लद्दाख में शुक्रवार को भारतीय सेना का एक चीता हेलिकॉप्टर अचानक दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में सेना के एक मेजर जनरल समेत तीन अधिकारी घायल हुए हैं। राहत की बात यह रही कि सभी अधिकारियों की जान बच गई और उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। घटना के बाद सेना ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं।

 

जानकारी के मुताबिक हादसा लद्दाख के तांगत्से इलाके के पास 20 मई को हुआ। हादसे के समय सेना का चीता हेलिकॉप्टर नियमित सैन्य उड़ान पर था। हेलिकॉप्टर में सेना के मेजर जनरल सचिन मेहता सवार थे, जो सेना की तीसरी इन्फैंट्री डिवीजन के जनरल ऑफिसर हैं। हेलिकॉप्टर को एक लेफ्टिनेंट कर्नल और एक मेजर रैंक का अधिकारी उड़ा रहे थे। इसी दौरान हेलिकॉप्टर अचानक दुर्घटनाग्रस्त हो गया। 

 

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सुरक्षित बचे तीनों अधिकारी

बताया जा रहा है कि  यह हेलिकॉप्टर श्योक नदी के पास के इलाके में सीधे एक पहाड़ी से जा टकराया। हादसे की सूचना मिलते ही सेना की बचाव टीमें मौके पर पहुंचीं। तीनों अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और तुरंत इलाज के लिए भेजा गया। सेना के सूत्रों के मुताबिक अधिकारियों को मामूली चोटें आई हैं और उनकी हालत स्थिर बनी हुई है।

कहां इस्तेमाल होता है चीता हेलिकॉप्टर?

चीता हेलिकॉप्टर भारतीय सेना के सबसे पुराने हल्के हेलिकॉप्टरों में शामिल है। इनका इस्तेमाल खासतौर पर लद्दाख, सियाचिन और पहाड़ी सीमावर्ती इलाकों में किया जाता है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सैनिकों और जरूरी सामान को पहुंचाने के लिए ये हेलिकॉप्टर अहम माने जाते हैं। खराब मौसम और कठिन परिस्थितियों में भी ये उड़ान भरने में सक्षम होते हैं। हालांकि, पिछले कुछ सालों में चीता हेलिकॉप्टरों की सुरक्षा को लेकर कई बार सवाल उठ चुके हैं। सेना धीरे-धीरे इन पुराने हेलिकॉप्टरों की जगह नए और आधुनिक हेलिकॉप्टर शामिल करने की योजना पर काम कर रही है। 

 

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सेना ने शुरू की जांच

भारतीय सेना ने हादसे की वजह पता लगाने के लिए आंतरिक जांच शुरू कर दी है। जांच में यह देखा जाएगा कि दुर्घटना तकनीकी खराबी, मौसम या किसी अन्य कारण से हुई। फिलहाल सेना ने हादसे की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।

 

बता दें कि लद्दाख देश के सबसे कठिन सैन्य इलाकों में गिना जाता है। यहां अत्यधिक ऊंचाई, कम ऑक्सीजन और अचानक बदलने वाला मौसम उड़ानों को जोखिम भरा बना देता है। सेना के हेलिकॉप्टर सीमावर्ती चौकियों तक जवानों, हथियारों, राशन और जरूरी सामान पहुंचाने का काम करते हैं। कई बार इन्हीं हेलिकॉप्टरों के जरिए बीमार जवानों को अस्पताल भी पहुंचाया जाता है। ऐसे में इस तरह के हादसे सेना के लिए गंभीर चिंता का विषय माने जाते हैं।