भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुई ट्रेड डील को लेकर भारत में सड़क से संसद तक हलचल तेज है। एक तरफ मोदी सरकार इस डील के लिए अपनी पीठ थपथपा रही है तो वहीं दूसरी तरफ विपक्ष समेत किसान भी सरकार की आलोचना कर रहे हैं। इस बीच किसान इस ट्रेड डील के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। संयुक्त किसान मोर्चा, ऑल इंडिया किसान सभा और अन्य किसान संगठनों ने इस डील के खिलाफ आज यानी 12 फरवरी को नेशनल लेवल पर विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है।
किसान इस ट्रेड डील को किसानों के खिलाफ बता रहे हैं। किसान संगठन इस डील को अमेरिका के सामने मोदी सरकार का आत्मसमर्पण बता रहे हैं। किसान इस डील को भारत के कृषि, डेयरी और ग्रामीण आजीविका के लिए सीधा खतरा बता रहे हैं और इसका विरोध करने की बात कह रहे हैं।
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ट्रेड डील में कृषि के लिए क्या?
इस ट्रेड डील में कहा गय है कि भारत अमेरिका के सभी औद्योगिक सामानों और अमेरिका के फूड और कृषि उत्पादों पर भी टैरिफ या तो खत्म करेगा या फिर उसे कम करेगा। ट्रेड डील की सहमति को लेकर जारी संयुक्त बयान शेयर करते हुए वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि संवेदनशील कृषि और डेयरी उत्पादों में भारतीय किसानों के हितों की रक्षा की गई है।
भारत इन उत्पादों पर टैरिफ कम करेगा
- ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स
- पशु आहार के लिए लाल ज्वार
- सूखे मेवे
- ताजे और प्रोसेस्ड फल
- सोयाबीन तेल
- वाइन और शराब
- कई अन्य कृषि उत्पात
अमेरिका 18 फीसदी टैरिफ लगाएगा
- कपड़ा और अपैरल उत्पाद
- चमड़ा और जूते
- प्लास्टिक और रबड़ प्रोडक्ट
- बायोकेमिकल
- होम डेकोर और हैंडीक्राफ्ट
- कुछ मशीनरी प्रोडक्ट
किसान विरोध में क्यों?
किसानों का कहना है कि इस डील में जो शर्तें रखी गई हैं वह केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की ओर से दिए गए आश्वासन के उल्ट है। किसानों का कहना है कि एग्रीकल्चर उत्पादों को मुक्त व्यापार समझौते से बाहर रखा जाएगा और इसके लिए उन्होंने न्यूजीलैंड, ईयू और ब्रिटेन के साथ हाल में किए गए व्यापार समझौतों का भी हवाला दिया था।
किसानों का कहना है कि अमेरिकी कृषि उत्पादों पर पहले भारत 30 से 150 प्रतिशत तक टैरिफ लगाता था लेकिन अब उस टैरिप को जीरो किया जा रहा है। किसानों का तर्क है कि भारत में 80 प्रतिशत किसान छोटे किसान हैं और ऐसे में अमेरिकी उत्पादों पर कम टैरिफ किसानों के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है। किसानों का कहना है कि भारतीय किसान मल्टी नेशनल कंपनी और निगमों के भरोसे रह जाएंगे, जिससे ग्रामीण रोजगार खत्म हो जाएगा।
किसान संगठन एसकेएम की दलील है कि अमेरिकी गेहूं 18.50 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से निर्यात हो रहा है और अगर भारतीय बाजारों को इसके लिए खोल दिया गया तो भारतीय किसान तबाह हो जाएंगे। एसकेएम ने तर्क दिया कि अमेरिका 18 प्रतिशत टैक्स और भारत जीरो लगा रहा है यह मुक्त व्यापार नहीं है। भारत पर 2023-24 में टैरिफ शून्य से 3 प्रतिशत और फिर 18% हो गया है, जबकि अमेरिकी कृषि उत्पादों पर हमारे शुल्क जो 30 प्रतिशत से 150 प्रतिशत तक थे, अब शून्य कर दिए गए हैं। इससे भारतीय कृषि बाजार अमेरिकी मल्टीनेशनल कंपनियों के फंदे में फंस जाएगा।
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डेयरी और पॉल्ट्री को लेकर चिंताएं
किसान डेयरी और पॉल्ट्री उत्पादों को लेकर भी चिंता में हैं। अमेरिकी दूध और डेयरी उत्पादों पर पहले प्रतिबंध थे लेकिन अब गैर टैरिफ प्रतिबंध कमजोर हो रहे हैं। किसानों का कहना है कि इससे लाखों ग्रामीण परिवार प्रभावित होंगे। अमेरिका से जेनेटिकली मॉडिफाइड मकई पशु चारे के रूप में आएगा, जो पॉल्ट्री और डेयरी को सस्ता चारा देगा लेकिन भारतीय सोयाबीन किसानों को इससे नुकसान पहुंचेगा।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस डील के हो जाने से अमेरिकी उत्पादों को भारतीय बाजार में वह जगह मिलेगी जो अब तक नहीं मिली है। बीबीसी से बात करते हुए कृषि विशेषज्ञ देवेंद्र शर्मा ने कहा, 'अभी तक भारत ने किसानों के हितों का बचाव किया है, यह बात सही है लेकिन यह समझ नहीं आता कि अमेरिकी कृषि मंत्री ने क्यों कहा कि इस समझौते से दुनिया का सबसे बड़ा बाज़ार खुल गया है और अमेरिकी ग्रामीण अर्थव्यवस्था में इससे नकदी बढ़ेगी।'
देवेंद्र शर्मा ने इस बात पर भी आपत्ति जताई की यह रेसिप्रोकल टैरिफ नहीं है। उनका कहना है कि एक तरफ तो जीरो प्रतिशत टैरिफ है और दूसरी तरफ 18 प्रतिशत टैरिफ है। देवेंद्र शर्मा ने कपास का उदाहरण देकर समझाया कि किस तरह से भारतीय किसानों के लिए यह लेवल प्लेइंग फिल्ड नहीं है।
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सरकार का पक्ष
इस मुद्दे पर सरकार भी लगातार अपना पक्ष रख रही है और कह रही है कि इस डील से किसानों को कोई नुकसान नहीं होगा। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, 'अगर हम कृषि और कृषि उत्पादों को देखें, तो भारतीय किसानों को नुकसान पहुंचाने वाला कोई भी उत्पाद शामिल नहीं किया गया है। ऐसे सभी उत्पादों को व्यापार समझौते से बाहर रखा गया है।' शिवराज सिंह चौहान ने एक लंबी लिस्ट देकर बताया कि भारत के कृषि क्षेत्र को इस डील में सुरक्षा प्रदान की गई है।
