भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (ISRO) साल 2026 के अपने पहले अंतरिक्ष कार्यक्रम उम्मीद के मुताबिक सफल नहीं हो सका। पोलर सेटेलाइट लॉन्च व्हीकल PSLV-C62 की मदद से भारत अन्वेषा सेटेलाइट को अंतरिक्ष में स्थापित करने जा रहा था लेकिन यह मिशन सफल नहीं हो सका। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से भारत के अंतरिक्ष मिशन की शुरुआत हुई लेकिन रॉकेट लॉन्च होने के तीसरे चरण में असफलता हाथ लगी। ISRO अपना सबसे भरोसेमंद रॉकेट PSLV-C62 लॉन्च कर रहा है। यह PSLV की 64वीं उड़ान है। इस मिशन का आकर्षण है EOS-N1। यह एक एडवांस्ड अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है, जिसे DRDO ने तैयार किया है। यह धरती की ऐसी निगरानी करेगा, जैसे कोई ड्रोन कर रहा हो। इसकी मदद से इससे रक्षा, निगरानी, कृषि, पर्यावरण मॉनिटरिंग और आपदा प्रबंधन में बहुत मदद मिलेगी।
इसरो के इस रॉकेट में कुल 15 छोटे-छोटे सैटेलाइट्स भी थे। थाईलैंड, यूके, ब्राजील, संयुक्त अरब अमीरात और सिंगापुर ने अपने सेटेलाइट भेजे थे। इनका काम कृषि डेटा जुटाना, रेडिएशन नापना और समुद्री क्षेत्र पर नजर रखना था। स्पेन की एक स्टार्टअप कंपनी का केस्ट्रल इनीशियल टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर (KID) नाम का एक छोटा उपग्रह भी भेजा गया। यह लगभग फुटबॉल जितना बड़ा है। इसका वजन 25 किलो है। यह री-एंट्री व्हीकल का छोटा मॉडल है। इसे सबसे आखिर में छोड़े जाने की योजना थी। प्रोग्रामिंग थी कि यह धरती के वायुमंडल में वापस आएगा और साउथ पैसिफिक महासागर में गिरेगा। यह भविष्य के स्पेसक्राफ्ट की वापसी की तकनीक का टेस्ट था, जो असफल रहा।
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अन्वेषा क्या है?
इसरो ने EOS-N1 तैयार किया है। इसे Anvesha भी नाम दिया गया है। आसान हिंदी में इसका मतलब खोजबीन या तलाश है। यह DRDO के लिए तैयार किया गया है। यह हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग सैटेलाइट है, जो जमीन पर छिपी हुए चीजों, फसलों और पर्यावरण के लिए बेहद खास होने वाला है। भारत के सीमाई इलाकों में यह देश की आंख की तर काम करेगा, हाई डेफिनेशन इमेज देगा। इस सैटेलाइट का वजन करीब 400 किलो है। यह एक जियोस्टेशनरी सैटेलाइट है, जिसकी गति, धरती के सापेक्ष ही होती है। अभी यह उपग्रह अपने कक्ष में पहुंचने से पहले खो गया है।
और किन उपग्रहों पर नजर रहेगी?
इसरो के इस मिशन में 15 छोटे को-पैसेंजर सैटेलाइट भी भेजे जा रहे हैं। इनमें भारत, थाईलैंड, नेपाल, ब्राजील, स्पेन, UK आदि देशों के स्टार्टअप और यूनिवर्सिटी के सैटेलाइट शामिल हैं। कुछ सैटेलाइट पर्यावरण, AI, रिफ्यूलिंग टेस्ट और एमेच्योर रेडियो के लिए हैं।
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मिशन में खास क्या है?
सेटेलाइट लॉन्च के करीब 2 घंटे बाद रॉकेट के चौथे स्टेज को दोबारा चालू करके स्पेन की एक स्टार्टअप का 25 किलो का केस्ट्रेल कैप्सूल (KID) री-एंट्री टेस्ट करेगा। यह कैप्सूल और स्टेज दोनों दक्षिण प्रशांत महासागर में गिरेंगे। यह रीयूजेबल टेक्नोलॉजी की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।
PSLV रॉकेट क्यों बना भरोसेमंद रॉकेट?
यह ISRO का सबसे भरोसेमंद रॉकेट है। अब तक इसके जरिए इसरो के 63 मिशन सफल हो चुके हैं। चंद्रयान-1, मंगलयान और आदित्य-L1 जैसे बहुचर्चित मिशन इसी के जरिए भेजे गए थे। इस बार 260 टन वजन का रॉकेट इस्तेमाल किया जा रहा है। PSLV-DL वेरिएंट भी बेहद खास है। इसमें दो चरण के 2 स्ट्रैप-ऑन मोटर हैं।
स्ट्रैप-ऑन मोटर क्या है?
स्ट्रैप-ऑन मोटर को स्टेपिंग मोटर भी कहते हैं। यह एक खास तरह का मोटर है, जो लगातार घूमने के बजाय छोटे-छोटे, तय चरणों में घूमती है। ठीक वैसे ही जैसे घड़ी की सुई एक-एक सेकंड आगे बढ़ती है। यह अपनी सटीक स्थिति को कंट्रोल करने के लिए डिजिटल पल्स के फॉर्मूले पर काम करता है।
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कब शुरू हुआ था मिशन?
इसरो के इस मिशन का काउंटडाउन रविवार दोपहर शुरू हो गया था। ISRO ने कहा है कि सब कुछ तैयार है और लाइव स्ट्रीमिंग भी चल रही है। यह मिशन भारत के स्पेस प्रोग्राम के लिए बहुत अहम है। रक्षा, पर्यावरण और कमर्शियल लॉन्च में भारत के कदमों को और मजबूत करेगा।
