रखी और उनके खिलाफ चार्जशीट बनाने का फाइल तैयार कर लिया। जब धनखड़ की स्वतंत्र राजनीतिक गतिविधियों की खबरें आईं, तो ED ने उन्हें यह फाइल दिखाकर इस्तीफा देने का दबाव डाला। पहले उन्होंने मना किया, तो जांच और तेज हो गई। इससे वे परेशान नजर आने लगे।

 

राउत ने यह भी आरोप लगाया कि ED जजों की नियुक्ति, कामकाज और यहां तक कि राष्ट्रपति पर भी नजर रखती है।

बीजेपी ने दिया जवाब

इन आरोपों पर बीजेपी की महाराष्ट्र इकाई के मुख्य प्रवक्ता नवनाथ बान ने जवाब दिया। उन्होंने कहा, 'किसी किताब में लिख देने भर से बात सच नहीं हो जाती। इतने गंभीर आरोपों के लिए ठोस सबूत, सरकारी दस्तावेज या संबंधित लोगों के बयान चाहिए। संवैधानिक पदों पर रहे लोगों पर ऐसे आरोप लगाकर देश की संस्थाओं पर शक पैदा करने की कोशिश की जा रही है।'

 

धनखड़ ने इस मुद्दे पर ज्यादा कुछ नहीं कहा। हाल ही में उन्होंने कहा कि उन्होंने इस्तीफा स्वास्थ्य कारणों से नहीं दिया था। 26 फरवरी 2026 को राजस्थान के चुरू जिले के सादुलपुर में उन्होंने कहा, 'मैंने सिर्फ इतना कहा था कि मैं अपनी सेहत को प्राथमिकता दे रहा हूं। हर किसी को ऐसा करना चाहिए।'

यशवंत राव का मुद्दा

उनके इस्तीफे के तुरंत बाद दिल्ली में चर्चा थी कि न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ विपक्ष के महाभियोग प्रस्ताव को शुरू करने की उनकी कोशिश सरकार को पसंद नहीं आई। धनखड़ ने विपक्षी नेताओं से कहा था कि राज्य सभा में नोटिस दें, जबकि सरकार चाहती थी कि यह नोटिस पहले लोकसभा में आए। न्यायमूर्ति वर्मा के घर से मार्च 2025 में बड़ी रकम बरामद हुई थी।

 

उस समय राज्य सभा में एनडीए के एक भी सांसद ने विपक्ष के नोटिस पर दस्तखत नहीं किए थे, क्योंकि उन्हें पता ही नहीं था कि ऐसा नोटिस तैयार हो रहा है। जब धनखड़ ने घोषणा की कि उन्हें प्रस्ताव मिल गया है, तो सरकार की योजना बिगड़ गई।

लोकसभा में लाना चाहती थी सरकार

एक लोकसभा अधिकारी ने उस समय बताया था कि सरकार चाहती थी कि महाभियोग प्रस्ताव पहले लोकसभा में पास हो, ताकि इसे सरकार की सफलता बताया जा सके और न्यायपालिका को संदेश दिया जा सके। लेकिन धनखड़ ने सब कुछ बिगाड़ दिया।


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इसके बाद बीजेपी नाराज हो गई। बीजेपी अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता जेपी नड्डा और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू धनखड़ की अध्यक्षता वाली बिजनेस एडवाइजरी कमिटी की बैठक में नहीं गए। फिर धनखड़ ने फैसला लिया कि अब इस्तीफा देना ही ठीक रहेगा। उनके एक सहायक ने कहा था, 'इस्तीफा देना भी बहुत ताकत का काम है।'


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