संसद की स्थायी समिति ने बुधवार 18 मार्च 2026 को संसद में अपनी रिपोर्ट पेश करते हुए केंद्र सरकार से शिक्षा पर सार्वजनिक खर्च को जीडीपी के 6 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए समय पर कदम उठाने की सिफारिश की है। कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली 31 सदस्यीय समिति ने चिंता जताई कि वर्तमान में केंद्र और राज्यों का कुल खर्च केवल 4.06 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के लक्ष्यों और ब्राजील (5.62%) या दक्षिण अफ्रीका (6.16%) जैसे अन्य ब्रिक्स देशों की तुलना में काफी कम है। समिति ने स्पष्ट किया कि वैश्विक स्तर पर मुकाबला करने और देश के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए शिक्षा बजट में यह बड़ी बढ़ोतरी जरूरी है।
समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि उच्च शिक्षा विभाग के बजट में भारी कमी की गई है। साल 2025-26 के 10.27 करोड़ रुपये के मुकाबले 2026-27 के लिए इसे घटाकर केवल 2.68 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसके साथ ही यूजीसी (UGC) में 67.6 प्रतिशत और एआईसीटीई (AICTE) में 63.6 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं। समिति ने सरकार को चेतावनी दी है कि स्टाफ की इतनी बड़ी कमी और बजट में कटौती से संस्थानों की योग्यता और शिक्षा की खूबी पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है, जिसे सुधारने के लिए निवेश बढ़ाना जरूरी है।
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मिड-डे मील योजना में बदलाव
संसदीय समिति ने स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए कुछ कड़े और जरूरी सुझाव दिए हैं। रिपोर्ट में यह बचाया गया कि देश में अभी भी करीब 11.2 लाख बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। इसके अलावा 22,298 ऐसे पाए गए हैं जो बिना किसी सरकारी मान्यता के चल रहे हैं जो कि नियमों के खिलाफ है। बच्चों को स्कूल में पढ़ाई जारी रखने के लिए मिड-डे मील की सुविधा को बढ़ाने का सुझाव दिया गया है। अभी यह खाना सिर्फ कक्षा 8 तक मिलता है।
समिति चाहती है कि इसे तुरंत कक्षा 10 तक लागू किया जाए और अगले 5 सालों में 12वीं तक के सभी छात्रों को इसका फायदा मिले। समिति का मानना है कि स्कूल में अच्छा खाना मिलने से बच्चे बीच में पढ़ाई नहीं छोड़ेंगे, जिससे खासकर लड़कियों की शिक्षा और सेहत में बड़ा सुधार होगा।
विदेशी यूनिवर्सिटी पर भी चर्चा
संसदीय समिति ने कहा कि विशेष योजनाओं के बाद भी भारत कि कोई यूनिवर्सिटी दुनिया की टॉप 100 रैंकिग में नहीं है। अब समिति ने सिफारिश की है कि कॉलेजों को सरकारी फंडिंग तभी दिया जाए, जब वे अपनी रिसर्च और शिक्षकों की योग्यता में सुधार दिखाएं। समिति ने विदेशी यूनिवर्सिटी के भारत आने का समर्थन किया है और उनपर नजर रखने को भी कहा है। एक शर्त यह भी रखी कि ये विदेशी संस्थान भारत में शिक्षा से होने वाली अपनी सारी कमाई को यहीं दोबारा निवेश करेंगे। ताकि भारत की शिक्षा व्यवस्था को इसका पूरा फायदा मिल सके।
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छात्राओं के लिए नए हॉस्टल
नेशनल डिजिटल यूनिवर्सिटी (NDU) के लिए बजट तो पास हो गया लेकिन अभी तक उस पर एक भी पैसा खर्च नहीं किया गया है। समिति ने सरकार से इसका पूरा प्लान मांगा है ताकि छात्र जल्द से जल्द ऑनलाइन पढ़ाई का फायदा उठा सकें। समिति ने हर जिले में छात्राओं के लिए 'गर्ल्स स्टेम हॉस्टल' बनाने के काम में तेजी लाने को कहा है।
निर्देश दिया गया है कि आदिवासी और नक्सल प्रभावित इलाकों में ये हॉस्टल सबसे पहले तैयार किए जाएं। इन हॉस्टलों में हाई-स्पीड इंटरनेट की सुविधा भी दी जाएगी ताकि लड़कियां विज्ञान और तकनीक (STEM) की पढ़ाई आसानी से कर सकें।
