ईरान के खिलाफ अमेरिका की रणनीति फेल होते दिख रही है। हजारों की संख्या में अमेरिकी सैनिकों को मध्य पूर्व भेजा जा रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर ईरान पर जमीनी हमला किया जा सके। उससे पहले शुक्रवार का दिन अमेरिका के लिए सबसे बुरा साबित हुआ। ईरान ने दो अमेरिकी जहाजों को मार गिराने का दावा किया। एक अन्य हेलीकॉप्टर पर हमला किया। देर रात तक अमेरिकी अधिकारियों ने भी फाइटर जेट खोने की बात मान ली।
अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि एक पायलट को सुरक्षित बचा लिया गया। वहीं दूसरे पायलट की तलाश है। सबसे बड़ी बात यह है कि अमेरिका के एफ-15 फाइटर प्लेन में दो पायलट होते हैं और क्रैश हुआ दूसरा विमान सिंगल सीटर था। कुल मिलाकर पायलटों की संख्या तीन बनती है। अगर एक बचा लिया गया और दूसरे की तलाश की जा रही है तो तीसरा पायलट कहां?
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फाइटर जेट गिरने के तुरंत बाद अमेरिका ने इराक से कुछ हेलीकॉप्टरों को ईरानी सीमा पर भेजा। यहां ईरान की थल सेना और हेलीकॉप्टर में सवार जवानों के बीच फायरिंग की। बताया जा रहा है कि जमीन के बेहद नजदीक उड़ रहे एक अमेरिकी हेलीकॉप्टर को नुकसान पहुंचा है। हालांकि स्वतंत्र तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।
पायलट नहीं मिले तो: सवाल यह है कि अगर अमेरिका को उसके पायलट नहीं मिले तो क्या होगा? कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना पूरे युद्ध में टर्निंग प्वाॉइंट साबित हो सकती है। अगर अमेरिका को उसके पायलट सही सलामत नहीं मिले तो ट्रंप पर घरेलू स्तर पर बेहद दबाव बढ़ेगा। नतीजा यह होगा कि ट्रंप प्रशासन वह कदम उठाने को मजबूर होगा, जिसे उठाने से अभी तक हिचकिचा रहा है। हाल ही अमेरिका-इजरायल ने ईरान के सबसे बड़े पुल बी-1 को तबाह किया। यह संकेत है कि आने वाले समय में अमेरिका ईरान के नागरिक ठिकानों पर हमलों को और देश करता है।
ईरान को पायलट मिले तो क्या होगा: एक तरफ अमेरिकी सेना तो दूसरी तरफ ईरान की सेना और जनता अमेरिकी पायलट की तलाश में जुटी है। ईरान की सरकारी टीवी ने पायलट को जिंदा या मुर्दा पकड़ने वाले को इनाम देने का ऐलान किया है। कुछ लोगों का मानना है कि अगर पायलट ईरान को मिल जाते हैं तो वह उसे टीवी पर दिखा सकता है। जीत के तौर पर पेश कर सकता है। अमेरिका के साथ होने वाली किसी भी बातचीत में सौदे के तौर पर पेश कर सकता है।
क्या होगा जमीनी हमले का: अमेरिका की सेना जमीनी हमले की तैयारी में है। 10 हजार से अधिक जवानों को मध्य पूर्व में भेजा जा रहा है। शुक्रवार को दो फाइटर जेट गिरने से इस प्लान को झटका लग सकता है। अमेरिका अभी तक मानकर चल रहा था कि ईरान का एयर डिफेंस तबाह हो चुका है। अमेरिका के खिलाफ वह काम नहीं करेगा। मगर शुक्रवार को जहाज गिरने से अमेरिका की उम्मीदों को झटका लगा है। माना जा रहा है कि अमेरिका जमीनी हमला करने पर दोबारा विचार कर सकता है।
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दो दिन में अमेरिका को कितना नुकसान पहुंचा?
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक होर्मुज की खाड़ी के पास अमेरिकी लड़ाकू विमान ए-10 वॉर्थोग हादसे का शिकार हुआ है। वहीं ईरानी मीडिया का दावा है कि दुश्मन के जहाज को निशाना बनाया गया है। एनबीसी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि दो अमेरिकी हेलीकॉप्टर भी गोलीबारी की चपेट में आए हैं। उधर, न्यूयॉर्क टाइम्स ने जानकारी दी है ए-10 वॉर्थोग विमान के इकलौते पायलट को बाच लिया गया है।
ए-10 फाइटर प्लेन: अमेरिका के पास 700 से अधिक ए-10 फाइटर प्लेन है। 1972 से 1984 के बीच इनका निर्माण किया गया। साल 1997 से ये विमान सेवा में हैं। 2003 में इराक और 2001 में अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ जंग में ए-10 फाइटर प्लेन ने हिस्सा लिया था। एक विमान की लगभग 11.4 मिलियन डॉलर कीमत है। सिंगल सीटर यह विमान जमीनी सेना को सहायता देने की खातिर डिजाइन किया गया था।
एफ- 15 फाइटर प्लेन: ए-10 फाइटर प्लेन से आईआरजीसी ने दक्षिण-पश्चिम ईरान में एफ-15ई लड़ाकू विमान को मार गिराया है। यह विमान ए-10 की तुलना में ज्यादा महंगा है। इसके एक विमान की कीमत 31 मिलियन डॉलर है। 1985 से उत्पादन शुरू हुआ और 2017 तक 435 जहाजों का निर्माण किया गया।
ईरान का दावा है कि मार गिराया गया एफ 15 विमान ने पूर्वी इंग्लैंड के रॉयल एयर फोर्स लेकनहीथ एयरबेस से उड़ान भरी थी। बता दें कि मार्च की शुरुआत में भी ईरान ने एक एफ-35 विमान को मार गिराने का दावा किया था। हालांकि बाद में अमेरिका ने इसका खंडन किया था। उस वक्त अमेरिका ने इतना ही कहा था कि एक एफ-35 विमान की आपात लैंडिंग हुई थी।
