भारतीय रेलवे में कन्फर्म टिकट पाना अब किसी बड़ी लॉटरी से कम नहीं रह गया है। एक RTI से हुए चौंकाने वाले खुलासे के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान करीब 3.39 करोड़ यात्री ट्रेन में सफर करने से वंचित रह गए। वजह यह थी कि उनकी वेटिंग लिस्ट टिकट चार्ट बनने तक कन्फर्म नहीं हुई और नियमों के मुताबिक ऑटो-कैंसिल हो गई।

 

मध्य प्रदेश के नीमच के RTI कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ को मिले जवाब के अनुसार, यह समस्या अब विकराल रूप ले चुकी है। आंकड़ों का गणित देखें तो हर दिन औसतन 92,877 यात्री कन्फर्म बर्थ न मिलने के कारण ट्रेन में नहीं चढ़ सके। इसका सीधा मतलब है कि हर घंटे लगभग 3,870 मुसाफिर, हर मिनट 64 यात्री और हर सेकंड एक से अधिक व्यक्ति की यात्रा की उम्मीदें रेलवे की वेटिंग लिस्ट में दम तोड़ रही हैं।

 

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स्लीपर और 3AC यात्रियों पर सबसे ज्यादा मार

आंकड़ों को देखें तो साफ पता चलता है कि रेलवे की इस कमी का सबसे ज्यादा असर गरीब और मिडिल क्लास लोगों पर पड़ रहा है। ऐसे लोग, जिनके लिए ट्रेन ही आने-जाने का सबसे बड़ा और सस्ता सहारा है। सबसे ज्यादा परेशानी स्लीपर क्लास के यात्रियों को हुई, जहां 1.68 करोड़ लोग कन्फर्म टिकट नहीं मिलने की वजह से सफर नहीं कर सके। इसके बाद 3AC का नंबर आता है, जिसमें 74.55 लाख यात्रियों की टिकट कन्फर्म नहीं हो पाई।

पांच साल में दोगुना हुआ वेटिंग लिस्ट का संकट

रेलवे की यह समस्या साल-दर-साल कम होने के बजाय बढ़ती ही जा रही है। साल 2021-22 में वेटिंग के कारण सफर न कर पाने वालों की संख्या 1.65 करोड़ थी, जो 2022-23 में बढ़कर 2.72 करोड़ और 2024-25 में 3.27 करोड़ तक पहुंच गई। अब 2025-26 में 3.39 करोड़ का यह आंकड़ा बता रहा है कि यात्रियों की बढ़ती मांग के मुकाबले ट्रेनों और बर्थ की संख्या बढ़ाने में रेलवे काफी पीछे छूट गया है।

 

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यात्रियों की जिंदगी पर पड़ रहा असर

कन्फर्म टिकट न मिलना सिर्फ यात्रा रद्द होने तक सीमित नहीं है। कई यात्रियों के लिए इसका मतलब परीक्षा छूट जाना, नौकरी का नुकसान, इलाज में देरी और जरूरी पारिवारिक कार्यक्रमों से दूर रह जाना भी होता है। RTI कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने कहा कि रेलवे को भविष्य के बड़े प्रोजेक्ट्स दिखाने के बजाय मौजूदा जरूरतों पर ध्यान देना चाहिए, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।